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पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की सुरक्षा पर HC सख्त: 23 पुलिसकर्मी रहते थे तैनात, अदालत ने उठाए सवाल

Wed, 13 May 2026 09:51 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Wed, 13 May 2026 09:51 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि मामला अब केवल हरभजन सिंह तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे पंजाब में वीआईपी सुरक्षा के नाम पर पुलिस बल के उपयोग की व्यापक समीक्षा की जाएगी। ह

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High Court strict on security of former cricketer Harbhajan Singh
हरभजन सिंह, पूर्व क्रिकेटर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राज्यसभा सदस्य और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह उर्फ भज्जी की सुरक्षा से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि उनकी सुरक्षा के लिए केवल 8 पुलिसकर्मियों की स्वीकृति थी जबकि वास्तव में उनके साथ 23 पंजाब पुलिसकर्मी तैनात थे।

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अदालत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा है कि 15 अतिरिक्त पुलिसकर्मी किसके आदेश पर अनौपचारिक रूप से सार्वजनिक धन के खर्च पर लगाए गए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकृत आदेशों से परे अतिरिक्त पुलिस बल जोड़ा गया जो सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मामला बन सकता है।
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हाईकोर्ट ने पंजाब के एडीजीपी (सिक्योरिटी) और एसएसपी मोगा को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के आदेश दिए हैं। साथ ही मोगा जिले से शुरुआत करते हुए यह जिला वार जांच कराने को कहा गया है कि कितने लोगों को सुरक्षा कवर मिला हुआ है और उनमें कितने पुलिसकर्मी आधिकारिक तथा कितने अनौपचारिक रूप से तैनात हैं।

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हाईकोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि मामला अब केवल हरभजन सिंह तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे पंजाब में वीआईपी सुरक्षा के नाम पर पुलिस बल के उपयोग की व्यापक समीक्षा की जाएगी। हरभजन सिंह ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनकी सुरक्षा बिना किसी नए खतरा आकलन, नोटिस या सुनवाई के अचानक वापस ली गई। उन्होंने कहा कि वह 10 अप्रैल 2022 को आम आदमी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे और जालंधर में परिवार सहित रह रहे हैं। पार्टी छोड़ने की सार्वजनिक घोषणा के तुरंत बाद उनकी सुरक्षा हटाई गई। 

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सुरक्षा व्यवस्था में असमानता की तस्वीर भी उभरी। एक ओर हरभजन सिंह के पास 23 पुलिसकर्मियों का सुरक्षा घेरा था। वहीं फायरिंग झेल चुके एक जिला परिषद उपाध्यक्ष और ठेकेदार को कथित गैंग खतरे के बावजूद दिन में केवल एक एएसआई की सुरक्षा दी गई।

इस मामले ने अदालत को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या सुरक्षा संसाधनों का वितरण वास्तविक खतरे के आधार पर हो रहा है या प्रभावशाली व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जा रही है। व्यवस्था को लेकर पंजाब सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए पूरे राज्य में वीआईपी सुरक्षा संस्कृति पर बड़ा न्यायिक हस्तक्षेप किया है।
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