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चार दोषियों को सात साल और दो को पांच साल कैद
पठानकोट
Updated Mon, 23 Sep 2013 11:14 PM IST
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जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव कालरा की अदालत ने दो गुटों के बीच हुए झगड़े के मामले में एक गुट के चार लोगों को हत्या के प्रयास के आरोप में सात-सात कैद और 18-18 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जुर्माना अदा नहीं करने की सूरत में उन्हें तीन-तीन माह अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। जबकि दूसरे गुट के शिकायतकर्ता समेत दो लोगों को 5-5 साल कैद और 8-8 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
जानकारी के मुताबिक नरोट जैमल सिंह के गांव माजरा में 29 नवंबर, 2005 को दो गुटों के बीच जमीन विवाद के चलते हुए झगड़ा हुआ था। झगड़े में घायल रमेश पाल ने आरोप लगाया था कि गांव में उनकी जमीन पर दिलबाग सिंह, वरिंदर सैनी, विवेक सैनी और वैष्णो दास अपने साथियों समेत नींव खोदकर कब्जा कर रहे थे।
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उन्हें कब्जे से रोकने पर उपरोक्त सभी ने बाद में उसके घर पर हमला बोलकर जख्मी कर दिया था। मामले की शिकायत पर नरोट जैमल सिंह पुलिस ने उपरोक्त चारों के खिलाफ हत्या के प्रयास के आरोप में मामला दर्ज किया था। उक्त मामले में पुलिस की ओर से कोर्ट में चालान पेश किया गया।
आठ साल तक कोर्ट में चले मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव कालरा की अदालत ने हत्या के प्रयास के आरोप में चारों को दोषी ठहराते हुए 7-7 साल कैद और 18-18 हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
इसी मामले में दिलबाग सिंह ने कोर्ट में रमेश पाल, सुरेश पाल, तरसेम लाल, रखो देवी और अंजू के खिलाफ इस्तगासा दायर किया था। इनमें तरसेम लाल की मौत हो चुकी है। इस पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव कालरा की अदालत ने रमेश पाल और सुरेश पाल को 5-5 साल कैद और 8-8 हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है। जबकि अन्य दो को बरी कर दिया गया।
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जुर्माना अदा नहीं करने की सूरत में उन्हें तीन-तीन माह अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। जबकि दूसरे गुट के शिकायतकर्ता समेत दो लोगों को 5-5 साल कैद और 8-8 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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जानकारी के मुताबिक नरोट जैमल सिंह के गांव माजरा में 29 नवंबर, 2005 को दो गुटों के बीच जमीन विवाद के चलते हुए झगड़ा हुआ था। झगड़े में घायल रमेश पाल ने आरोप लगाया था कि गांव में उनकी जमीन पर दिलबाग सिंह, वरिंदर सैनी, विवेक सैनी और वैष्णो दास अपने साथियों समेत नींव खोदकर कब्जा कर रहे थे।
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उन्हें कब्जे से रोकने पर उपरोक्त सभी ने बाद में उसके घर पर हमला बोलकर जख्मी कर दिया था। मामले की शिकायत पर नरोट जैमल सिंह पुलिस ने उपरोक्त चारों के खिलाफ हत्या के प्रयास के आरोप में मामला दर्ज किया था। उक्त मामले में पुलिस की ओर से कोर्ट में चालान पेश किया गया।
आठ साल तक कोर्ट में चले मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव कालरा की अदालत ने हत्या के प्रयास के आरोप में चारों को दोषी ठहराते हुए 7-7 साल कैद और 18-18 हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है।
इसी मामले में दिलबाग सिंह ने कोर्ट में रमेश पाल, सुरेश पाल, तरसेम लाल, रखो देवी और अंजू के खिलाफ इस्तगासा दायर किया था। इनमें तरसेम लाल की मौत हो चुकी है। इस पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजीव कालरा की अदालत ने रमेश पाल और सुरेश पाल को 5-5 साल कैद और 8-8 हजार रुपये जुर्माने की सजा का फैसला सुनाया है। जबकि अन्य दो को बरी कर दिया गया।