पंजाब: नवजोत सिद्धू ने उठाई किसानों को मुआवजे की मांग, कहा-इस बार गेहूं की उपज कम हुई
माछीवाड़ा पहुंचे नवजोत सिद्धू ने कहा कि रूस-यूक्रेन संकट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 25-30 फीसदी गेहूं की किल्लत आ गई है और रेट बढ़ा है।
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पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि इस बार गेहूं की उपज बहुत कम है। किसानों ने मुझसे मुआवजे की मांग उठाने को कहा है। माछीवाड़ा पहुंचे सिद्धू ने कहा कि रूस-यूक्रेन संकट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 25-30 फीसदी गेहूं की किल्लत आ गई है और रेट बढ़ा है। उधर, जंडियाला गुरु दाना मंडी का दौरा करने के बाद पत्रकारों से नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि आम आदमी पार्टी पंजाब को लॉचिंग पैड की तरह इस्तेमाल करना चाहती है। उन्होंने मंडी में गेहूं बेचने पहुंचे किसानों और आढ़तियों से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ज्यादातर इलेक्शन मोड में रहते हैं। वे पंजाब को लॉचिंग पैड ही मानते हैं। पंजाब में जीत के बाद वह गुजरात और हिमाचल प्रदेश में जीत का सपना देख रहे हैं। केजरीवाल पंजाब में हुई अपनी बड़ी जीत को अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों में जीत का रास्ता समझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 से लेकर 2021 तक तो केजरीवाल को किसानों की याद नहीं आई। वर्ष 2022 में पंजाब के चुनाव आते ही उन्हें किसानों की याद आ गई। चुनावों से पहले केजरीवाल ने पंजाब में सरकार बनने पर किसानों को नुकसान के तौर पर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने का वादा किया था। यह वादा भाषण तक सीमित रह गया।
सिद्धू ने गेहूं के मुआवजे पर आप आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने 300 यूनिट मुफ्त बिजली पर कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार एक छलिया की तरह है। जिसने सभी वर्गों को हर माह 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने का चुनावों से पहले वादा किया था। हर दो माह में 600 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी। अब जनरल वर्ग को 600 यूनिट से एक भी यूनिट ज्यादा होने पर पूरा बिल देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि किसानों को रोजाना सिर्फ दो घंटे बिजली आपूर्ति की जाती है। उन्होंने कहा कि पंजाब में बिजली की खपत आठ हजार मेगावाट है तो धान के सीजन में यह 15 मेगावाट तक पहुंच जाएगी।
उन्होंने कहा कि जींस की कीमत नौ फीसदी बढ़ाई है लेकिन अन्य कीमतें 100 फीसदी बढ़ी हैं। गेहूं की कीमत 2200 रुपये प्रति क्विंटल किसान को मिल रही है। रूस और यूक्रेन के युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में 25 से 30 फीसदी की कमी है और गेहूं की कीमत 3500 से 4000 रुपये हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमत 2000 रुपये ज्यादा मिल रही है तो इस लाभ का कुछ हिस्सा किसानों को दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे किसानों के साथ हैं और किसानों के अधिकारों के लिए जरूरत पड़ी तो वे दिल्ली जाएंगे।
Jalandhar| Machhiwara farmers told me that yield (of wheat) is very low this time. They asked me to raise their demand for compensation. Due to Russia-Ukraine crisis, there is a shortage of wheat of about 25-30% in int'l market, rate increased: Former Punjab Cong chief NS Sidhu pic.twitter.com/9aYYtbZwIl
— ANI (@ANI) April 17, 2022