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खाद्य सुरक्षा अध्यादेश: कांग्रेस की योजना पर पानी फेरेंगे बादल
चंडीगढ़/मोहित श्रीवास्तव
Updated Sat, 17 Aug 2013 08:25 AM IST
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खाद्य सुरक्षा अध्यादेश को लागू करने के लिए पंजाब सरकार ने पहले ही सहमति जता दी है। लेकिन कांग्रेस को इसका सियासी लाभ लेने से रोकने के लिए पंजाब सरकार एक कदम और आगे बढ़कर बड़ी घोषणा करने जा रही है।
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पंजाब सरकार योजना के तहत दो रुपये की बजाय डेढ़ रुपये प्रति किग्रा की दर से गेहूं देने की तैयारी में जुटी है।
पंजाब सरकार ने सन 2007 को आटा-दाल योजना शुरू की थी। इसके तहत राज्य के 15.40 लाख परिवारों को चार रुपये के हिसाब से प्रति परिवार 25 किग्रा गेहूं और 20 रुपये के हिसाब से प्रतिमाह ढाई किग्रा दाल मुहैया कराई जा रही है।
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राज्य सरकार इस योजना पर प्रति माह 25 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में सियासी लाभ लेने के लिए शुरू की जा रही इस योजना को पंजाब सरकार राज्य में पूरी तरह हाईजैक करने की तैयारी में है।
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इसके लिए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल और खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों के बीच लंबे विचार-विमर्श के बाद सहमति बन गई है। अब मुख्यमंत्री बादल किसी भी समय इसकी घोषणा कर सकते हैं।
खाद्य सुरक्षा अध्यादेश लागू होने के बाद पंजाब में लाभार्थी परिवारों की संख्या 15.40 लाख से बढ़ कर 30 लाख होने जा रही है।
दो रुपये की बजाय डेढ़ रुपये प्रति किग्रा की दर से गेहूं मुहैया कराने की एवज में राज्य सरकार पर कितना आर्थिक बोझ पड़ेगा विभागीय अधिकारी इसका आंकलन करने में जुटे हैं।
इससे पहले राज्य सरकार ने खाद्य सुरक्षा अध्यादेश के तहत केंद्र के गेहूं के साथ पंजाब सरकार की ओर से दाल दिए जाने का निर्णय लिया था। इस फैसले से राज्य सरकार पर अलग से कोई बोझ नहीं है क्योंकि सरकार इन परिवारों को पहले ही दाल मुहैया करवा रही है।
मालूम हो कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पहले ही खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पर टिप्पणी करते हुए कह चुके हैं कि केंद्र सरकार योजना के तहत गेहूं चावल और मोटा अनाज देगी लेकिन गरीब जनता यह रोटी या चावल किसके साथ खाएगी।