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देशभर का फूड मैप बनाने के निर्देश
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sat, 05 Jul 2014 10:14 PM IST
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केंद्रीय फूड प्रोसेसिंग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने देश में राज्यों की मुख्य फसलों और जरूरतों के अनुसार ‘फूड मैप’ बनाने के आदेश दिए हैं ताकि उन राज्यों द्वारा उत्पादन की जाती मुख्य फसलों की प्रोसेसिंग कर किसानों को बाजार में अतिरिक्त मूल्य मिल सके।
शनिवार को सिफ्ट (सेंटर इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी) में फूड प्रोसेसिंग के केंद्रीय सचिव यू वैंकवेश्वर, पंजाब के कृषि विभाग के वित्तायुक्त विकास एवं अन्य अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान हरसिमरत ने कहा कि फूड मैप द्वारा किसानों को पहले राज्य, जिलों और गांव स्तर पर उनके द्वारा उत्पादित फसलों की प्रोसेसिंग सुविधा प्रदान की जाएगी।
सिफ्ट के निदेशक द्वारा देश भर में 116 जिलों में किए सर्वे के आधार पर बताया गया कि वार्षिक 44000 करोड़ रुपये का कृषि उत्पादन नष्ट होता है, जिसका मुख्य कारण कटाई, ट्रांसपोर्टेशन एवं स्टोरेज के दौरान उसका सही संरक्षण न होना है। यह सर्वे 45 फसलों पर किया गया था जिसमें पंजाब की धान, गेहूं और मक्की मुख्य तौर पर शामिल थे। बादल ने कहा कि फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय द्वारा आगामी दो साल के दौरान इसको 50 प्रतिशत तक घटाकर महंगाई काबू करने में बड़ा योगदान डालना हैं।
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उन्होंने कहा कि पंजाब में टमाटर, मक्की, आलू की प्रोसेसिंग की तरफ अधिक ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय के उपकुलपति बीएस ढिल्लों को कहा कि वह कृषि विभाग के साथ मिलकर किसानों को गुणवत्ता नियंत्रण एवं पैकेजिंग संबंधी प्रशिक्षण दें। इसके लिए बठिंडा, गुरदासपुर और जालंधर में निपुण विकास केंद्र खोले जाएं। बादल द्वारा तमिलनाडु की तर्ज पर पंजाब में भी मोबाइल प्रोसेसिंग वैन चलाने को भी मंजूरी दे दी है। दूध की प्रोसेसिंग एवं इसमें विशेषकर ग्रामीण महिलाओं को भागीदार बनाने के लिए बादल ने गडवासू के उपकुलपति वीके तनेजा और मिल्कफेड के अधिकारियों को कहा कि वह 15 से 20 गांवों का कलस्टर स्थापित करें जहां प्रत्येक गांव में से दूध एकत्र करके उसकी प्रोसेसिंग की जाए।
बादल ने गुरदासपुर एवं लुधियाना में एग्रो प्रोसेसिंग फेयर लगाने को भी मंजूरी दी। बादल ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा फूड प्रोसेसिंग संबंधी लगाई प्रदर्शनी का भी दौरा किया। इस अवसर पर मुख्य तौर पर वित्तायुक्त कृषि विकास सुरेश कुमार, फूड प्रोसेसिंग के सचिव एसआर लद्दड़, मुख्यमंत्री के विशेष प्रधान सचिव गगन दीप सिंह बराड़, पंजाब एग्रो के एमडी केएस पन्नू और सिफ्ट के निदेशक आर के गुप्ता उपस्थित थे।
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शनिवार को सिफ्ट (सेंटर इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी) में फूड प्रोसेसिंग के केंद्रीय सचिव यू वैंकवेश्वर, पंजाब के कृषि विभाग के वित्तायुक्त विकास एवं अन्य अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान हरसिमरत ने कहा कि फूड मैप द्वारा किसानों को पहले राज्य, जिलों और गांव स्तर पर उनके द्वारा उत्पादित फसलों की प्रोसेसिंग सुविधा प्रदान की जाएगी।
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सिफ्ट के निदेशक द्वारा देश भर में 116 जिलों में किए सर्वे के आधार पर बताया गया कि वार्षिक 44000 करोड़ रुपये का कृषि उत्पादन नष्ट होता है, जिसका मुख्य कारण कटाई, ट्रांसपोर्टेशन एवं स्टोरेज के दौरान उसका सही संरक्षण न होना है। यह सर्वे 45 फसलों पर किया गया था जिसमें पंजाब की धान, गेहूं और मक्की मुख्य तौर पर शामिल थे। बादल ने कहा कि फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय द्वारा आगामी दो साल के दौरान इसको 50 प्रतिशत तक घटाकर महंगाई काबू करने में बड़ा योगदान डालना हैं।
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उन्होंने कहा कि पंजाब में टमाटर, मक्की, आलू की प्रोसेसिंग की तरफ अधिक ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय के उपकुलपति बीएस ढिल्लों को कहा कि वह कृषि विभाग के साथ मिलकर किसानों को गुणवत्ता नियंत्रण एवं पैकेजिंग संबंधी प्रशिक्षण दें। इसके लिए बठिंडा, गुरदासपुर और जालंधर में निपुण विकास केंद्र खोले जाएं। बादल द्वारा तमिलनाडु की तर्ज पर पंजाब में भी मोबाइल प्रोसेसिंग वैन चलाने को भी मंजूरी दे दी है। दूध की प्रोसेसिंग एवं इसमें विशेषकर ग्रामीण महिलाओं को भागीदार बनाने के लिए बादल ने गडवासू के उपकुलपति वीके तनेजा और मिल्कफेड के अधिकारियों को कहा कि वह 15 से 20 गांवों का कलस्टर स्थापित करें जहां प्रत्येक गांव में से दूध एकत्र करके उसकी प्रोसेसिंग की जाए।
बादल ने गुरदासपुर एवं लुधियाना में एग्रो प्रोसेसिंग फेयर लगाने को भी मंजूरी दी। बादल ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा फूड प्रोसेसिंग संबंधी लगाई प्रदर्शनी का भी दौरा किया। इस अवसर पर मुख्य तौर पर वित्तायुक्त कृषि विकास सुरेश कुमार, फूड प्रोसेसिंग के सचिव एसआर लद्दड़, मुख्यमंत्री के विशेष प्रधान सचिव गगन दीप सिंह बराड़, पंजाब एग्रो के एमडी केएस पन्नू और सिफ्ट के निदेशक आर के गुप्ता उपस्थित थे।