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शहीद भगत सिंह, क्रांतिकारियों का गुप्त ठिकाना विरासत घोषित

Sat, 09 Jan 2016 02:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर Updated Sat, 09 Jan 2016 02:55 PM IST
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Shaheed Bhagat Singh, the revolutionaries declared the secret whereabouts heritage
पंजाब टूरिज्म एंड कल्चर अफेयर डिपार्टमेंट की ओर से फिरोजपुर के तूड़ी बाजार (मुहल्ला शहागंज) में शहीद-ए-आजम भगत सिंह व उसके क्रांतिकारियों साथियों के बने गुप्त ठिकाने को विरासत घोषित कर दिया है। इस संबंधी उक्त विभाग ने नोटिफिकेशन जारी किया है। दिसंबर 2014 में विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर आपत्तियां मांगी थी, लेकिन किसी ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई थी।
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इस गुप्त ठिकाने में कौन-कौन क्रांतिकारी आते थे, क्या करते थे, अंग्रेजों के खिलाफ किस प्रकार की रणनीति, किन वजहों से गुप्त ठिकाना बनाया, इन तथ्यों की खोज लेखक राकेश कुमार ने की थी। इसे अमर उजाला ने इसे प्रमुख्ता से प्रकाशित किया था, तभी पंजाब सरकार ने क्रांतिकारियों की यादगार बनाने संबंधी नोटिफिकेशन जारी किया था।
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खोजी लेखक राकेश कुमार ने बताया कि उक्त गुप्त ठिकाने में क्रांतिकारी क्या-क्या करते थे इस संबंधी उन्होंने दो पुस्तकें प्रकाशित की हैं जो इस समय बाजार में उपलब्ध हैं। इस गुप्त ठिकाने संबंधी उन्होंने जिला प्रशासन को कई ऐतिहासिक जानकारी मुहैया करवाई थीं जो पंजाब सरकार तक पहुंचाई गईं।
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उसके बाद पंजाब सरकार ने दिसंबर 2014 को नोटिफिकेशन जारी कर आपत्तियां मांगी थी। किसी तरह से आपत्ति नहीं होने के बाद अब इसे विरासत घोषित करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है।

लेखक ने बताया कि अंग्रेजों से भारत को आजाद करवाने के लिए क्रांतिकारियों ने रणनीति बनाने के लिए फिरोजपुर शहर के तूड़ी बाजार (मुहल्ला शहागंज) में गुप्त ठिकाना बनाया हुआ था। उक्त गुप्त ठिकाने की मालिक हक कृष्णा भक्ति सत्संग ट्रस्ट के पास है।

भगत सिंह और उसके साथियों ने क्रांतिकारी पार्टी का गुप्त ठिकाना यहां 10 अगस्त, 1928 से लेकर चार फरवरी 1929 तक रहा। यह ठिकाना पार्टी की जरूरत तथा गतिविधियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। यहां पर भगत सिंह के अलावा चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, शिव वर्मा, विजय कुमार सिन्हा, डा. गया प्रसाद, महाबीर सिंह तथा जय गोपाल का आना-जाना था।


गुप्त ठिकाना बनाने के तीन कारण
1. पंजाब से विभिन्न ठिकानों जैसे दिल्ली, कानपुर, लखनऊ व आगरा इत्यादि जाने-आने के लिए क्रांतिकारी फिरोजपुर में बनाए गुप्त ठिकाने पर भेष बदलकर ट्रेनों में यात्रा करते थे।
2. बम बनाने का सामान जुटाने के लिए क्रांतिकारी डा. निगम को यहां पर निगम फार्मेसी और ड्रग्सिट की दुकान खुलवाई थी।
3. डाक्टरी पेशा चलने पर पार्टी की आर्थिक सहायता की जाए।
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