आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आज का शब्द: संघात और हरिवंशराय बच्चन की कविता- ओ अँधेरी से अँधेरी रात !

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- संघात, जिसका अर्थ है- समूह, समष्टि, वध। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- ओ अँधेरी से अँधेरी रात !
                                                                 
                            

ओ अँधेरी से अँधेरी रात!

आज गम इतना हृदय में,
आज तम इतना हृदय में,
छिप गया है चाँद-तारों का चमकता गात!
ओ अँधेरी से अँधेरी रात!

दिख गया जग रूप सच्चा
ज्योति में यह बहुत अच्छा,
हो गया कुछ देर को प्रिय तिमिर का संघात!
ओ अँधेरी से अँधेरी रात!

प्रात किरणों के निचय से,
तम न जाएगा हृदय से,
किसलिए फिर चाहता मैं हो प्रकाश-प्रभात!
ओ अँधेरी से अँधेरी रात!

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।


लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से 

https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o


9 hours ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर