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किसानों ने मांगों के समर्थन में दिया धरना
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Thu, 29 Oct 2015 10:18 PM IST
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फाजिल्का-फिरोजपुर मुख्य मार्ग पर किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में धरना देकर यातायात ठप कर दिया। किसानों का आरोप है कि बासमती का सही दाम नहीं मिल रहा है।
किसानों ने पंजाब व केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दो घंटे तक यातायात ठप रहा। पंजाब किसान सभा के प्रतिनिधियों ने कहा कि पंजाब की सरकार और केंद्र सरकार सिर्फ सरमायेदारों की ही सरकार है इसके राज्य में किसानों द्वारा आए दिन खुदकुशी की जा रही हैं।
पहले नरमे की फसल बर्बाद हो गई और अब शैलर मालिकों द्वारा अपने पिछले साल के घाटे अकेले किसानों से ही पूरे करने की चलाई जा रही नीति के तहत चावलों का रेट अधिक होने के बावजूद 1121 बासमती की खरीद महज 1600 से लेकर 1650 रुपये तक ही की जा रही है। यदि हिसाब से किसान अपनी फसल बेचता है तो उसके खर्चे भी पूरे नहीं होते और जिन किसानों ने ठेके पर जमीन लेकर खेतीबाड़ी की है वे तो बिलकुल ही बर्बाद हो जाएंगे।
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वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की सरकार चाहे तो आज ही इस बासमती के रेट 4000 रुपये क्विंटल तक पहुंच सकते हैं पर भाजपा की अगुवाई वाली सरकार किसानों को मारना ही चाहती है। धरने की अगवाई मंडी लाधूका के सरपंच कामरेड दर्शन लाल, सुरिंदर ढंडियां, कामरेड छिंदर सिंह, कामरेड बलविंदर चंडीगढ़, वरिंदर कुमार, जगदेव रीहेवाला, जिंदर पायलट ने की।
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किसानों ने पंजाब व केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दो घंटे तक यातायात ठप रहा। पंजाब किसान सभा के प्रतिनिधियों ने कहा कि पंजाब की सरकार और केंद्र सरकार सिर्फ सरमायेदारों की ही सरकार है इसके राज्य में किसानों द्वारा आए दिन खुदकुशी की जा रही हैं।
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पहले नरमे की फसल बर्बाद हो गई और अब शैलर मालिकों द्वारा अपने पिछले साल के घाटे अकेले किसानों से ही पूरे करने की चलाई जा रही नीति के तहत चावलों का रेट अधिक होने के बावजूद 1121 बासमती की खरीद महज 1600 से लेकर 1650 रुपये तक ही की जा रही है। यदि हिसाब से किसान अपनी फसल बेचता है तो उसके खर्चे भी पूरे नहीं होते और जिन किसानों ने ठेके पर जमीन लेकर खेतीबाड़ी की है वे तो बिलकुल ही बर्बाद हो जाएंगे।
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वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की सरकार चाहे तो आज ही इस बासमती के रेट 4000 रुपये क्विंटल तक पहुंच सकते हैं पर भाजपा की अगुवाई वाली सरकार किसानों को मारना ही चाहती है। धरने की अगवाई मंडी लाधूका के सरपंच कामरेड दर्शन लाल, सुरिंदर ढंडियां, कामरेड छिंदर सिंह, कामरेड बलविंदर चंडीगढ़, वरिंदर कुमार, जगदेव रीहेवाला, जिंदर पायलट ने की।