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Punjab: 2014 लोस चुनाव में पंजाब में इलेक्ट्रानिक मीडिया बना था किंग मेकर, पीयू के शोध में खुलासा
Mon, 27 Feb 2023 01:51 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 27 Feb 2023 01:51 PM IST
सार
निगरान प्रोफेसर नरिंदर कुमार डोगरा की अगुवाई में शोधकर्ता संदीप कौर की ओर से की यह खोज सर्वेक्षण आधारित थी, जिसमें पंजाब के कुल 13 लोकसभा हलकों में चार विभिन्न लोकसभा हलकों के 1200 लोगों का इंटरव्यू किया गया। इन चार हलकों में माझा से अमृतसर, दोआबा से होशियारपुर और मालवा क्षेत्र से संगरूर व बठिंडा शामिल थे।
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इलेक्ट्रानिक मीडिया
- फोटो : Istock
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विस्तार
पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान विभाग में हुई एक शोध में सामने आया है कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पंजाब में इलेक्ट्रानिक मीडिया ने किंग मेकर की भूमिका निभाई। वोटरों तक हर जानकारी जल्दी और स्पष्ट रूप में पहुंचाने के मामले में इस माध्यम की भूमिका बहुत ज्यादा अहम रही। शोध के जरिये सरकार को इस माध्यम का दुरुपयोग रोकने के लिए उचित नीति के निर्माण के बारे में सुझाया गया है।
निगरान प्रोफेसर नरिंदर कुमार डोगरा की अगुवाई में शोधकर्ता संदीप कौर की ओर से की यह खोज सर्वेक्षण आधारित थी, जिसमें पंजाब के कुल 13 लोकसभा हलकों में चार विभिन्न लोकसभा हलकों के 1200 लोगों का इंटरव्यू किया गया। इन चार हलकों में माझा से अमृतसर, दोआबा से होशियारपुर और मालवा क्षेत्र से संगरूर व बठिंडा शामिल थे। प्रोफेसर नरिंदर कुमार डोगरा ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान चुने गए कुल लोगों में से 46.83 प्रतिशत ने यह बताया कि आसान व समय पर जानकारी प्रदान करने के लिए इस माध्यम की भूमिका प्रशंसनीय थी। इसका भाव यह हुआ कि राजनीतिक दलों की ओर से संचारित बहुत सारी जानकारी प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में लोग इस माध्यम पर ही निर्भर थे।
गौरतलब है कि ऐसी जानकारी व सूचना आम वोटर की वोट संबंधी चुनाव/पसंद के निर्धारण में बड़ी भूमिका अदा करने की क्षमता रखती है। शोधकर्ता संदीप कौर ने बताया कि खोज के दौरान तकरीबन आधे लोगों ने यह भी महसूस किया कि चुनाव मुहिम के साथ संबंधित घटनाओं का संचार, पेशकारी व विश्लेषण के मामले में और मीडिया साधनों के मुकाबले टीवी सबसे आसान प्लेटफार्म के तौर पर सामने आया। उन्होंने बताया कि खोज के अनुसार माझा क्षेत्र में 40.33 फीसदी और दोआबा में 41.67 फीसदी लोग सियासी पार्टियों की इलेक्ट्रानिक मीडिया मुहिम/रणनीति से सीधा प्रभावित हुए। मालवा क्षेत्र में इस तरह की रणनीति से प्रभावित होने वालों की यह दर 48.50 प्रतिशत थी।
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इस शोध के नतीजों के आधार पर जोरदार तरीके से सुझाया गया है कि क्योंकि भविष्य के चुनावों में सियासी पार्टियों की ओर से इलेक्ट्रानिक मीडिया का और भी अधिक इस्तेमाल करने की संभावना है इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इस माध्यम का दुरुपयोग रोकने के लिए उचित नीतियों का निर्माण करें और इस संबंधी हिदायतें भी जारी करें।
वीसी प्रोफेसर अरविंद ने इस शोध के संबंध में टीम को बधाई देते कहा कि राजनीति विज्ञान जैसे विषयों में अगर पंजाबी यूनिवर्सिटी की ओर से स्तरीय व प्रमाणित शोध की जाएगी, तो निश्चय ही यह बहुत सारी लोक नीतियों के निर्माण में सहायक हो सकेगा। ऐसा होना जहां लोक हितों के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम करना है, वहीं यह लोगों का इस यूनिवर्सिटी के प्रति भरोसे में और वृद्धि करेगा।
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निगरान प्रोफेसर नरिंदर कुमार डोगरा की अगुवाई में शोधकर्ता संदीप कौर की ओर से की यह खोज सर्वेक्षण आधारित थी, जिसमें पंजाब के कुल 13 लोकसभा हलकों में चार विभिन्न लोकसभा हलकों के 1200 लोगों का इंटरव्यू किया गया। इन चार हलकों में माझा से अमृतसर, दोआबा से होशियारपुर और मालवा क्षेत्र से संगरूर व बठिंडा शामिल थे। प्रोफेसर नरिंदर कुमार डोगरा ने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान चुने गए कुल लोगों में से 46.83 प्रतिशत ने यह बताया कि आसान व समय पर जानकारी प्रदान करने के लिए इस माध्यम की भूमिका प्रशंसनीय थी। इसका भाव यह हुआ कि राजनीतिक दलों की ओर से संचारित बहुत सारी जानकारी प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में लोग इस माध्यम पर ही निर्भर थे।
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गौरतलब है कि ऐसी जानकारी व सूचना आम वोटर की वोट संबंधी चुनाव/पसंद के निर्धारण में बड़ी भूमिका अदा करने की क्षमता रखती है। शोधकर्ता संदीप कौर ने बताया कि खोज के दौरान तकरीबन आधे लोगों ने यह भी महसूस किया कि चुनाव मुहिम के साथ संबंधित घटनाओं का संचार, पेशकारी व विश्लेषण के मामले में और मीडिया साधनों के मुकाबले टीवी सबसे आसान प्लेटफार्म के तौर पर सामने आया। उन्होंने बताया कि खोज के अनुसार माझा क्षेत्र में 40.33 फीसदी और दोआबा में 41.67 फीसदी लोग सियासी पार्टियों की इलेक्ट्रानिक मीडिया मुहिम/रणनीति से सीधा प्रभावित हुए। मालवा क्षेत्र में इस तरह की रणनीति से प्रभावित होने वालों की यह दर 48.50 प्रतिशत थी।
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इस शोध के नतीजों के आधार पर जोरदार तरीके से सुझाया गया है कि क्योंकि भविष्य के चुनावों में सियासी पार्टियों की ओर से इलेक्ट्रानिक मीडिया का और भी अधिक इस्तेमाल करने की संभावना है इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इस माध्यम का दुरुपयोग रोकने के लिए उचित नीतियों का निर्माण करें और इस संबंधी हिदायतें भी जारी करें।
वीसी प्रोफेसर अरविंद ने इस शोध के संबंध में टीम को बधाई देते कहा कि राजनीति विज्ञान जैसे विषयों में अगर पंजाबी यूनिवर्सिटी की ओर से स्तरीय व प्रमाणित शोध की जाएगी, तो निश्चय ही यह बहुत सारी लोक नीतियों के निर्माण में सहायक हो सकेगा। ऐसा होना जहां लोक हितों के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम करना है, वहीं यह लोगों का इस यूनिवर्सिटी के प्रति भरोसे में और वृद्धि करेगा।