Punjab: किसान के हल में फंसा एक क्विंटल का बम, इलाके में मचा हड़कंप, 1971 की जंग में पाक ने था गिराया
बम काफी पुराना सेना द्वारा प्रयोग में लाया जाने वाला गोला है। बम का पता उस वक्त चला जब किसान ट्रैक्टर से अपने खेत जोत रहा था तो यह बम टिल्लर में फंस गया। इस संबंधी सूचना तुरंत पुलिस को दी गई पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया है।
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मुकेरियां के गांव धर्मपुरा के खेतों में बम मिलने की सूचना के बाद गांव व क्षेत्र में दहशत का माहौल फैल गया है। पुलिस ने बम वाली जगह को सील कर दिया है और किसी को भी खेत में जाने नहीं दिया जा रहा है। बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल टीम मौके पर पहुंची।
डीएसपी कुलविंदर सिंह विर्क ने बताया कि गांव धर्मपुर के किसान अतिंदरपाल सिंह ने सूचना दी कि वह अपनी जमीन की जुताई कर रहा था। इस दौरान हल से कोई चीज टकराई। देखने पर बम की आशंका हुई है। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचित किया।
सूचना मिलने के बाद एसएचओ जोगिंदर सिंह मुकेरियां टीम समेत पहुंचे। बम में जंग लगा था। आसपास के इलाके को सील कर दिया गया और पुलिस कर्मियों की तैनात कर दी गई।
मौके पर एसपी सरबजीत सिंह पहुंचे और स्टेट बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल टीम को सूचित किया। जालंधर से बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल इंस्पेक्टर सुरिंदर पाल अपनी टीम समेत वहां पहुंचे। उन्होंने बताया यह बम काफी पुराना है लेकिन सक्रिय है और करीब एक क्विंटल वजनी है। इसकी लंबाई करीब तीन फुट और परिधि डेढ़ फुट के करीब है।
मौके पर मौजूद डीएसपी कुलविंदर सिंह विर्क ने बताया कि 1971 की लड़ाई में यहां रेलवे स्टेशन के नजदीक बम गिराए गए थे और अंदेशा है कि यह बम भी दुश्मन देश के जहाज से यहां गिराया गया होगा। बता दें कि इस जगह पर तालाब होता था। तालाब में गिरने के कारण यह बम फटा नहीं होगा। बाद में तालाब को भर दिया गया था और उस जमीन पर अब लंबे समय से खेती की जा रही है।
बम निरोधक दस्ते की टीम के प्रभारी इंस्पेक्टर सुरिंदर पाल सिंह ने बताया कि बहुत ही भारी होने के कारण इस बम को उसी खेत में मिट्टी की बोरियों के नीचे सुरक्षित दबा दिया गया है। इसे भारतीय सेना की जगरांव स्थित बम निरोधक टीम द्वारा सुरक्षित तरीके के डिफ्यूज किया जाएगा।
गांव धर्मपुरा के बुजुर्गों का कहना है कि वर्ष 1971 में जंग के दौरान क्षेत्र में करीब दो बम एक एयरक्राफ्ट से गिराए गए थे। इनमें से एक में विस्फोट हो गया था जबकि दूसरा यहां गांव के तालाब में गिरा और दलदली भूमि होने के कारण फटा नहीं था।