{"_id":"627731e7b369a0625a64c35d","slug":"coal-crisis-continues-in-punjab-thermal-plant","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब में बिजली संकट: थर्मलों में कोयले की कमी बरकरार, मात्र दो से 20 दिनों का कोयला शेष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब में बिजली संकट: थर्मलों में कोयले की कमी बरकरार, मात्र दो से 20 दिनों का कोयला शेष
Sun, 08 May 2022 08:28 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 08 May 2022 08:28 AM IST
सार
शनिवार को पंजाब में अधिकतम मांग 9052 मेगावाट दर्ज की गई। इसके मुकाबले पावरकॉम के पास उपलब्धता केवल 4000 मेगावाट रही।
विज्ञापन
electricity
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट बरकरार है। शनिवार को थर्मलों में मात्र दो से 20 दिनों का कोयला शेष था। उधर, पंजाब में बिजली की मांग में उछाल जारी रहते हुए अधिकतम मांग 9052 मेगावाट दर्ज की गई, जिसके मुकाबले पावरकॉम के पास बिजली की उपलब्धता 4000 मेगावाट की रही। शनिवार भी रोपड़, लहरा मुहब्बत, तलवंडी साबो और गोइंदवाल की चार यूनिटें बंद रहने से 1350 मेगावाट बिजली की सप्लाई ठप रही।
विज्ञापन
पंजाब सरकार के लगातार दावों के बावजूद थर्मलों में कोयले की स्थिति में सुधार नहीं आ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक रोपड़ में चार दिन, लहरा मुहब्बत में दो, तलवंडी साबो में छह, राजपुरा में 20 और गोइंदवाल में दो दिनों का कोयला शेष है। जबकि गर्मी के तीखे होते तेवरों के कारण बिजली की मांग बढ़ती जा रही है और ऊपर से पैडी का सीजन भी शुरू होने को है।
विज्ञापन
शनिवार को पंजाब में अधिकतम मांग 9052 मेगावाट दर्ज की गई। इसके मुकाबले पावरकॉम के पास उपलब्धता केवल 4000 मेगावाट रही। इसमें से पावरकॉम को अपने रोपड़ व लहरा मुहब्बत थर्मलों से 992 मेगावाट, तलवंडी साबो, राजपुरा व गोइंदवाल से 2484 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों से 383 मेगावाट, नान सोलर प्रोजेक्टों से 52 मेगावाट समेत अन्य स्रोतों से बिजली प्राप्त हुई। मांग को पूरा करने के लिए 4500 मेगावाट बिजली बाहर से ली गई। बावजूद इसके 552 मेगावाट की कमी रही। इस कारण गांवों में दो घंटे तक के कट लगाने पड़े।
विज्ञापन