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बादल ने मंत्रियों के विभाग बदले, जानिए किसे मिला कौन सा?

Wed, 25 Sep 2013 02:07 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 25 Sep 2013 02:07 AM IST
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Change of Ministers department in punjab
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल में चार भाजपाई मंत्रियों के विभागों में फेरबदल कर दिया।
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भाजपा आलाकमान की सहमति से किए गए बदलाव में जहां भाजपा ने मुख्यमंत्री बादल और प्रदेश सरकार पर समय-समय पर अंगुली उठाने वाले अपने विधायकों पर शिकंजा कसा वहीं मुख्यमंत्री बादल का मनमुटाव भी दूर करने की कोशिश की।

फेरबदल में चुन्नीलाल भगत का कद घटा दिया गया वहीं अनिल जोशी को महत्वपूर्ण ओहदा देते हुए सिद्धू से जंग का मैदान भी तैयार कर दिया।

अमृतसर के विधायक जोशी और सांसद नवजोत सिंह सिद्धू के बीच अनबन जगजाहिर है। सुरजीत ज्याणी और मदन मोहन मित्तल के विभागों में भी फेरबदल किया गया है, जिसे भाजपा ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर युवा चेहरे आगे लाने की अपनी रणनीति का हिस्सा बताया है।
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पंजाब भाजपा प्रभारी शांता कुमार और अन्य नेताओं ने मंगलवार को मुख्यमंत्री बादल से मिलकर फेरबदल के लिए आलाकमान के निर्णय की उन्हें जानकारी दी थी।

मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल शिवराज पाटिल ने इस फेरबदल को मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल में स्थानीय निकाय और चिकित्सा शिक्षा व अनुसंधान मंत्री रहे चुन्नी लाल भगत से अब यह विभाग लेकर उन्हें वन, वन्य जीव और श्रम मंत्रालय दिए गए हैं।
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यह विभाग अब तक सुरजीत कुमार ज्याणी के पास थे। ज्याणी को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक सुरक्षा एवं महिला व बाल विकास विभाग सौंपे गए हैं।

यह दोनों विभाग भी अब तक मदन मोहन मित्तल के पास थे। मित्तल को अब उद्योग एवं वाणिज्य, तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण के विभाग सौंपे गए हैं। उनके पास संसदीय मामलों का विभाग पहले ही तरह रहेगा।

सिद्धू और जोशी में बढ़ सकता है टकराव
अमृतसर से विधायक अनिल जोशी को निकाय विभाग का मंत्री बनाए जाने से अमृतसर के सांसद नवजोत सिंह सिद्धू और उनके बीच इलाके के विकास के मुद्दे पर टकराव बढ़ने की आशंका है। अमृतसर में सिद्धू और जोशी के बीच मनमुटाव जगजाहिर है और विकास केमुद्दे पर माना जा रहा है कि सिद्धू और जोशी के बीच फिर जंग छिड़ सकती है।

फेरबदल में कालिया-अश्वनी खेमे दरकिनार
इस फेरबदल ने भाजपा ने मनोरंजन कालिया और अश्वनी कुमार खेमे को करारा झटका दिया है। सोमवार को राजनाथ सिंह केसाथ कोर कमेटी की बैठक में पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया ने जालंधर में विकास कार्यों के लिए धन उपलब्ध न होने की बात कही थी।

इससे पहले भी मुख्यमंत्री के सियासी सलाहकार पद पर पूर्व मंत्री तीक्ष्ण सूद और पंजाब योजना आयोग के वाइस चेयरमैन पद पर पूर्व प्रधान राजिंदर भंडारी की नियुक्ति का भी इसी गुट ने कड़ा विरोध किया था।

पार्टी ने कालिया और अश्वनी कुमार को दरकिनार करते हुए कमल शर्मा की सिफारिशों पर मुहर लगा दी। हालांकि अश्वनी शर्मा ने पार्टी के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने यह निर्णय लिया है। हम सभी लोग पार्टी के निर्णय का सम्मान करते हैं।

आलाकमान के सामने कमल शर्मा की ही चली
पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के एक गुट ने कालिया या पूर्व प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा में से किसी एक को मंत्री बनाए जाने का जोर लगाया लेकिन प्रदेश प्रधान कमल शर्मा इसके लिए तैयार नहीं हुए और वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को इससे होने वाले नफे नुकसान का गणित समझाते रहे।

भगत चुन्नी लाल के पास शक्तिशाली स्थानीय निकाय महकमा था लेकिन उम्रदराज चुन्नी लाल उतने सक्रिय नहीं दिखाई दिए, जिससे पार्टी उन पर भरोसा बनाए रखती। फिर भी लोकसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी भगत से किनारा नहीं कर सकी और उन्हें कम महत्व वाले वन एवं श्रम विभाग की जिम्मेदारी दे दी गई।

क्यों बदले गए विभाग
चुन्नी लाल भगत : महत्वपूर्ण स्थानीय निकाय विभाग होने के बावजूद वे शहरी वोटरों को खुश नहीं कर सके। प्रापर्टी टैक्स, ई-ट्रिप और वैट रिफंड जैसे मामलों में वे स्पष्ट स्टैंड नहीं ले सके।

अनिल जोशी : अमृतसर के तेजतर्रार विधायक डेढ़ साल में ही पार्टी आलाकमान के चहेते बन गए। सांसद नवजोत सिंह सिद्धू से क्षेत्र के विकास को लेकर उनकी जंग पुरानी है।


मदन मोहन मित्तल : सक्रिय नेता के रूप में स्वास्थ्य मंत्री का पद संभालने हुए विधायक नवजोत कौर सिद्धू से उनका टकराव पार्टी और सरकार के लिए चिंता का विषय बना। उद्योग जैसा विभाग सौंप कर मित्तल के सक्रियता भी बनाए रखी गई।

सुरजीत कुमार ज्याणी : तेजतर्रार ज्याणी को स्वास्थ्य विभाग देकर मित्तल और नवजोत कौर के विवाद को भी शांत करने की कोशिश।
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