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रिट्रीट सेरेमनी: अमृतसर के अटारी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी के समय में बदलाव, अब आधा घंटा पहले होगी परेड

Mon, 16 Sep 2024 06:24 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: अंकेश ठाकुर Updated Mon, 16 Sep 2024 06:24 PM IST
सार

अमृतसर स्थित भारत-पाक सीमा पर अटारी बॉर्डर पर रोजाना होने वाले रिट्रीट सेरेमनी के समय में बदलाव किया गया है। सोमवार से ही नए समय के अनुसार यहां परेड होगी। 

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Change in time of retreat ceremony at Attari border of Amritsar
अटारी वाघा बॉर्डर - फोटो : ANI

विस्तार

पंजाब के अमृतसर स्थित अटारी -वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी के समय में बदवाल किया गया है। रिट्रीट सेरेमनी के समय में आधे घंटे का बदलाव किया है। बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक आते हैं। इसलिए अटारी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी देखने के इच्छुक लोगों के लिए यह अहम जानकारी है।  
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अभी तक रिट्रीट सेरेमनी का समय शाम 6.00 से 6:30 बजे था। अब नए समय के अनुसार रिट्रीट सेरेमनी शाम 5:30 से 6.00 बजे तक होगी। समय में बदलाव सोमवार से ही कर दिया गया है। इस संबंधी सरकारी आदेश जारी कर दिए गए है। मौसम में आए बदलाव को मुख्य रखते हुए रिट्रीट का यह समय बदला गया है। वहीं, अब आने वाले दिनों में सर्दी का सीजन भी शुरू होगा। ऐसे में दिन जल्दी ढलना शुरू हो जाएगा। रिट्रीट सेरेमनी देखने आने वाले लोगों की सुविधा के लिए समय में बदलाव किया गया है।  
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अटारी बॉर्डर का इतिहास  
भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद सीमा स्तंभ संख्या 102 के पास ऐतिहासिक शेर शाह सूरी रोड या ग्रैंड ट्रंक रोड पर 'अटारी-वाघा', संयुक्त चेक पोस्ट 'जेसीपी' स्थापित की गई थी। भारत की तरफ वाले गांव को 'अटारी' कहा जाता है।

यह महाराजा रणजीत सिंह की सेना के जनरलों में से एक, सरदार शाम सिंह अटारीवाला का पैतृक गांव था। पाकिस्तान की तरफ वाला द्वार, वाघा के नाम से जाना जाता है। जैसे भारत में 'अटारी बॉर्डर' कहा जाता है, उसी तरह पाकिस्तान में इसे 'वाघा बॉर्डर' के नाम से पहचाना जाता है।


इस समारोह के आयोजन के लिए दोनों देशों की सरकारों ने सहमति जताई थी। 1947 में भारतीय सेना को दोनों देशों को मिलाने वाले एनएच-1 पर स्थित संयुक्त चेक पोस्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। शुरुआत में सेना की कुमाऊं रेजीमेंट ने जेसीपी के लिए पहली टुकड़ी प्रदान की थी।

11 अक्तूबर 1947 को ब्रिगेडियर मोहिंदर सिंह चोपड़ा द्वारा पहला ध्वजारोहण समारोह देखा गया था। अब अटारी में बने भव्य परिसर के निकट, सुपर किंग एयर बी-200 विमान (अब सेवा में नहीं) को स्थापित किया गया है।
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