{"_id":"6ae89ba828cd7b0ec10cbadc","slug":"two-water-treatment-plants-dedicated-to-the-public-in-ghanaur-assembly-constituency-2026-11-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मान सरकार की बड़ी सौगात: घनौर विधानसभा में दो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट जनता को समर्पित, 316 गांवों को मिलेगा लाभ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मान सरकार की बड़ी सौगात: घनौर विधानसभा में दो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट जनता को समर्पित, 316 गांवों को मिलेगा लाभ
Mon, 02 Nov 2026 07:48 PM IST
शाहिल शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, पटियाला
अमर उजाला ब्यूरो, पटियाला
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Mon, 02 Nov 2026 07:48 PM IST
सार
संयंत्रों में पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। पानी को शोधित करने से पहले और बाद में नमूनों की जांच होती है। प्लांटों और जल भंडारण टैंकों में स्काडा प्रणाली लगाई गई है।
विज्ञापन
जल शोधन संयंत्रों का उद्धाटन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोमवार को पटियाला जिले के घनौर विधानसभा क्षेत्र के मंडोली गांव में दो आधुनिक जल शोधन संयंत्र जनता को समर्पित किए। इन संयंत्रों का निर्माण 432.65 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इन परियोजनाओं से पांच विधानसभा क्षेत्रों के करीब 4.50 लाख लोगों और 75 हजार परिवारों को साफ पेयजल मिलेगा।
विज्ञापन
316 गांवों को मिलेगा लाभ
यह परियोजना पटियाला और फतेहगढ़ साहिब क्षेत्र के 316 गांवों को लाभ पहुंचाएगी। इन परियोजनाओं के तहत 752 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। मुख्यमंत्री भगंवत मान ने कहा कि लंबे समय से इन गांवों के लोग पानी की समस्या से जूझ रहे थे। भूजल में फ्लोराइड और भारी धातुओं की अधिक मात्रा से लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बना हुआ था।
विज्ञापन
अब नहरी पानी को आधुनिक तकनीक से शोधित कर घरों तक पहुंचाया जाएगा। इससे लोगों को स्वच्छ पेयजल मिलेगा और भूजल पर निर्भरता भी कम होगी। उन्होंने पिछली सरकारों पर इन गांवों की जरूरतों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। मंडोली और पबरी के संयंत्रों पर क्रमश: 266.20 करोड़ और 166.46 करोड़ रुपये खर्च हुए। इन संयंत्रों की संयुक्त जलशोधन क्षमता 69 एमएलडी बताई गई है।
विज्ञापन
Trending Videos
पानी की जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित
संयंत्रों में पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। पानी को शोधित करने से पहले और बाद में नमूनों की जांच होती है। प्लांटों और जल भंडारण टैंकों में स्काडा प्रणाली लगाई गई है। इससे पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी। परियोजना का संचालन और रखरखाव अगले 10 वर्षों तक संबंधित कंपनी करेगी।
सभी 316 गांवों में जल आपूर्ति और स्वच्छता समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां स्थानीय स्तर पर पानी की आपूर्ति और व्यवस्था की निगरानी करेंगी। राज्य सरकार लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और पटियाला शहरों में भी नहरी पानी आधारित पेयजल परियोजनाओं पर काम कर रही है। इन परियोजनाओं से करीब 78 लाख शहरी आबादी को लाभ पहुंचाने की योजना है। इनके तहत कुल 1,410 एमएलडी जलशोधन क्षमता विकसित की जा रही है।
संयंत्रों में पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। पानी को शोधित करने से पहले और बाद में नमूनों की जांच होती है। प्लांटों और जल भंडारण टैंकों में स्काडा प्रणाली लगाई गई है। इससे पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी। परियोजना का संचालन और रखरखाव अगले 10 वर्षों तक संबंधित कंपनी करेगी।
सभी 316 गांवों में जल आपूर्ति और स्वच्छता समितियों का गठन किया गया है। ये समितियां स्थानीय स्तर पर पानी की आपूर्ति और व्यवस्था की निगरानी करेंगी। राज्य सरकार लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और पटियाला शहरों में भी नहरी पानी आधारित पेयजल परियोजनाओं पर काम कर रही है। इन परियोजनाओं से करीब 78 लाख शहरी आबादी को लाभ पहुंचाने की योजना है। इनके तहत कुल 1,410 एमएलडी जलशोधन क्षमता विकसित की जा रही है।