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Amritsar: शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर धामी ने दिया इस्तीफा, पद छोड़ने की बताई ये वजह
Mon, 17 Feb 2025 08:04 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 17 Feb 2025 08:04 PM IST
सार
एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी 1996 से एसजीपीसी के सदस्य हैं। वे लगातार तीसरी बार शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष चुने गए थे।
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हरजिंदर धामी
- फोटो : संवाद
विस्तार
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने सोमवार को अपने पद से त्यापत्र दे दिया। इसका खुलासा धामी ने बकायदा एसजीपीसी कार्यालय में प्रेस कांफ्रेस करके किया। उन्होंने कहा कि वह अपने एसजीपीसी के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे रहे हैं और त्यागपत्र अगली कार्रवाई के लिए एसजीपीसी की कार्यकारिणी को भेज दिया है। साथ ही अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से अपील की है कि उनको अकाली दल की भर्ती व अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बनाई गई सात सदस्यीय कमेटी के मुखी की जिम्मेदारी से मुक्त किया गया। धामी के त्यागपत्र देने से अकाली व पंथक राजनीतिक में संकट गहरा गया है।
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कहा जा रहा है कि तख्त श्री दमदमा साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को पद से हटाने को लेकर अकाली दल बादल हाईकमान का रजनीतिक दबाव ना झेल सके एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अचानक घटे घटनाक्रम में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के हुकमनामे को अकाली दल पर लागू न करवा पाने व अकाली दल हाई कमान के आदेशों को भी पंथ में लागू न करवा सकने के बीच की दूविधा में फंसे धामी ने अपने पद से इस्तीफा दिया है।
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एसजीपीसी ने नहीं किया अधिकारों का दुरुपयोग
त्यागपत्र देने से पहले मीडिया के समक्ष एडवोकेट धामी ने साफ किया कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने 10 फरवरी को ज्ञानी हरप्रीत सिंह को हटाने को लेकर एसजीपीसी द्वारा अपनाई कार्रवाई की निंदा ही नहीं की बल्कि हटाने के तरीके को गलत करार दिया है। वह श्री अकाल तख्त साहिब को समर्पित है इस के लिए वह नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि एसजीपीसी कार्यकारिणी को सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 के रुल सर्विस एक्ट के तहत सिंह साहिबानो को हटाने, जांच करने व नियुक्ति करने का पूरा अधिकार है। इसलिए एसजीपीसी ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह को हटाकर एसजीपीसी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग नहीं किया है। फिर भी वह श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार व अन्य सिंह साहिबान का सम्मान करते हुए नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं।
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10 फरवरी को ज्ञानी हरप्रीत सिंह को पद से हटाया
एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी द्वारा ज्ञानी हरप्रीत सिंह मामले की जांच के लिए 19 दिसंबर 2025 को गठित तीन सदस्यीय कमेटी के गठन के तुरंत बाद से ज्ञानी रघबीर सिंह तीन बार स्पष्ट कर चुके थे कि एसजीपीसी को सिंह साहिबानों के मामलों की जांच के लिए कमेटी गठित करने का कोई अधिकार ही नहीं है। यह अधिकार केवल श्री अकाल तख्त साहिब के पास ही है। बावजूद 10 फरवरी को एसजीपीसी कार्यकारिणी की बैठक में विरोध के बीच ज्ञानी हरप्रीत सिंह को इस प्रकरण में दोषी करार देते हुए तख्त श्री दमदमा साहिब के पद से हटा दिया गया।
विरोध के चलते भी दबाव में थे धामी
वहीं दो दिसंबर 2024 को तख्तों के सिंह साहिबान ने अकाली दल बादल का पुर्नगठन व भर्ती के लिए हरजिंदर सिंह धामी की अगुवाई में सात सदस्यीय कमेटी का गठन कर उन्हें भर्ती प्रकिरया शुरू करने का आदेश दिया था। लेकिन अकाली दल लीडरशिप के दबाव के कारण व अकाल तख्त के आदेशों पर भर्ती भी शुरू नहीं करवा पाए और बाद में अकाली दल की वर्किंग कमेटी ने अपने स्तर पर गुलजार सिंह रणिके को चुनाव अधिकारी बनाते हुए भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इसका सिख पंथ में विरोध शुरू हो गया और धामी इस उठे विरोध के चलते भी दबाव में थे कि व अकाल तख्त साहिब के आदेशों को अपनी ही पार्टी अकाली दल में लागू नहीं करवा पा रहे है। जबकि एसजीपीसी की यह बेसिक जिम्मेदारी है कि तख्त साहिब के जत्थेदारों के आदेशों पर सिख कौम के अंदर लागू करवाया जाए। जिस में धामी अपने आप को असफल महसूस कर रहे थे।