{"_id":"68bfe382d49f14d56b02dcc6","slug":"punjab-flood-news-lives-shattered-by-sutlej-river-victims-demand-relief-from-government-2025-09-09","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Punjab Flood: सतलुज की बाढ़ से डगमगाई जिंदगी... अब मदद की दरकार, अब पीड़ितों ने सरकार से की ये मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Punjab Flood: सतलुज की बाढ़ से डगमगाई जिंदगी... अब मदद की दरकार, अब पीड़ितों ने सरकार से की ये मांग
Tue, 09 Sep 2025 02:01 PM IST
शाहरुख खान
अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर
अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 09 Sep 2025 02:01 PM IST
सार
पंजाब के फिरोजपुर जिले में सतलुज दरिया के पानी ने जमकर कहर बरपाया। टापू कालू वाला के पीड़ितों की मांग है कि सरकार हमें सुरक्षित स्थान पर दस-दस मरले जमीन दे।
विज्ञापन
फिरोजपुर के सीमावर्ती गांव कालू वाला में स्कूल की छत पर टेंट लगाकर बनाई रसोई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरकार हमें सुरक्षित स्थान पर दस-दस मरले जमीन दें ताकि हम अपने बच्चों के साथ सतलुज दरिया के पानी की मार से दूर रह सकें। हम हर साल दरिया की मार झेलते हैं। यह कहना है कि बाढ़ प्रभावित टापू कालू वाला निवासी लखविंदर सिंह व सुरजीत सिंह का।
उनका कहना है कि यहां के लोगों की जिंदगी नरक बन चुकी है। हर साल दरिया में आई बाढ़ उन्हें नुकसान पहुंचती है। सुरजीत सिंह का कहना है कि अभी वर्ष 2023 में आई बाढ़ के जख्म भरे भी नहीं थे कि अब फिर से बाढ़ ने उन्हें बर्बाद कर दिया।
उस समय बाढ़ से उनके खेतों में आठ ऊंचे रेत के टीले बन गए थे। बड़ी मुश्किल से ट्रैक्टरों के जरिये रेत को साफ करके खेती लायक जमीन तैयार की थी। अब उनकी मेहनत बाढ़ में बह गई है। अब उन्हें सहायता की दरकार व उम्मीद है।
विज्ञापन
ग्रामीण मक्खन सिंह, जरनैल सिंह व जस्सा ने बताया कि वे पिछले 15 दिन से पानी के बीच में रह रहे हैं। स्कूल की छत के ऊपर टेंट लगाकर खाना बना रहे हैं। कालू वाला में ही उन्होंने अपने पशु रखे हुए हैं। कुछ पशु बाढ़ में मर भी गए हैं।
विज्ञापन
उनका कहना है कि यहां के लोगों की जिंदगी नरक बन चुकी है। हर साल दरिया में आई बाढ़ उन्हें नुकसान पहुंचती है। सुरजीत सिंह का कहना है कि अभी वर्ष 2023 में आई बाढ़ के जख्म भरे भी नहीं थे कि अब फिर से बाढ़ ने उन्हें बर्बाद कर दिया।
विज्ञापन
उस समय बाढ़ से उनके खेतों में आठ ऊंचे रेत के टीले बन गए थे। बड़ी मुश्किल से ट्रैक्टरों के जरिये रेत को साफ करके खेती लायक जमीन तैयार की थी। अब उनकी मेहनत बाढ़ में बह गई है। अब उन्हें सहायता की दरकार व उम्मीद है।
विज्ञापन
ग्रामीण मक्खन सिंह, जरनैल सिंह व जस्सा ने बताया कि वे पिछले 15 दिन से पानी के बीच में रह रहे हैं। स्कूल की छत के ऊपर टेंट लगाकर खाना बना रहे हैं। कालू वाला में ही उन्होंने अपने पशु रखे हुए हैं। कुछ पशु बाढ़ में मर भी गए हैं।
उनकी सरकार से मांग है कि यहां के निवासियों को सुरक्षित स्थान पर 10-10 मरले का प्लॉट दे ताकि वे वहां पर रहकर अपने बच्चों का भविष्य बना सकें। उन्हें कभी भारत-पाकिस्तान के बीच में पैदा हुए तनाव की मार और हर साल उन्हें दरिया में आने वाली बाढ़ की मार झेलनी पड़ती है।
उनके घर डूब चुके हैं। कई घर उनके टूट चुके हैं। घरों में पांच-पांच फीट पानी भरा है। खेतों में आठ-आठ फीट पानी भरा है। टापू के तीन तरफ सतलुज दरिया और चौथी तरफ पाकिस्तान है। सारी जिंदगी उन्होंने नाव के जरिये ही गुजारी है।