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'मैं ठीक हूं...' पुकार है मदद की: चंडीगढ़ में दो-तिहाई पुरुष दे रहे जान, भावनाएं साझा करने में झिझक बड़ी वजह
Thu, 10 Sep 2026 12:25 PM IST
Nivedita
सचिन चाैधरी, संवाद, चंडीगढ़
सचिन चाैधरी, संवाद, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:25 PM IST
सार
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ में वर्ष 2024 में 96 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 64 पुरुष और 32 महिलाएं थीं। यानी मृतकों में करीब दो-तिहाई पुरुष रहे।
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आत्महत्या रोकथाम दिवस
- फोटो : freepik.com
विस्तार
‘मैं ठीक हूं...’ कई बार यह छोटा-सा जवाब उस व्यक्ति की सबसे बड़ी पुकार होता है, जो भीतर से ठीक नहीं होता। वह परिवार के बीच रहता है, रोज काम पर जाता है, दोस्तों से मिलता है, हंसता-बोलता है, लेकिन अपने भीतर चल रही परेशानी किसी से साझा नहीं करता।
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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर चंडीगढ़ के आंकड़े इसी खामोशी की तस्वीर सामने रखते हैं। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) की भारत में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्याएं-2024 रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ में वर्ष 2024 में 96 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 64 पुरुष और 32 महिलाएं थीं। यानी मृतकों में करीब दो-तिहाई पुरुष रहे।
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हालांकि, 2023 में दर्ज 150 मामलों की तुलना में 2024 में 36 फीसदी की कमी आई। 2026 में भी आत्महत्या के कई ऐसे मामले आए, जिन्होंने झकझोर कर रख दिया।
66 मामलों में पारिवारिक समस्याएं बनीं प्रमुख वजह
आंकड़ों के अनुसार 66 आत्महत्याओं के पीछे पारिवारिक समस्याएं प्रमुख ट्रिगर रहीं। इनमें 45 पुरुष और 21 महिलाएं थीं। वहीं चार मामले वैवाहिक समस्याओं से जुड़े थे। आंकड़े बताते हैं कि रिश्तों में पैदा होने वाला तनाव भी कई लोगों के लिए गंभीर मानसिक दबाव का कारण बन रहा है।
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आर्थिक दबाव भी बढ़ा रहा मानसिक बोझ
एनसीआरबी के आंकड़ों में आर्थिक स्थिति की तस्वीर भी सामने आती है। 33 मृतकों की सालाना आय एक लाख रुपये से कम, जबकि 55 की आय एक से पांच लाख रुपये के बीच थी। यानी 88 मृतक इन दोनों आय वर्गों से थे। इनमें 36 वेतनभोगी या पेशेवर, 10 बेरोजगार और नौ दैनिक वेतनभोगी मजदूर थे। परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, नौकरी और अन्य जिम्मेदारियों का दबाव भी मानसिक परेशानी बढ़ा सकता है।
एक व्यक्ति की मौत, पूरे परिवार पर असर
आत्महत्या का असर सिर्फ जान गंवाने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। माता-पिता, बच्चे, जीवनसाथी और अन्य परिजन लंबे समय तक भावनात्मक और सामाजिक दबाव से गुजरते हैं। ऐसे में रोकथाम के लिए समय पर संवाद और मदद तक पहुंच बेहद जरूरी है।
रोकथाम की शुरुआत संवाद से
चंडीगढ़ पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में जुलाई 2025 तक 381 पुरुष और 164 महिलाएं आत्महत्या कर चुके हैं। पुलिस के अनुसार 75 से 80 फीसदी मामलों में अवसाद और असफल प्रेम संबंध जैसे कारण सामने आए। किसी व्यक्ति का अचानक चुप हो जाना, परिवार से दूरी बनाना, लगातार निराश रहना या जिंदगी को लेकर नकारात्मक बातें करना जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे समय में उसके पास बैठकर बात करना और जरूरत पड़ने पर पेशेवर मदद तक पहुंचाना जरूरी है।
2026 में आत्महत्या के चर्चित मामले
हरियाणा सिविल सचिवालय, फरवरी 2026: आईएएस अधिकारी के विशेष वरिष्ठ सचिव गणेश दास अरोड़ा ने सचिवालय भवन से कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
मौलीजागरां, जुलाई 2026: 33 वर्षीय मोनू ने अपनी पत्नी के कथित प्रेम संबंध से तंग आकर मानसिक तनाव में फांसी लगा ली थी।
जीएमसीएच-32, जुलाई 2026: 24 वर्षीय डॉक्टर योगेश ने संदिग्ध परिस्थितियों में खुद को जहरीला इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
सेक्टर-56, जुलाई 2026: 19 वर्षीय युवती नीतू ने भाइयों के घर पर अज्ञात कारणों के चलते फंदा लगाकर जान दे दी थी।
चंडीगढ़, जून 2026: 20 वर्षीय 12वीं की छात्रा खुशी ने मोबाइल फोन छीने जाने से नाराज होकर बंद कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
पीयू बॉयज हॉस्टल नंबर-4, अगस्त 2026: यूआईएलएस के बीए-एलएलबी पांचवें वर्ष के छात्र चैतन्य सिंह का शव फंदे से लटका मिला था।
जीएमसीएच-32, 22 जुलाई 2026: एमबीबीएस छात्र करण संधू ने ई-ब्लॉक की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी।
आत्महत्या का विचार आए तो क्या करें?
जिंदगी में अत्यधिक तनाव, निराशा या परेशानी के दौरान व्यक्ति को आत्महत्या ही एकमात्र रास्ता नजर आ सकता है। लंबे समय से चल रहा तनाव, मानसिक बीमारी या अचानक आया भावनात्मक संकट इसके पीछे हो सकता है। आवेगी व्यक्ति में उस समय सहनशीलता कम हो जाती है, जबकि कुछ मामलों में बार-बार आने वाले बाध्यकारी विचार स्थिति को गंभीर बना सकते हैं।
बचाव के लिए जरूरी कदम
अकेले न रहें। संकट के समय किसी भरोसेमंद व्यक्ति से तुरंत बात करें और अपनी परेशानी साझा करें। करीबी व्यक्ति को अपने साथ रखें और सुरक्षित माहौल में रहें। आत्महत्या के विचार बार-बार आ रहे हों तो देर न करें और मनोरोग विशेषज्ञ या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।
पुरुष अक्सर भावनाएं साझा करने और मदद मांगने में झिझकते हैं। नौकरी, आर्थिक दबाव और पारिवारिक परेशानियों को अकेले संभालने से तनाव बढ़ सकता है। ऐसे में समय रहते बात करना और मदद लेना बेहद जरूरी है। -डॉ. प्रमोद, मनोचिकित्सक, इंडियन साइकेट्री सोसाइटी