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पंजाब निकाय चुनाव में जनादेश के मायने क्या: छोटे चुनाव से भाजपा ने मजबूत की सियासी जमीन, 2027 में होगा 'खेला'
Sat, 30 May 2026 12:12 PM IST
Nivedita
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Sat, 30 May 2026 12:12 PM IST
सार
पंजाब के 102 नगर निकायों के चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) 925 सीटें जीतने के साथ पहले नंबर पर रही है। 374 सीटों जीतकर कांग्रेस ने दूसरा नंबर हासिल किया है। शिअद ने 189 और भाजपा ने 167 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि निर्दलीय प्रत्याशियों ने 248 सीटों पर जीत दर्ज की है।
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पंजाब निकाय चुनाव के परिणाम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब निकाय चुनाव का परिणाम कई संदेश लेकर आया है। इसमें कोई दो राय नहीं कि चुनावी ट्रेंड के मुताबिक इस बार भी निकाय चुनाव में पंजाब के सयाने मतदाताओं ने सत्तारूढ़ सरकार को ही जितवाकर विकास की पटरी पर डबल इंजन के साथ आगे बढ़ने का मौका दिया है।
उधर, नतीजों का दूसरा पक्ष यदि देखें तो इन छोटे चुनावों (वार्डों तक सीमित) में जनादेश का बड़ा संदेश भी सामने आया है जो इस बात का संकेत देता है कि इस बार विधानसभा चुनाव के रण में मुकाबला रोचक होगा।
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आठ नगर निगमों से दो पर तो अपना वर्चस्व भी स्थापित किया है। ऐसा तब है जब 1977 सीटों में से भाजपा के प्रत्याशी सिर्फ 1316 सीटों पर ही चुनाव लड़ रहे थे, काफी नामांकन रद्द हो गए थे। भाजपा ने अपने इस प्रदर्शन से यह जता दिया है कि आठ माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में उसे हल्के में लेना विरोधियों के लिए नासमझी हो सकती है।
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उधर, नतीजों का दूसरा पक्ष यदि देखें तो इन छोटे चुनावों (वार्डों तक सीमित) में जनादेश का बड़ा संदेश भी सामने आया है जो इस बात का संकेत देता है कि इस बार विधानसभा चुनाव के रण में मुकाबला रोचक होगा।
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भाजपा ने मजबूत की सियासी जमीन
भले ही चुनाव में सत्तारूढ़ आप को बढ़त मिली है मगर भाजपा ने भी अपनी सियासी जमीन को मजबूत किया है। भाजपा जो कि पंजाब में अपने जनाधार के लिए बरसों से जूझ रही है, उसका प्रदर्शन सधी हुई रणनीति का नतीजा कहा जा सकता है। साल 2021 के निकाय चुनाव में भाजपा 2215 में से 49 सीटों पर सिमट गई थी मगर इस बार निकाय की कुल 1977 सीटों में से भाजपा ने 167 सीटों पर जीत दर्ज की है।
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आठ नगर निगमों से दो पर तो अपना वर्चस्व भी स्थापित किया है। ऐसा तब है जब 1977 सीटों में से भाजपा के प्रत्याशी सिर्फ 1316 सीटों पर ही चुनाव लड़ रहे थे, काफी नामांकन रद्द हो गए थे। भाजपा ने अपने इस प्रदर्शन से यह जता दिया है कि आठ माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में उसे हल्के में लेना विरोधियों के लिए नासमझी हो सकती है।
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