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पंजाब के 8 जिलों में धान के उत्पादन पर असर: 180 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को झटका; केंद्रीय पूल खरीद प्रभावित
Sun, 31 Aug 2025 10:40 AM IST
नवीन दलाल
राजिंद्र शर्मा, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, चंडीगढ़
Published by: नवीन दलाल
Updated Sun, 31 Aug 2025 10:40 AM IST
सार
पंजाब में अगर पिछले कुछ साल की बात करें तो चावल का उत्पादन बढ़ता जा रहा है जिस कारण केंद्रीय पूल के तहत भी इसकी खरीद अधिक रही है। वर्ष में 2016-17 में 3998 किलोग्राम हेक्टेयर चावल का उत्पादन हुआ था जो 2017-18 में बढ़कर 4366 किलोग्राम हेक्टेयर तक पहुंच गया।
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बीमारी से ग्रस्त धान की फसल।
- फोटो : संवाद
विस्तार
पंजाब में बाढ़ के कारण इस बार धान की फसल के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। पंजाब के आठ जिले पठानकोट, कपूरथला, फिरोजपुर, फाजिल्का, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और होशियारपुर इस समय बाढ़ की चपेट में हैं। इन जिलों में तीन लाख एकड़ कृषि भूमि बाढ़ से प्रभावित है जिसमें प्रमुख रूप से धान की फसल शामिल है। इससे सरकार के 180 लाख मीट्रिक टन धान के उत्पादन के लक्ष्य को भी झटका लगा है।
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साथ ही केंद्रीय पूल पर भी इसका असर पड़ेगा, क्योंकि धान का 15 फीसदी तक उत्पादन इससे प्रभावित हो सकता है। वर्ष 2024-25 में केंद्रीय पूल के तहत 173 लाख टन धान की खरीद हुई थी। यही कारण है कि इस बार सरकार ने उत्पादन का अधिक लक्ष्य रखा था, जो अब पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। इस बार सूबे में बाढ़ से अधिक हालात खराब हैं, जिस कारण फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इससे साफ है कि धान के उत्पादन पर इसका असर देखने को मिलेगा।
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पिछले आठ साल में चावल का उत्पादन
अगर पिछले कुछ साल की बात करें तो चावल का उत्पादन बढ़ता जा रहा है जिस कारण केंद्रीय पूल के तहत भी इसकी खरीद अधिक रही है। वर्ष में 2016-17 में 3998 किलोग्राम हेक्टेयर चावल का उत्पादन हुआ था जो 2017-18 में बढ़कर 4366 किलोग्राम हेक्टेयर तक पहुंच गया। इसी तरह 2018-19 में 4132 किलोग्राम हेक्टेयर, 2019-20 में 4034, 2020-21 में 4366, 2021-22 में 4340, 2022-23 में 4193 और वर्ष 2023-24 में चावल का 4516 किलोग्राम हेक्टेयर तक उत्पादन पहुंच गया।
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अधिकारी के अनुसार
इस समय धान की फसल में अगर एक या दो दिन भी लगातार पानी खड़ा रहता है तो उससे फसल पूरी तरह से खराब हो जाएगी। पंजाब में बाढ़ के जो हालात हैं उससे साफ है कि जो भी कृषि भूमि इसकी चपेट में आएगी, वहां फसल पूरी तरह से खराब हो गई होगी। इससे उत्पादन पर भी काफी असर पड़ेगा। -हर्ष नायर, प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय।