पंजाब में चिंता: 'अकाली दल वारिस पंजाब दे' के गठन से बढ़े कट्टरपंथियों के हौसले, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
खालिस्तान की मांग को लेकर 1980-1990 के दशक में पंजाब आतंकवाद के दौर से गुजर चुका है। अब खालिस्तान आंदोलन पूरी तरह दम तोड़ चुका है, लेकिन इसे दोबारा हवा देने की भी कोशिशें हो रही हैं। ऐसे में खालिस्तान समर्थकों के नया दल बनाने से खुफिया तंत्र सक्रिय हो गया है।
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खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के समर्थकों ने नई पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे बना दी है। पार्टी का प्रधान भी डिब्रूगढ़ जेल में बंद आजाद सांसद अमृतपाल सिंह को ही बनाया गया है।
नए दल की घोषणा के साथ ही कट्टरपंथियों को नया मंच भी मिल गया है, जिसने केंद्र के साथ ही राज्य सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। खालिस्तान समर्थकों द्वारा नई पार्टी बनाए जाने के साथ ही केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। एजेंसियों की तरफ से इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखी जा रही है कि पार्टी के साथ कौन से लोग जुड़ रहे हैं और किस तरह की गतिविधियां की जा रही हैं। पार्टी को चलाने के लिए कहां से फंडिंग हो रही है, इसपर भी नजर रहेगी।
पंजाब में कट्टरपंथियों को इस तरह का खुला मंच मिलने से सुरक्षा एजेंसियों में हलचल बढ़ गई है। गौरतलब है कि लोकसभा चुनावों में दो कट्टरपंथियों की जीत से इनके हौसले बुलंद हुए हैं। खडूर साहिब से
अमृतपाल सिंह ने सबसे अधिक 1,97,120 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। इसी तरह सरबजीत सिंह खालसा ने भी फरीदकोट से आजाद चुनाव लड़ते हुए 70,053 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। अब इनके पार्टी बनाकर खुलेआम मैदान में आने के बाद खुफिया एजेंसियां सूबे में अपना नेटवर्क मजबूत करने की भी योजना तैयार कर रही हैं।
1989 में भी बड़े अंतर से जीते थे सभी कट्टरपंथी
1989 लोकसभा चुनाव में कट्टरपंथी विचारधारा वाले सभी उम्मीदवार बड़े अंतर से जीते थे। खालिस्तान के समर्थक सिमरनजीत सिंह मान की पार्टी ने उस चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की थी। पार्टी के छह सांसदों ने भारी मतों से चुनाव जीता था। यहां तक कि तरनतारन से सिमरनजीत सिंह मान की जीत का अंतर सबसे अधिक 4,80,417 मतों का रहा था। पार्टी के बाकी सांसद भी एक लाख से ऊपर मतों के अंतर से जीते थे। हालांकि 1991 और उसके बाद के चुनावों में पार्टी कुछ खास कमाल नहीं कर पाई थी।
पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है। यहां पहले भी कट्टरपंथी विचारधारा वाली पार्टी व संगठन बनते रहे हैं, जिस कारण पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों के लिए कई तरह की चुनौतियां रहती हैं। पहले भी पंजाब का माहौल खराब करने का प्रयास किया गया। अगर दोबारा ऐसा किसी भी तरह का माहौल बनता है तो पंजाब पुलिस पूरी तरह से उससे निपटने में समक्ष है। -आद्या प्रसाद पांडेय, पूर्व डीजीपी, पंजाब पुलिस।