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चंडीगढ़ का जलवा: दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में हमारे 111 शोधकर्ताओं का नाम, शोध के दम पर वैश्विक पहचान

Sat, 10 Oct 2026 08:14 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 10 Oct 2026 08:14 AM IST
सार

पीजीआई के 55 वैज्ञानिक वार्षिक शोध प्रभाव की श्रेणी में शामिल हैं, जबकि 21 को पूरे करिअर के शोध प्रभाव पर आधारित लाइफटाइम श्रेणी में जगह मिली है। पीयू के 54 शोधकर्ता वार्षिक और 28 लाइफटाइम श्रेणी में शामिल हैं।

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Chandigarh PGI and Panjab University 111 researchers mark at international level
वैश्विक शोध में चंडीगढ़ का दबदबा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के दो प्रमुख संस्थानों पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के 111 शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
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स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर की 2026 की दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में पीजीआई के 55 और पीयू के 56 शोधकर्ताओं को जगह मिली है। यह उपलब्धि चिकित्सा, पर्यावरण विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी, रसायन विज्ञान, भौतिकी, फार्मेसी और इंजीनियरिंग समेत विभिन्न क्षेत्रों में शहर के शोध कार्यों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच दर्शाती है। 

पीजीआई के 55 वैज्ञानिक वार्षिक शोध प्रभाव की श्रेणी में शामिल हैं, जबकि 21 को पूरे करिअर के शोध प्रभाव पर आधारित लाइफटाइम श्रेणी में जगह मिली है। पीयू के 54 शोधकर्ता वार्षिक और 28 लाइफटाइम श्रेणी में शामिल हैं। दोनों श्रेणियों में 26 शोधकर्ताओं के नाम साझा होने के कारण पीयू के कुल 56 अलग-अलग शोधकर्ताओं को सूची में जगह मिली है।
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शोध के प्रभाव के आधार पर चयन
यह सूची स्कोपस डेटाबेस के आंकड़ों पर आधारित है। इसमें शोध प्रकाशनों, दूसरे वैज्ञानिकों की ओर से दिए गए उद्धरणों, एच-इंडेक्स, सह-लेखकत्व और शोधपत्रों में लेखक की भूमिका जैसे मानकों के आधार पर शोध प्रभाव का आकलन किया जाता है। वार्षिक श्रेणी में वर्ष 2025 के शोध कार्यों के प्रभाव, जबकि लाइफटाइम श्रेणी में पूरे करियर के शोध योगदान को आधार बनाया गया है।
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चिकित्सा से पर्यावरण विज्ञान तक के विशेषज्ञ शामिल
पीजीआई के प्रमुख शोधकर्ताओं में डॉ. अरुणालोके के. चक्रवर्ती, डॉ. रितेश अग्रवाल, डॉ. आशुतोष नाथ अग्रवाल, डॉ. राधा कृष्ण धीमान, डॉ. अजय कुमार दुसेजा और डॉ. संदीप के. ग्रोवर, डॉ. सुरजीत के. सिंह, डॉ. रविंद्र खैवाल और डॉ. दिगंबर बेहेरा शामिल हैं। वार्षिक सूची में डॉ. शिवप्रकाश मंड्या रुद्रमूर्ति, डॉ. शंकर प्रिंजा, डॉ. नवनीत सिंह, डॉ. संजय कुमार आर. भडाडा, डॉ.अमन शर्मा, डॉ. विशाल शर्मा, डॉ. इंदरपाल एस. सहगल, डॉ. रामदीप सिंह और डॉ. सोनू गोयल समेत कई शोधकर्ताओं को जगह मिली है। वहीं, पीयू के शोधकर्ताओं ने चिकित्सा जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिकी, पर्यावरण विज्ञान, पदार्थ विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में योगदान दिया है।


पीयू की कुलपति प्रो. मीनाक्षी गोयल ने इसे बेहतर शोध, विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग और विश्वविद्यालय की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रमाण बताया। यह सूची किसी एक शोध या खोज के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों के शोध प्रभाव का आकलन है।
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