फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Chandigarh-Punjab News ›   Chandigarh Municipal Corporation House meeting today Solid Waste Management Bye-laws 2026 all update

Chandigarh: चुनावी साल में नगर निगम का यू-टर्न, कूड़ा शुल्क और जुर्माना नहीं बढ़ेगा; हाउस की बैठक में फैसला

Fri, 31 Jul 2026 10:17 AM IST
Nivedita संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 31 Jul 2026 10:17 AM IST
सार

बैठक में नगर निगम के संयुक्त आयुक्त बलबीर राज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नए बायलॉज तैयार किए गए हैं। इनमें सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने, कचरे में आग लगाने, सड़क पर थूकने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान किया गया है।

विज्ञापन
Chandigarh Municipal Corporation House meeting today Solid Waste Management Bye-laws 2026 all update
चंडीगढ़ नगर निगम की बैठक - फोटो : अमर उजाला/फाइल

विस्तार

चुनावी साल में नगर निगम ने शहरवासियों को बड़ी राहत देते हुए डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के यूजर चार्ज और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के उल्लंघन पर प्रस्तावित बढ़ी हुई जुर्माना राशि लागू नहीं करने का फैसला किया है। 
विज्ञापन


सदन की बैठक में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बायलॉज-2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी गई लेकिन मेयर सौरभ जोशी ने साफ-साफ कहा कि यूजर चार्ज और जुर्माना दोनों पुराने ही रहेंगे। ड्राफ्ट अब नगर निगम की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा जहां 15 दिन तक शहरवासी सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद संशोधन कर अंतिम अधिसूचना जारी होगी।
विज्ञापन


बैठक में नगर निगम के संयुक्त आयुक्त बलबीर राज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नए बायलॉज तैयार किए गए हैं। इनमें सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने, कचरे में आग लगाने, सड़क पर थूकने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान किया गया है। फूड वेंडरों और रेहड़ी-फड़ी संचालकों के लिए कूड़ा संग्रहण की व्यवस्था तथा डस्टबिन रखने जैसे नियम भी शामिल किए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ड्राफ्ट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पार्षद प्रेमलता ने कहा कि निगम का उद्देश्य लोगों पर चार्ज और जुर्माना थोपना नहीं बल्कि शहर को स्वच्छ बनाना होना चाहिए। उन्होंने फूड वेंडरों को निगम की ओर से डस्टबिन उपलब्ध कराने की मांग उठाई। सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर मनप्रीत सिंह ने कहा कि कई वेंडर सड़कों और गलियों में बर्तन धोकर गंदा पानी बहा देते हैं जिससे सीवर और स्टॉर्म वाटर लाइन प्रभावित होती हैं। उन्होंने वेंडरों को ट्रिपल बिन उपलब्ध कराने और पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत बताई।

पार्षद दमनप्रीत सिंह ने कहा कि पीजी छोड़ते समय बड़ी मात्रा में कपड़े और अन्य ठोस कचरा फेंका जाता है जबकि उसके पृथक्करण की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने रात में निगरानी बढ़ाने और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की। वहीं पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्टर समय पर कचरा नहीं उठाते, लोगों से अतिरिक्त पैसे मांगते हैं और मिश्रित कचरा उठाकर दूसरी जगह जाकर उसका पृथक्करण करते हैं। उन्होंने कहा कि पहले व्यवस्था सुधारी जाए, उसके बाद ही नए नियमों को सख्ती से लागू किया जाए।

मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि बायलॉज का उद्देश्य स्रोत स्तर पर कचरे का पृथक्करण, वैज्ञानिक निस्तारण और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने अधिकारियों को जनजागरूकता बढ़ाने और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। साथ ही दोहराया कि शहरवासियों पर फिलहाल कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा और मौजूदा यूजर चार्ज तथा जुर्माना व्यवस्था ही लागू रहेगी।

सदन में जलभराव पर सत्ता पक्ष का हल्ला
बैठक में शुक्रवार को दक्षिणी सेक्टरों और गांवों में जलभराव का मुद्दा सबसे ज्यादा गरमाया। हैरानी की बात यह रही कि विपक्ष से पहले सत्ता पक्ष के भाजपा पार्षदों ने ही निगम के सफाई सिस्टम, टेंडर प्रक्रिया और ड्रेनेज व्यवस्था पर सवालों की झड़ी लगा दी। 

भाजपा पार्षद कंवरजीत सिंह राणा ने दो दिन पहले हुई बारिश में गांव बुड़ैल के कई हिस्सों में डेढ़ से चार फुट तक पानी भरने का मुद्दा उठाते हुए अधिकारियों पर रोड गलियों और स्टॉर्म वॉटर लाइन की सफाई केवल कागजों में दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने निगम कमिश्नर को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि सफाई व्यवस्था नहीं सुधरी तो वह कमिश्नर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठेंगे।

राणा ने कहा कि नगर निगम डेढ़ करोड़ रुपये का सफाई टेंडर देता है लेकिन टेंडर समय पर आवंटित नहीं होते। चार-चार बार टेंडर में कंपनियां नहीं आतीं और बाद में एक ही कंपनी को पांच फीसदी कम दर पर काम दे दिया जाता है। उन्होंने निगम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि जून में रोड गलियों और स्टॉर्म वॉटर लाइन की सफाई हो जानी चाहिए थी लेकिन केवल कागजों में खानापूर्ति की गई। उन्होंने कहा कि अमर उजाला लगातार इस लापरवाही को उजागर करता रहा है। बुधवार की बारिश के बाद उनके वार्ड की स्थिति देखकर उन्हें महसूस हुआ कि खबरें पूरी तरह सही थीं। रिकॉर्ड में सफाई पूरी दिखाई गई, लेकिन गांव बुड़ैल में न तो रोड गलियों की सफाई हुई और न ही स्टॉर्म लाइन की।

सीनियर डिप्टी मेयर जसमनप्रीत सिंह ने कहा कि सेक्टर-44 और 51 में भी जलभराव हुआ जबकि सेक्टर-44 स्थित स्कूल के पास सड़क धंस गई। उन्होंने पूछा कि मानसून से पहले कितनी रोड गलियों की सफाई हुई और कहा कि दक्षिणी सेक्टरों में स्थायी समाधान के लिए स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज की क्षमता बढ़ानी होगी।

कांग्रेस पार्षद प्रेमलता ने कहा कि उनके क्षेत्र में भी पानी भर गया था लेकिन अधिकारियों को मौके पर बुलाकर देर रात तक रोड गलियां खुलवाई गईं। भाजपा पार्षद महेश इंद्र सिंह सिद्धू ने कहा कि हर वर्ष एक ही स्थान जलभराव के हॉटस्पॉट बनते हैं, फिर भी उनका स्थायी समाधान नहीं किया जाता। उन्होंने एन-चो की सफाई, सिल्ट हटाने और ड्रेनेज नेटवर्क के पुनर्गठन की जरूरत बताई।

जवाब में चीफ इंजीनियर सीबी ओझा और एक्सईएन पब्लिक हेल्थ राजबीर सिंह ने बताया कि शहर में 30,453 रोड गलियां हैं। इनकी सफाई के लिए 12 मई को 1.13 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया था और अब तक 29,250 रोड गलियों (96 प्रतिशत) की सफाई कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि शहर का स्टॉर्म वॉटर सिस्टम वर्षों पहले उत्तरी सेक्टरों में 15 मिमी और दक्षिणी सेक्टरों में 25 मिमी बारिश के हिसाब से डिजाइन किया गया था, जबकि अब इससे कहीं अधिक वर्षा हो रही है। अधिकारियों ने माना कि समय पर सफाई जरूरी है और आगे से मार्च में ही टेंडर जारी कर मानसून से पहले पूरी सफाई कराने का प्रयास किया जाएगा।

सात दिन की चेतावनी
भाजपा पार्षद कंवरजीत सिंह राणा ने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर बुड़ैल समेत उनके वार्ड की रोड गलियों और स्टॉर्म वॉटर लाइन की सफाई नहीं हुई तो वह निगम कमिश्नर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठेंगे।

निगम का दावा
शहर में कुल रोड गलियां : 30,453
अब तक सफाई : 29,250 (96%)
सफाई टेंडर : 1.13 करोड़ रुपये
अगले वर्ष मार्च में ही टेंडर जारी कर मानसून से पहले सफाई पूरी कराने की योजना।

जीआरडीआरसी के आदेश पर निगम में घमासान
बैठक में शुक्रवार को जीआरडीआरसी (ग्रीवेंस रिड्रेसल एंड डिस्प्यूट रेजोल्यूशन कमेटी) द्वारा दो वेंडरों को पुराने स्थान पर बैठने के लिए स्टे देने का मामला जोरदार ढंग से उठा। कांग्रेस पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी, दमनप्रीत सिंह और प्रेमलता ने सुप्रीम कोर्ट के अतिक्रमण हटाने संबंधी आदेश का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि आखिर जीआरडीआरसी किस आधार पर ऐसे आदेश जारी कर रही है। पार्षदों ने अमर उजाला में छपी खबर का हवाला देते हुए कहा कि सेक्टर-22 की आशा और सेक्टर-41 की पूजा को पुराने स्थान पर बैठाने के आदेश के बाद संबंधित प्रवर्तन अधिकारियों को नोटिस तक जारी कर दिया गया।

गाबी ने आरोप लगाया कि जीआरडीआरसी के एक सदस्य ने पार्षद दमनप्रीत सिंह को फोन कर कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट का सामना करने की चेतावनी दी। उन्होंने पूछा कि क्या कोई कमेटी सदस्य किसी जनप्रतिनिधि को इस तरह धमकी दे सकता है। दमनप्रीत सिंह ने कहा कि यदि ऐसे ही स्टे दिए जाते रहे तो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराना मुश्किल हो जाएगा।

इस पर नगर निगम आयुक्त ने साफ किया कि जीआरडीआरसी के आदेशों के विरुद्ध अपीलीय प्राधिकारी मेयर हैं और वे चाहें तो ऐसे आदेश रद्द कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी सदस्य ने पार्षद को अनुचित तरीके से धमकी दी है तो इसकी शिकायत स्थानीय निकाय विभाग के सचिव को भेजी जाएगी, क्योंकि जीआरडीआरसी नगर निगम नहीं बल्कि स्थानीय निकाय विभाग के अधीन कार्य करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed