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Punjab by Election 2024 : इन चार दिग्गजों की साख दांव पर, सियासी भविष्य भी तय करेगा चुनाव
Mon, 28 Oct 2024 10:34 AM IST
अंकेश ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Mon, 28 Oct 2024 10:34 AM IST
सार
पंजाब में चार विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव कई दिग्गजों के लिए साख का सवाल है। यह चुनाव इन नेताओं के राजनीतिक भविष्य को भी तय करेगा।
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पंजाब में चार सीटों पर उपचुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब विधानसभा की चार सीटों पर उपचुनाव के लिए सियासी पिच तैयार हो गई है। उपचुनाव के लिए 13 नवंबर को मतदान होना है। इस बार विधानसभा उपचुनाव में कई दिग्गजों की साख दांव पर है। इसके चलते जीत दर्ज करने के लिए सभी दिग्गज एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। यह उपचुनाव इन नेताओं का सियासी भविष्य भी तय करने वाला है। कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व डिप्टी सीएम व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, गुरमीत सिंह मीत हेयर व मनप्रीत बादल के लिए यह चुनाव अहम रहने वाला है।
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गिद्दड़बाहा से पंजाब कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग के विधायकी छोड़ने के बाद अब अपनी पत्नी अमृता वड़िंग चुनाव मैदान में हैं। तीन चुनाव से वड़िंग का इस विधानसभा क्षेत्र में दबदबा है। यही कारण है कि उन्होंने अब अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारा है, ताकि पिछले चुनाव के नतीजों को वह इस चुनाव में भी दोहरा सकें। वड़िंग की अगुवाई में ही लोकसभा में कांग्रेस ने 7 सीटें जीती थीं। उपचुनाव में प्रधान के तौर पर अन्य सीटों पर जीत दर्ज करने के अलावा उनके लिए अपनी सीट बचाने की भी चुनौती है। यह चुनावी नतीजे उनके आगे की सियासी सफर पर भी असर डालेंगे। वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव भी है, इसलिए यह चुनावी नतीजे उनके लिए और भी अहम साबित होने वाले हैं।
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वड़िंग ने लगातार तीन बार इस सीट से जीत दर्ज की है, लेकिन उनका मत प्रतिशत पिछले चुनावों के मुकाबले गिरा है है। वर्ष 2017 में जहां उन्होंने 45.9 प्रतिशत मत हासिल किए थे, वहीं वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव में उनको 35.47 प्रतिशत मत मिले।
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रंधावा के लिए चुनाव साख का सवाल
इस बार चुनाव में यही हालात पूर्व डिप्टी सीएम व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के लिए भी हैं। वह तीन बार डेरा बाबा नानक सीट से जीत दर्ज करते रहे हैं, लेकिन अब लोकसभा चुनाव में एंट्री के बाद उन्होंने भी अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारा है। रंधावा कांग्रेस में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में आप की लहर के बावजूद वह अपनी इस सीट को बचाने में सफल रहे थे। इसके बाद लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने गुरदासपुर से जीत दर्ज करके अपनी ड्यूटी को बखूबी निभाया था, लेकिन अब डेरा बाबा नानक से उनकी पत्नी जतिंदर कौर यहां से चुनाव लड़ रही हैं, जिसके चलते उनके लिए यह चुनाव साख का सवाल बना हुआ है। एरिया का सांसद होने के नाते चुनाव में उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है कि इस सीट पर पार्टी अच्छा प्रदर्शन करे। रंधावा के लिए भी चिंता का विषय है कि इस सीट से उनका मत प्रतिशत कम होता रहा है। वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव में जहां उन्होंने 50.22 प्रतिशत हासिल किए थे, वहीं वर्ष 2017 में उनका मत प्रतिशत कम होकर 42.83 प्रतिशत, जबकि 2022 में यह गिरकर 36.70 प्रतिशत रह गया।
इस बार चुनाव में यही हालात पूर्व डिप्टी सीएम व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के लिए भी हैं। वह तीन बार डेरा बाबा नानक सीट से जीत दर्ज करते रहे हैं, लेकिन अब लोकसभा चुनाव में एंट्री के बाद उन्होंने भी अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारा है। रंधावा कांग्रेस में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। 2022 विधानसभा चुनाव में आप की लहर के बावजूद वह अपनी इस सीट को बचाने में सफल रहे थे। इसके बाद लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने गुरदासपुर से जीत दर्ज करके अपनी ड्यूटी को बखूबी निभाया था, लेकिन अब डेरा बाबा नानक से उनकी पत्नी जतिंदर कौर यहां से चुनाव लड़ रही हैं, जिसके चलते उनके लिए यह चुनाव साख का सवाल बना हुआ है। एरिया का सांसद होने के नाते चुनाव में उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है कि इस सीट पर पार्टी अच्छा प्रदर्शन करे। रंधावा के लिए भी चिंता का विषय है कि इस सीट से उनका मत प्रतिशत कम होता रहा है। वर्ष 2012 विधानसभा चुनाव में जहां उन्होंने 50.22 प्रतिशत हासिल किए थे, वहीं वर्ष 2017 में उनका मत प्रतिशत कम होकर 42.83 प्रतिशत, जबकि 2022 में यह गिरकर 36.70 प्रतिशत रह गया।
पिछले चुनाव की हार का डर
पांच बार के विधायक व दो बार वित्त मंत्री रहे मनप्रीत बादल के लिए भी पिछले चुनाव में नतीजे अच्छे नहीं रहे थे। पिछली बार वह कांग्रेस की टिकट पर बठिंडा अर्बन सीट से लड़े थे और हार गए थे। यहां तक कि उनको सिर्फ 18.12 प्रतिशत वोट पड़े थे। इस बार वह भाजपा से गिद्दड़बाहा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। मनप्रीत अगर जीतते हैं तो उनके लिए यह चुनाव संजीवनी साबित हो सकता है, लेकिन अगर नतीजे इससे उलट रहते हैं तो उनके सियासी भविष्य के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है।
बरनाला से मीत हेयर के दोस्त मैदान में
इसी तरह संगरूर से सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर के लिए भी यह चुनाव खास है, क्योंकि उनके विधानसभा क्षेत्र बरनाला से उनके क्लासमेट हरिंदर सिंह धालीवाल मैदान में हैं। मीत हेयर वर्ष 2017 व 2022 में बरनाला से विधायक चुने गए थे, इसलिए चुनाव में उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।
पांच बार के विधायक व दो बार वित्त मंत्री रहे मनप्रीत बादल के लिए भी पिछले चुनाव में नतीजे अच्छे नहीं रहे थे। पिछली बार वह कांग्रेस की टिकट पर बठिंडा अर्बन सीट से लड़े थे और हार गए थे। यहां तक कि उनको सिर्फ 18.12 प्रतिशत वोट पड़े थे। इस बार वह भाजपा से गिद्दड़बाहा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। मनप्रीत अगर जीतते हैं तो उनके लिए यह चुनाव संजीवनी साबित हो सकता है, लेकिन अगर नतीजे इससे उलट रहते हैं तो उनके सियासी भविष्य के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है।
बरनाला से मीत हेयर के दोस्त मैदान में
इसी तरह संगरूर से सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर के लिए भी यह चुनाव खास है, क्योंकि उनके विधानसभा क्षेत्र बरनाला से उनके क्लासमेट हरिंदर सिंह धालीवाल मैदान में हैं। मीत हेयर वर्ष 2017 व 2022 में बरनाला से विधायक चुने गए थे, इसलिए चुनाव में उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।