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जेल में रहेंगे अमृतपाल: NSA खत्म होने के बाद भी रिहाई नहीं, HC ने वीसी के जरिए दिए ट्रायल चलाने के निर्देश
Sat, 18 Apr 2026 08:18 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Sat, 18 Apr 2026 08:18 AM IST
सार
पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि खुफिया एजेंसियों के इनपुट के अनुसार अमृतपाल सिंह की रिहाई से कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर राज्य ने अनुरोध किया कि अजनाला कांड से जुड़े विभिन्न मामलों में उनकी हिरासत डिब्रूगढ़ जेल में ही जारी रखने की अनुमति दी जाए।
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अमृतपाल सिंह
- फोटो : फाइल
विस्तार
श्री खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निवारक हिरासत 22 अप्रैल को समाप्त हो रही है। इसके बावजूद वह असम की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में ही रहेंगे। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया है।
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि खुफिया एजेंसियों के इनपुट के अनुसार अमृतपाल सिंह की रिहाई से कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर राज्य ने अनुरोध किया कि अजनाला कांड से जुड़े विभिन्न मामलों में उनकी हिरासत डिब्रूगढ़ जेल में ही जारी रखने की अनुमति दी जाए। साथ ही ट्रायल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संचालित करने की मांग की गई।
राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी के दूसरे राज्य में होने की स्थिति में वीसी के माध्यम से ट्रायल संभव है। वहीं अमृतपाल सिंह की ओर से पेश वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इससे जमानत और अन्य कानूनी राहत प्राप्त करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि अमृतपाल सिंह 11 अन्य एफआईआर में भी आरोपी हैं और सभी मामलों में समानांतर ट्रायल होना चाहिए।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि एनएसए अवधि समाप्त होने के बाद भी उन्हें डिब्रूगढ़ जेल में रखा जाएगा। अदालत ने ट्रायल और वकीलों से संपर्क के लिए पर्याप्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि खुफिया एजेंसियों के इनपुट के अनुसार अमृतपाल सिंह की रिहाई से कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर राज्य ने अनुरोध किया कि अजनाला कांड से जुड़े विभिन्न मामलों में उनकी हिरासत डिब्रूगढ़ जेल में ही जारी रखने की अनुमति दी जाए। साथ ही ट्रायल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संचालित करने की मांग की गई।
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राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी के दूसरे राज्य में होने की स्थिति में वीसी के माध्यम से ट्रायल संभव है। वहीं अमृतपाल सिंह की ओर से पेश वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इससे जमानत और अन्य कानूनी राहत प्राप्त करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि अमृतपाल सिंह 11 अन्य एफआईआर में भी आरोपी हैं और सभी मामलों में समानांतर ट्रायल होना चाहिए।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि एनएसए अवधि समाप्त होने के बाद भी उन्हें डिब्रूगढ़ जेल में रखा जाएगा। अदालत ने ट्रायल और वकीलों से संपर्क के लिए पर्याप्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।