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अगवा कर हत्या के दोषी आठ पुलिसकर्मियों को उम्रकैद
अमर उजाला, बठिंडा
Updated Tue, 14 Jan 2014 11:03 PM IST
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पंजाब में आतंकवाद के दौरान सेना के आयुध डिपो के एक कर्मचारी का साजिशन अपहरण करके हत्या करने के दोषी पंजाब पुलिस के आठ कर्मचारियों को बठिंडा के एडिशनल सेशन जज एमएस पाहवा की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।
मंगलवार को अदालत ने सभी दोषियों को साजिशन (120-बी), कत्ल (302) करने के दोष में उम्रकैद और दस-दस हजार रुपये जुर्माने और शव खुर्दबुर्द करने (201) के तहत तीन-तीन साल की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। एक अभियुक्त इंस्पेक्टर को अपहरण (364) का दोषी करार देते हुए अदालत ने उसे सात साल की सजा व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इस केस में नामजद मुख्य आरोपी पूर्व डीएसपी गुरजीत सिंह छह साल से भगोड़ा है, जबकि दो आरोपी पुलिस कर्मियों की मौत हो चुकी है। इन सभी पर 1992 में बठिंडा निवासी परमजीत सिंह का अपहरण करके हत्या करने और लाश खुर्दबुर्द करने के आरोप में थाना सदर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज किया गया था।
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बाइस साल बाद मिला पीड़ित परिवार को इंसाफ
17 जुलाई, 1992 को बठिंडा के थाना सदर पुलिस के डीएसपी गुरजीत सिंह, इंस्पेक्टर बरजिंदर कुमार, एएसआई लखवीर सिंह, हेडकांस्टेबल गुरबचन सिंह, पाल सिंह, कांस्टेबल हरिंदर सिंह, मल सिंह, त्रिलोक सिंह, कमलजीत सिंह, होमगार्ड जवान जगसीर सिंह व जरनैल सिंह ने बीबी वाला चौक में स्थित आटा चक्की से परमजीत सिंह को पूछताछ के लिए उठाया था। लेकिन 18 जुलाई, 1992 को ही पुलिस ने परमजीत को भगोड़ा करार दे दिया। कई साल तक जब परमजीत सिंह का कुछ पता नहीं चला तो उनके पिता गुरदित्त सिंह ने हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने इस मामले में पीड़ित परिवार को डेढ़ लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश जारी करते हुए सेशन कोर्ट को इस मामले की जांच करवाने के निर्देश दिए। तत्कालीन सेशन जज केएस ग्रेवाल ने जांच के बाद पूर्व डीएसपी सहित 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ 24 जून 1996 को अपहरण और हत्या का केस दर्ज करने के निर्देश दिए। लेकिन पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस ही दर्ज नहीं किया। पीड़ित परिवार को तब इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 23 जुलाई 1999 को उक्त 11 आरोपी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ थाना सदर में एफआईआर दर्ज की गई।
अदालत में यह केस 15 साल तक चलता रहा। इस दौरान मुख्य आरोपी पूर्व डीएसपी गुरजीत सिंह जिसे संगरूर के गांव शेरपुर निवासी एक युवक की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हो गई थी, पैरोल पर जेल से निकल कर भगोड़ा हो गया। वहीं दो अन्य अभियुक्त पुलिसकर्मी एएसआई लखवीर सिंह और कांस्टेबल मल सिंह की ट्रायल के दौरान ही मौत हो गई। बाकी आठ पुलिसकर्मियों को मंगलवार को सजा सुनाई गई।
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मंगलवार को अदालत ने सभी दोषियों को साजिशन (120-बी), कत्ल (302) करने के दोष में उम्रकैद और दस-दस हजार रुपये जुर्माने और शव खुर्दबुर्द करने (201) के तहत तीन-तीन साल की सजा व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। एक अभियुक्त इंस्पेक्टर को अपहरण (364) का दोषी करार देते हुए अदालत ने उसे सात साल की सजा व दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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इस केस में नामजद मुख्य आरोपी पूर्व डीएसपी गुरजीत सिंह छह साल से भगोड़ा है, जबकि दो आरोपी पुलिस कर्मियों की मौत हो चुकी है। इन सभी पर 1992 में बठिंडा निवासी परमजीत सिंह का अपहरण करके हत्या करने और लाश खुर्दबुर्द करने के आरोप में थाना सदर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज किया गया था।
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बाइस साल बाद मिला पीड़ित परिवार को इंसाफ
17 जुलाई, 1992 को बठिंडा के थाना सदर पुलिस के डीएसपी गुरजीत सिंह, इंस्पेक्टर बरजिंदर कुमार, एएसआई लखवीर सिंह, हेडकांस्टेबल गुरबचन सिंह, पाल सिंह, कांस्टेबल हरिंदर सिंह, मल सिंह, त्रिलोक सिंह, कमलजीत सिंह, होमगार्ड जवान जगसीर सिंह व जरनैल सिंह ने बीबी वाला चौक में स्थित आटा चक्की से परमजीत सिंह को पूछताछ के लिए उठाया था। लेकिन 18 जुलाई, 1992 को ही पुलिस ने परमजीत को भगोड़ा करार दे दिया। कई साल तक जब परमजीत सिंह का कुछ पता नहीं चला तो उनके पिता गुरदित्त सिंह ने हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट ने इस मामले में पीड़ित परिवार को डेढ़ लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश जारी करते हुए सेशन कोर्ट को इस मामले की जांच करवाने के निर्देश दिए। तत्कालीन सेशन जज केएस ग्रेवाल ने जांच के बाद पूर्व डीएसपी सहित 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ 24 जून 1996 को अपहरण और हत्या का केस दर्ज करने के निर्देश दिए। लेकिन पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस ही दर्ज नहीं किया। पीड़ित परिवार को तब इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 23 जुलाई 1999 को उक्त 11 आरोपी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ थाना सदर में एफआईआर दर्ज की गई।
अदालत में यह केस 15 साल तक चलता रहा। इस दौरान मुख्य आरोपी पूर्व डीएसपी गुरजीत सिंह जिसे संगरूर के गांव शेरपुर निवासी एक युवक की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हो गई थी, पैरोल पर जेल से निकल कर भगोड़ा हो गया। वहीं दो अन्य अभियुक्त पुलिसकर्मी एएसआई लखवीर सिंह और कांस्टेबल मल सिंह की ट्रायल के दौरान ही मौत हो गई। बाकी आठ पुलिसकर्मियों को मंगलवार को सजा सुनाई गई।