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Amritsar News: डॉ. ओबेरॉय के प्रयासों से फांसी से बचा युवक सुखवीर रिहाई के बाद अपने वतन लौटा

Mon, 17 Jun 2024 11:00 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर Updated Mon, 17 Jun 2024 11:00 PM IST
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Youth Sukhveer, who was saved from hanging due to the efforts of Dr. Oberoi, returned to his country after release
एयरपोर्ट पर 9 वर्षों बाद हुए मां-बेटे के मिलन ने हर किसी की आंखें कर दी नम
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संवाद न्यूज एजेंसीअमृतसर। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर देश-विदेश में जरूरतमंदों की सेवा की नई मिसालें कायम कर रहे दुबई के प्रसिद्ध कारोबारी और सरबत का भला चैरिटेबल ट्रस्ट के सरपरस्त डॉ. एसपी सिंह ओबरॉय के प्रयासों से युवक सुखवीर सिंह वापस वतन लौट आया है। तीन भारतीय युवकों की दुबई में फांसी की सजा माफ होने के बाद लुधियाना जिले से संबंधित युवक सुखवीर सिंह पुत्र लछमन सिंह सोमवार अमृतसर एयरपोर्ट पहुंचा। मौत के मुंह से बचकर निकले बुजुर्ग माता-पिता के इकलौते बेटे सुखवीर और उनकी बुजुर्ग मां के 9 वर्ष बाद हवाई अड्डे पर हुए मिलन दौरान जब दोनों मां-बेटे रोते हुए एक-दूसरे से गले लगकर मिले तो एक बार ऐसा महसूस हुआ जैसे समय रुक गया हो।

डॉ. ओबेरॉय ने बताया कि वर्ष 2018 दुबई में तीन पंजाबी युवक जिनमें सुखवीर सिंह, गुरप्रीत सिंह पुत्र बलविंदर सिंह निवासी जिला अमृतसर और जतिंदर कुमार पुत्र जसवीर कुमार निवासी बंगा, सूडान देश से संबंधित एक युवक की हत्या के मामले में पकड़े गए थे और अदालत ने उक्त तीनों युवकों को 25-25 वर्ष की सजा सुना दी थी। उन्होंने बताया कि इस सजा के बाद उपरोक्त युवकों द्वारा की गई अपील पर अदालत ने सख्त रवैया अपनाते हुए 25-25 वर्ष की सजा को फांसी में तब्दील कर दिया। इसके बाद उक्त युवकों के परिवारों ने उनसे संपर्क करके मदद की अपील की।
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डॉ. ओबेरॉय ने बताया कि उनकी टीम ने पीड़ित परिवारों के साथ मिलकर सूडान से संबंधित मृतक युवक के परिवार को ढूंढने की बहुत कोशिश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली, इस कारण सभी ने इस मामले को सुलझाने की उम्मीद छोड़ दी थी। उन्होंने बताया कि मगर कुदरत ने ऐसा करिश्मा किया कि उनकी सलाह के मुताबिक ईद के मौके पर परिवार द्वारा दोबारा की गई रहम की अपील पर कोर्ट ने उक्त तीनों युवकों की सजा माफ कर दी। उन्होंने बताया कि यह एक विशेष मामला था, जिसमें मरने वाले युवक के परिवार को ब्लड मनी नहीं दी गई। डॉ. ओबरॉय के मुताबिक इस मामले से जुड़े दो युवक पहले ही अपने घर पहुंच चुके हैं, जबकि सुखवीर भी घर लौट आया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में उन्होंने समय-समय पर पीड़ित परिवारों को जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करने के अलावा हर पक्ष से सहयोग किया। उन्होंने बताया कि सोमवार को वतन लौटे सुखवीर की हवाई टिकट भी उसके परिवार की मांग पर उन्होंने ही खरीद कर दी है।
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अमृतसर के श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अपने बेटे को लेने पहुंची उसकी बुजुर्ग मां कुलदीप कौर, बुआ जसवंत कौर, फूफा हरजिंदर सिंह, जीजा अमनदीप सिंह और सिमरदीप सिंह ने खुशी के आंसुओं से जहां सुखवीर का स्वागत किया, वहीं एसपी सिंह ओबरॉय का विशेष आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उनके लिए डाॅ. ओबेरॉय किसी ईश्वर के फरिश्ते से कम नहीं हैं। सुखवीर की मां ने भावुक होते कहा कि डॉ. ओबरॉय ने मेरे बेटे को मौत के मुंह से निकालकर मेरी झोली में डाला है, ईश्वर मेरी आयु भी उसको लगा दे।

मौत की सजा से बचकर सुखवीर ने रोते हुए बताया कि वह 2015 में रोजगार के लिए दुबई गया था और 2018 में वह एक हत्या के मामले में फंस गया। सुखवीर अनुसार वह निर्दोष था और उसे समझ नहीं आया कि उसके साथ यह सब कैसे हो गया। उसने कहा कि डाॅ. ओबेरॉय का उपकार नहीं भूल सकते, वह खाड़ी देशों में फंसे सैकड़ों लोगों के लिए ईश्वर का अवतार हैं।
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