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Amritsar News: अमृतसर में विश्व प्रसिद्ध लंगूर मेले का आगाज

Sun, 11 Oct 2026 06:13 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर Updated Sun, 11 Oct 2026 06:13 PM IST
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World-famous Langur Fair begins in Amritsar.
संतान प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर बड़े हनुमान मंदिर में उमड़े श्रद्धालु
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आस्था के रंग में रंगे, बच्चों ने पहना लंगूर का बाना
संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर श्री दुर्ग्याणा तीर्थ स्थित श्री बड़ा हनुमान मंदिर में रविवार को लंगूर मेले का शुभारंभ हुआ। मेले के पहले दिन मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का अनूठा नजारा दिखा। पंजाब, अन्य राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालु इस धार्मिक परंपरा में शामिल होने अमृतसर पहुंच रहे हैं।
छोटे बच्चे लाल और सुनहरी पोशाक, मुकुट व छड़ी के साथ लंगूर के स्वरूप में मंदिर आए। परिजन के साथ आए इन बच्चों से मंदिर बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर परिसर में बच्चों की टोलियां आकर्षण का केंद्र रहीं। यह मेला संतान प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर आभार व्यक्त करने की विशेष परंपरा है। कई परिवार बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। वे भी इस परंपरा में शामिल होते हैं। श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर बच्चे को लंगूर का स्वरूप धारण करवाकर मंदिर में हाजिरी लगाते हैं। पीढ़ियों से परिवार इस आस्था का निर्वहन करते आ रहे हैं।
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संतान प्राप्ति की मन्नत से जुड़ी परंपरा :
श्री दुर्ग्याणा तीर्थ के बड़े हनुमान मंदिर में लंगूर मेले की विशेष धार्मिक महत्ता है। मान्यता है कि संतान प्राप्ति की मनोकामना पूरी होने पर दंपती अपने बच्चे को लंगूर का बाना पहनाते हैं। वे श्री हनुमान जी के दरबार में माथा टेकने आते हैं। यह बजरंगबली के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है। बच्चे मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं और आशीर्वाद लेते हैं।
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दस दिनों तक निभानी होती है धार्मिक मर्यादा
लंगूर मेले में शामिल बच्चों व परिजन को निर्धारित धार्मिक नियमों का पालन करना होता है। लंगूर का बाना धारण करने के बाद बच्चे नवरात्र के दौरान नियमित रूप से मंदिर आते हैं। इस अवधि में सात्विक दिनचर्या, खानपान में परहेज और धार्मिक मर्यादाओं का पालन होता है। श्रद्धालु नंगे पांव रहते हैं, जमीन पर सोते हैं और प्याज-लहसुन से परहेज करते हैं। यह परंपरा शारदीय नवरात्र से शुरू होकर विजयादशमी तक चलती है।
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