पंजाबः धरने पर बैठे अमृतसर रेल हादसे के पीड़ित, बोले- नवजोत सिद्धू ने पूरे नहीं किए वादे
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एक साल पहले दशहरे पर जौड़ा फाटक रेल हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों ने सोमवार को पंजाब सरकार की तरफ से उनकी मांगें न पूरी करने के विरोध में भंडारी पुल पर अनिश्चितकाल के लिए धरना लगा दिया। मृतकों के परिजन हाथों में बैनर उठाकर न्याय की मांग कर रहे थे। पीड़ित परिजनों ने कहा कि तत्कालीन मंत्री नवजोत सिद्धू ने हादसे के बाद उनसे जो वादे किए थे, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह उन वादों को पूरा करें।
सिद्धू ने वादा किया था कि सभी परिवारों के एक-एक सदस्य को नगर निगम में नौकरी मिलेगी। जिन परिवारों में छोटे बच्चे हैं, उनकी पढ़ाई का खर्च पंजाब सरकार वहन करेगी। सिद्धू ने कुछ परिवारों के बच्चों को गोद लेने का वादा भी किया था लेकिन कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया। धरने में ऐसे लोग भी बैठे थे, जिनके परिवार के सदस्य की हादसे में मौत हो गई थी, लेकिन उन्हें पंजाब सरकार द्वारा जारी की गई पांच लाख की मदद नहीं मिल पाई।
धरने पर बैठे राजेश कुमार ने बताया कि उनके पिता बलदेव राज इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। निजी अस्पताल में उनका इलाज चला। चार महीने बाद उनकी मौत हो गई लेकिन परिवार को अभी तक मदद की एक फूटी कौड़ी नहीं मिली। धरने की अगुवाई कर रहे पीड़ित परिवार के नौजवान सुरिंदर कुमार ने बताया कि जब पिछली बार धरना दिया गया था तो एसडीएम के आश्वासन के बाद धरना उठा लिया गया था। दो अक्तूबर को जब पीड़ित परिवारों ने धरना दिया था तब एसडीएम ने विश्वास दिलाया था कि 22 अक्तूबर तक सभी मांगें स्वीकार कर ली जाएंगी।
तारीख निकल जाने के बाद जब वे दोबारा एसडीएम से मिले तो उन्होंने यह कहा कि आपको नौकरी का वादा किसने किया था, उसका प्रूफ लाओ। जब मीडिया में छपे सिद्धू के बयान पढ़ाए गए तब एसडीएम ने कहा कि आपको नौकरी देने का कैंप लगाया जा रहा है। जबकि सरकर ने अभी तक किसी भी कैंप का आयोजन नहीं किया।
इसके बाद पीड़ित परिवारों से कहा गया कि श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के समारोहों की व्यस्तता के कारण ऐसा संभव नहीं है। प्रकाश पर्व के समारोह को एक महीने का समय हो गया है, लेकिन सरकार उनकी कोई सुध नहीं ले रही। उसके बाद अधिकारियों ने 3 दिसंबर का समय दिया। यह दिन भी बीत गया लेकिन उनकी मांगें स्वीकार नहीं की गई। इसलिए अब उन्होंने निर्णय किया है कि जब तक नौकरी नहीं मिलेगी तब तक धरना नहीं उठाया जाएगा।
सिद्धू ने अपना कोई भी वादा नहीं किया पूरा
इस दौरान धरने में मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री व नवजोत सिद्धू के बीच जो राजनीतिक झगड़ा चल रहा है, उस कारण उनकी मांगे स्वीकार नहीं हो रही है। दोनों अपना झगड़ा राजनीति तक सीमित रखें। उनसे जो वादे किए हैं, उनको पूरा किया जाए। उन्होंने गुरुनगरी की सभी संस्थाओं से अपील की कि वह उनका साथ दे। ताकि सरकार पर मांगे स्वीकार करने का दवाब डाला जा सके। उन्होंने कहा कि नवजोत सिद्धू ने हरेक परिवार को मासिक राशन देने व बच्चों को गोद लेने का वादा किया था लेकिन कभी पीड़ित परिवारों का हाल तक नहीं जाना।