फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Amritsar News ›   Swaraj Ashram located at Chattiwind Road in Amritsar has lost its existence, the government should restore it

अमृतसर के चाटीविंड रोड स्थित स्वराज आश्रम खो चुका अस्तित्व, सरकार करे फिर स्थापित

Tue, 22 Mar 2022 10:06 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Tue, 22 Mar 2022 10:06 PM IST
विज्ञापन
Swaraj Ashram located at Chattiwind Road in Amritsar has lost its existence, the government should restore it
अमृतसर। शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उनके साथियों ने अपने क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत अमृतसर स्थित जिस स्वराज आश्रम से की थी, आज वह विलुप्त हो चुका है। अमृतसर और विशेष तौर पर देश भक्तों के जीवन से संबंधित कुछ एक चुनिंदा किताबों के अलावा उक्त आश्रम की जानकारी कहीं भी नहीं मिलती। न ही स्थानीय प्रशासन या किसी अन्य विभाग के पास स्वराज आश्रम के अस्तित्व से संबंधित कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
विज्ञापन

अमृतसर के साथ संबंधित एतिहासिक दस्तावेजों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक नौजवान क्रांतिकारियों में देश भक्ति की भावना प्रचंड करने के उद्देश्य से स्वराज आश्रम की स्थापना जनवरी 1921 में हुई थी। इसकी स्थापना राष्ट्रीय स्तर के नेता डा. सैफ-उद्दीन किचलु के नेतृत्व में स्थानीय चाटीविंड दरवाजे के बाहर की गई। इस आश्रम को खोलने का फैसला वर्ष 1919 में कांग्रेस के इजलास के दौरान लिया गया था। इस इजलास में पंडित मोती लाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना, मदन मोहन मालवीया, श्रीनिवास शास्त्री और ऐनी बसेंट ने विशेष तौर पर हिस्सा लिया था।
विज्ञापन

इस आश्रम में नौजवान क्रांतिकारियों को इंकलाब के जरिये देश में साम्राज्यवाद खत्म करने की ट्रेनिंग लेने वाले शुरुआती नौजवानों में भगत सिंह भी शामिल थे। शहडा. किचलु सैफ-उद्दीन किचलु की जेल यात्राओं के दौरान आश्रम की चेयरपर्सन की जिम्मेदारी उनकी पत्नी शहादत बानो किचलु की ओर से निभाई जाती रही। जो उस समय की प्रसिद्ध लेखक और कवियित्री के रूप में जानी जाती थी। यह भी पता चला है कि 24 फरवरी 1921 को जब महात्मा गांधी और मौलाना अब्दुल कलाम आजाद अमृतसर आए तो उन्होंने ने भी कुछ दिन इस स्वराज आश्रम में बिताए।
विज्ञापन
विज्ञापन

13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने भगत सिंह की सोच ही बदल दी। जलियांवाला बाग हत्याकांड के वक्त ने 12 साल के थे। हत्याकांड की सूचना पाकर भगत सिंह अपने स्कूल से पैदल चलकर जलियांवाला बाग पहुंचे। इस कांड ने भगत सिंह की सोच पर गहरा प्रभाव डाला और उन्होंने लाहौर के नेशनल कालेज की पढ़ाई छोड़ कर भारत की आजादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की। लाला लाजपत राय की मौत के बाद साल 1928 में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव सिंह ने लाहौर में अंग्रेज अधिकारी सांडर्स की गोलियां मारकर हत्या कर दी। पुलिस इनके पीछे लग गई तो वे भेष बदल कर साथी सुखदेव और दुर्गा भाभी के साथ लाहौर से सीधे यहां पहुंचे और 12 मकानां में एक रात बिताई और अपनी रणनीति को अंजाम दिया।

वहीं जामिया मीलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी, दिल्ली के नौजवान शोधकर्ता आशीष कोछड़ कहते हैं कि देश भक्तों की निशानियां ही हमारी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्त्रोत रहीं है, जो आजकल विलुप्त होती जा रहीं हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को शहीद भगत सिंह से जुड़े स्वराज आश्रम सहित अन्य निशानियों को शोधकर्ताओं की मदद से दोबारा पुनर्जीवित करना चाहिए, ताकि हमारे देश की नौजवान पीढ़ी इससे सीख लेकर देश भक्ति की प्रेरणा ले सके। (संवाद)
- फोटो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed