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दुबई से भारत लाया गया सुखबीर और गुरप्रीत का शव
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अमृतसर। बटाला के गांव उग्रेवाल के 22 वर्षीय सुखबीर सिंह और पटियाला के राजपुरा के गांव गोपालपुरा के 25 वर्षीय गुरप्रीत सिंह का शव वीरवार को दुबई से भारत लाया गया। सरबत दा भला ट्रस्ट के संस्थापक डा. एसपीएस ओबराय के प्रयासों के बाद दोनों पंजाबी युवकों के शव दुबई से श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट लाए गए। दोनों की 25 दिन पहले दुबई में अलग-अलग स्थानों पर मौत हो गई थी और इनके परिजनों ने ट्रस्ट से शव भारत लाए जाने की गुहार लगाई थी।
डा. ओबराय ने बताया कि बटाला के सुखबीर सिंह के जन्म के छह माह बाद ही सिर से पिता का साया उठ गया था। विधवा मां ने मेहनत मजदूरी करके उसे पाला और बड़ा किया। वह मां को गरीबी से बाहर निकालने के लिए मेहनत मजदूरी करने दुबई चला गया, जहां ड्राइवर के साथ एक हेल्पर के तौर पर काम करता था। इस दौरान 6 मार्च को अचानक दुबई में उसकी मौत हो गई और शव समुद्र के किनारे मिला।
उन्होंने बताया कि इसी तरह पटियाला के राजपुरा तहसील के गांव गोपालपुरा का गुरप्रीत सिंह भी मेहनत मजदूरी कर परिवार को आर्थिक तंगी से निजात दिलाने के लिए दुबई गया था। गुरप्रीत की 7 मार्च को अचानक दुबई में मौत हो गई थी। इसके बाद दोनों मृतकों के परिजनों ने ट्रस्ट की लोकल इकाई से संपर्क कर शव भारत लाने की गुहार लगाई थी। जिसके बाद उन्होंने निजी सचिव बलदीप सिंह चाहल के जरिये दोनों शव भारत लाने संबंधी भारत के दूतावास की कार्रवाई पूरी की और शव दुबई से भारत लाया जा सका।
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उन्होंने बताया कि अगले कुछ समय के दौरान 8 से 10 बदनसीब युवाओं के शव भारत लाए जाएंगे। इसके लिए उनके निजी सचिव भारतीय दूतावास के साथ औपचारिकता की कार्यवाही की जा रही है। अमृतसर टीम के पदाधिकारी सुखजिंदर सिंह हेर, मनप्रीत सिंह संधू, नवजीत घई और हरजिंदर सिंह हेर ने अमृतसर एयरपोर्ट पर सुखबीर और गुरप्रीत का शव लेने पहुंचे पीड़ित परिवारों के साथ संवेदना व्यक्त की और उन्हें दुबई से लाए गए शव सौंपे। इस अवसर पर पीड़ित परिवारों ने ट्रस्ट के संस्थापक का धन्यवाद किया।
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डा. ओबराय ने बताया कि बटाला के सुखबीर सिंह के जन्म के छह माह बाद ही सिर से पिता का साया उठ गया था। विधवा मां ने मेहनत मजदूरी करके उसे पाला और बड़ा किया। वह मां को गरीबी से बाहर निकालने के लिए मेहनत मजदूरी करने दुबई चला गया, जहां ड्राइवर के साथ एक हेल्पर के तौर पर काम करता था। इस दौरान 6 मार्च को अचानक दुबई में उसकी मौत हो गई और शव समुद्र के किनारे मिला।
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उन्होंने बताया कि इसी तरह पटियाला के राजपुरा तहसील के गांव गोपालपुरा का गुरप्रीत सिंह भी मेहनत मजदूरी कर परिवार को आर्थिक तंगी से निजात दिलाने के लिए दुबई गया था। गुरप्रीत की 7 मार्च को अचानक दुबई में मौत हो गई थी। इसके बाद दोनों मृतकों के परिजनों ने ट्रस्ट की लोकल इकाई से संपर्क कर शव भारत लाने की गुहार लगाई थी। जिसके बाद उन्होंने निजी सचिव बलदीप सिंह चाहल के जरिये दोनों शव भारत लाने संबंधी भारत के दूतावास की कार्रवाई पूरी की और शव दुबई से भारत लाया जा सका।
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उन्होंने बताया कि अगले कुछ समय के दौरान 8 से 10 बदनसीब युवाओं के शव भारत लाए जाएंगे। इसके लिए उनके निजी सचिव भारतीय दूतावास के साथ औपचारिकता की कार्यवाही की जा रही है। अमृतसर टीम के पदाधिकारी सुखजिंदर सिंह हेर, मनप्रीत सिंह संधू, नवजीत घई और हरजिंदर सिंह हेर ने अमृतसर एयरपोर्ट पर सुखबीर और गुरप्रीत का शव लेने पहुंचे पीड़ित परिवारों के साथ संवेदना व्यक्त की और उन्हें दुबई से लाए गए शव सौंपे। इस अवसर पर पीड़ित परिवारों ने ट्रस्ट के संस्थापक का धन्यवाद किया।