संगरूर-कपूरथला समेत कई जिलों में पिछली बार से ज्यादा जली पराली, कई जगह दिखा सुधार
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पंजाब सरकार की सख्ती के बावजूद राज्य के कई जिलों में पिछले साल के मुकाबले ज्यादा पराली जली। इनमें संगरूर, कपूरथला, गुरदासपुर और बठिंडा प्रमुख रहे। कई जिलों में पराली जलाने के मामलों में कमी भी आई है। इसका कारण सरकार के जागरूकता कार्यक्रम और अफसरों की सख्ती है। इस बार अफसरों ने पराली जलाने वाले किसानों के चालान काटे और उन पर मामले दर्ज किए। इसके अलावा ऐसे किसानों की सब तरह की सब्सिडी बंद कर दी गई। यही नहीं, सरकार ने धान की पराली न जलाने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 2500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया।
बठिंडा में प्रदूषण बोर्ड ने 1956 चलान काटे
पिछली बार के मुकाबले इस बार पराली जलाने के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि इस बारे में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड अधिकारियों के पास पुख्ता डिटेल नहीं है। लेकिन बोर्ड अधिकारी विजय गुप्ता के अनुसार सेटेलाइट के जरिये जिले में 5800 साइट की निशानदेही की गई। जहां पराली जलाने के मामले सामने
पिछली बार यह आंकड़ा 5342 का था। उन्होंने बताया कि इस बार पिछली बार से ज्यादा साइटों पर चलान काटे गए हैं। पिछली बार प्रदूषण बोर्ड ने 500 तो इस बार 1956 साइटों पर पराली जलाने के आरोप में किसानों के चलान काटे हैं। पराली न जलाने वाले किसानों को मिलने वाली मुआवजा राशि संबंधी जिला कृषि अफसर डॉक्टर गुरादित्ता सिंह ने बताया कि यह आंकड़ा उनके पास मौजूद नहीं है।
इस बारे में जिला विकास पंचायत अधिकारी ही बता सकते हैं। जब जिला विकास पंचायत अधिकारी हरजिंदर सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। किसान नेता शिंगारा सिंह का कहना था कि किसानों को अभी तक कोई मुआवजा राशि नहीं मिली। इसके अलावा किसान 200 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
गुरदासपुर में कुल 1436 केस आए सामने
मुख्य खेतीबाड़ी अफसर डा. हररतन सिंह सैनी के अनुसार गुरदासपुर में कुल रकबा 1.73 लाख हेक्टेयर है, जिसमें पिछले साल 1150 के करीब मामले सामने आए थे, जबकि इस बार 1436 मामले सामने आए हैं। गुरदासपुर में 839 चालान काटे गए हैं। पुलिस जिला गुरदासपुर में एसपी (डी) हरविंदर सिंह के अनुसार कुल 21 एफआईआर दर्ज की गई हैं। जबकि डीसी गुरदासपुर तेंजिदरपाल सिंह संधू ने बताया कि अभी तक जिला गुरदासपुर में कोई मुआवजा जारी नहीं किया गया। मुआवजे संबंधी प्रक्रिया चल रही है, जिसके लिए आवेदन भरे जा रहे हैं।
पराली जलाने वालों खिलाफ 77 केस दर्ज, 1889 को 50.92 लाख का जुर्माना
पटियाला जिले में पराली जलाने वालों के खिलाफ धारा 188 तहत 77 मामले दर्ज किए गए हैं। जबकि एयर एक्ट 1981 के सेक्शन 39 तहत 10 के खिलाफ केस चलाया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक 1889 पराली जलाने वालों को 50 लाख 92 हजार 500 रुपये जुर्माना लगाया गया है। जबकि पराली जलाने वाली 28 पंचायती जमीनों की पहचान की गई है और एक नंबरदार भी पराली जलाने के मामले में लिप्त पाया गया है। इन सभी के खिलाफ नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है। डीसी कुमार अमित ने बताया कि पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने बिना सुपर एसएमएस वाली हारवेस्टिंग कंबाइनों को जब्त करके 20 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है।
बरनाला में 87 एफआईआर और 19 लाख जुर्माना
डीसी तेज प्रताप सिंह फूलका ने कहा कि पराली जलाने के जिले में कुल 761 मामले दर्ज किए। जिनमें से 521 किसानों की फर्दों पर लाल लकीर लगाई गई है। 87 किसानों पर एफआईआर दर्ज की गईं हैं। डीसी ने स्पष्ट तौर पर बताया कि पहले से न तो पराली जलाने के केस घटे हैं और न ही पहले से प्रदूषण कम हुआ है।
डीसी ने कहा कि पराली जलाने न जलाने संबंधी चलाए अभियान के दौरान किसानों में जागरूकता जरूर पैदा हुई है। जिसका अगले वर्षों में लाभ होने वाला है, क्योंकि किसान जागरूक हो चुके हैं और वह पराली न जलाने का समाधान आसानी से मिलने के बाद पराली जलाना जरूर बंद कर देंगे। इसलिए सरकार की हिदायतों पर जिला प्रशासन को लगातार जागरूकता अभियान जारी रखना चाहिए।
फरीदकोट जिले में 700 स्थानों पर पराली जलाई
फरीदकोट जिले में इस साल करीब 700 स्थानों पर पराली जलाई गई, जो पिछले साल से मुकाबले कुछ कम है। इस साल करीब 500 किसानों के चालान काटे गए हैं और 17 लाख का जुर्माना किया गया। पराली न जलाने के एवज में मुआवजा लेने के लिए जिले के करीब 2900 किसानों से ऑनलाइन आवेदन भरे हैं, जिनका वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
मुक्तसर में किसानों पर 30 लाख जुर्माना किया
मुक्तसर जिले में इस साल 3567 स्थानों पर पराली जलाई गई, जोकि पिछले साल के लगभग बराबर है। पराली जलाने के मामले में 1297 चालान काटे गए हैं और किसानों पर 30 लाख रुपये का जुर्माना किया गया है। मुक्तसर में अभी पराली न जलाने वाले किसानों को मुआवजा बांटने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
फाजिल्का में पराली कम जली, केस अधिक दर्ज हुए
पराली जलाने के बारे में फाजिल्का जिले के किसान इस बार काफी जागरूक दिखाई दिए और इसी कारण पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष पराली कम जली, लेकिन पर्चे अधिक किसानों पर हुए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार जिले में अब तक करीब 30 किसानों पर मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि गत वर्ष नाम मात्र ही थे।
पर्चे अधिक होने से किसानों में इसका भय है। वहीं अधिकतर किसान जागरूक भी हुए हैं। क्योंकि अब किसानों को इस बात का तजुर्बा हो गया है कि पराली में आग लगाए बिना भी अगली फसल का बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। वहीं सरकार की ओर से मिलने वाले मुआवजे से किसान संतुष्ट नहीं हैं। किसानों का कहना है कि सरकार की योजना का ऐसे लोगों ने फायदा उठाया, जिनके पास न तो खेत हैं और न हीं वे खेती करते हैं। जबकि सही किसानों को मुआवजा नहीं मिला।
कपूरथला में इस बार दोगुनी जली पराली
जिले में इस बार पराली जलाने के मामले दोगुने सामने आए। पिछले साल की तुलना तो इस बार पराली जलाने में किसानों ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 1341 पराली जलाने के केस चिह्नित किए गए। ऐसा करने वालों में 134 किसानों के चालान काटे गए, जिनसे विभाग ने 3 लाख 35 हजार 400 रुपये जुर्माने के तौर पर वसूले और 20 किसानों पर एफआईआर दर्ज कराई गई।
इसके अलावा 131 किसानों के राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। विभाग के अनुसार पिछले साल पराली जलाने का आंकड़ा लगभग 690 था। डिप्टी रजिस्ट्रार कपूरथला सरबजीत कौर के अनुसार पराली न जलाने वाले किसानों के आवेदन आने शुरू हुए हैं। फिलहाल आंकड़ा महज 40 है। आगामी दिनों में आंकड़े बढ़ने की उम्मीद है। उनके अनुसार जिले में अभी तक किसी भी किसान को मुआवजा नहीं दिया गया है।
पठानकोट पराली जलाने के केवल 2 मामले
पराली न जलाकर पठानकोट के किसान सूबे भर के किसानों के लिए मिसाल बन रहे हैं। सरकार ने लगातार चौथे साल पठानकोट को प्रदूषण रहित जिले की उपाधि से नवाजा है। पठानकोट में 2018 के दौरान पराली जलाने के 9 मामले सामने आए थे, लेकिन इस बार केवल 2 पराली जलने के मामले सामने आए, जिन गांवों में आग लगाई गई, उन किसानों पर मामले दर्ज किए गए। जबकि एक सरपंच को ही सस्पेंड कर दिया गया।
पठानकोट में 27 हजार हेक्टेयर में धान की काश्त की जाती है। जिससे लगभग 80 हजार मीट्रिक टन धान की पैदावार के साथ 1.5 लाख मीट्रिक टन पराली भी पैदा होती है। पठानकोट के किसानों ने जलाने के बजाय पराली गुज्जर भाईचारे को बेची। 4200 रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पराली बेच किसानों ने 112 करोड़ 8 लाख 75 हजार रुपये भी कमाए हैं।
लुधियाना में 163 एफआईआर दर्ज हुई
इस साल पराली जलाने की घटनाएं बीते साल के मुकाबले कम हुईं। 2018-19 में जिले में 2470 जगह पर पराली जलाने के मामले सेटेलाइट के माध्यम से पकड़े गए थे। वहीं इस बार यह आंकड़ा कम होकर 2440 रह गया है। इस साल विभिन्न विभागों में पराली जलाने पर 789 चालान किसानों को जारी किए है। जिन्हें वातावरण को दूषित करने के लिए 28 लाख 77 हजार 550 रुपये जुर्माना लगाया गया है। इसी तरह 757 किसानों के रेवन्यू रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। भविष्य में रेड एंट्री वाले मामलों में कुछ कार्रवाई करनी हुई तो इससे आसानी होगी। पराली जलाने पर लुधियाना में इस बार 163 एफआईआर को दर्ज की गई है।
संगरूर में 102 किसानों पर मामले हुए दर्ज
राज्य सरकार व प्रशासन के आदेश को दरकिनार करते हुए किसानों ने इस बार पिछले साल से भी ज्यादा धान की पराली को आग लगाई। जिला प्रशासन की तरफ से पराली को आग लगाने से रोकने के लिए तैनात की चौकसी टीमों ने 5737 जगह का जायजा लिया और पराली को आग लगाने वाले 102 किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। इस बार जिला प्रशासन ने किसानों के साथ-साथ पराली जलाने वाले तीन नंबरदारों को भी मुअत्तल किया है। इनमें गांव राणवां के नंबरदार अजमेर सिंह, गांव नारीके के नंबरदार कुलवीर सिंह और गांव धलेर कलां के नंबरदार सरबजीत सिंह शामिल हैं।