{"_id":"5f539aa18ebc3e61571a85c8","slug":"sgpc-will-not-register-criminal-cases-against-its-officers-and-employees-in-amritsar-amritsar-news-pkl3869057138","type":"story","status":"publish","title_hn":"अपने अधिकारियों-कर्मचारियों पर आपराधिक केस दर्ज नहीं करवाएगी एसजीपीसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अपने अधिकारियों-कर्मचारियों पर आपराधिक केस दर्ज नहीं करवाएगी एसजीपीसी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने लापता 328 पावन स्वरूपों के मामले के आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई की घोषणा के आठ दिन बाद ही अपना फैसला पलट दिया। एसजीपीसी की कार्यकारिणी की बैठक में अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने इन कर्मचारियों पर आपराधिक मामले दर्ज करने के दावों से पीछे हटते हुए कहा कि इनके विरुद्ध पंथक परंपराओं के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। एसजीपीसी इन कर्मचारियों और अधिकारियों को गुरुद्वारा एक्ट के अंतर्गत सख्त सजा देने में समर्थ है। इस धार्मिक अपराध पर बाहरी लोग आकर सजा दें, इस बात को एसजीपीसी अस्वीकार करती है। श्री अकाल तख्त साहिब ने जो जांच रिपोर्ट एसजीपीसी को सौंपी है, उसके आधार पर सख्त कार्रवाई की गई है। किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं गया है। एसजीपीसी श्री हरमंदिर साहिब के कामकाज में दखल सहन नहीं करेगी और न ही ऐसा करने के लिए किसी को आज्ञा दी गई है। लौंगोवाल ने लापता पावन स्वरूपों की जांच कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हुए कहा कि जल्द ही इस रिपोर्ट को एसजीपीसी की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा, ताकि संगत तक इस मामले की जानकारी पहुंच सके। जांच रिपोर्ट में जो भी कमियां हैं, उसे दूर कर आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।
लापता पावन स्वरूप कहां गए, पावन स्वरूप इस समय कहां है, पंथक संगठनों के इन सवालों में घिरे लौंगोवाल ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप कहीं नहीं गए न ही कोई बेअदबी हुई है। कुछ कर्मचारियों ने नियमों का पालन न करते हुए लालच में आ कर प्राप्त हुई भेंटा राशि को रिकॉर्ड में नहीं रखा। जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। इस कारण संगत में दुर्भाग्यपूर्ण चर्चा चल रही है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण खालसा पंथ को पीड़ा से गुजरना पड़ रहा है। एसजीपीसी देश विदेश में बसे सिख विद्वानों व चिंतकों द्वारा इस संदर्भ में रखे विचारों पर अमल करेगी। कुछ सिख संगठन इस मामले पर निचले स्तर की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने एसजीपीसी के कर्मचारियों द्वारा पावन स्वरूपों के मामले में हुई अनियमितताओं के लिए संगत से माफी भी मांगी।
18 सितंबर को अकाल तख्त में करेंगे क्षमा याचना की अरदास
लौंगोवाल ने कहा कि शनिवार को हुई कार्यकारिणी की बैठक में इस बात का फैसला किया गया है कि एसजीपीसी के असभ्य पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्य 18 सितंबर को श्री अकाल तख्त साहिब में क्षमा याचना की अरदास करेंगे। जांच कमेटी के सामने जितने भी कर्मचारी और अधिकारी पेश हुए हैं, उन्हें भी इसी दिन श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होकर अपनी गलती की माफी मांगनी चाहिए। लौंगोवाल ने दावा किया कि जांच रिपोर्ट में प्रबंधकीय कमियों के बारे में जो लिखा गया है, उसे ठीक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
विज्ञापन
सीए कोहली से वसूली होगी या नहीं, अभी स्पष्ट नहीं
लौंगोवाल ने आरोपियों को कानूनी कटघरे में खड़ा करने के लिए एक तीन सदस्यीय वकीलों के पैनल की एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में एसजीपीसी सदस्य वकील भगवंत सिंह स्यालका, पूर्व जिला अटार्नी एडवोकेट बलतेज सिंह ढिल्लों और एडवोकेट महिंद्र सिंह गिल को शामिल किया गया था। कमेटी की अगुवाई एसजीपीसी के महासचिव हरजिंदर सिंह धामी ने करनी थी। क्या इस कमेटी का वजूद खत्म हो गया, इस बारे में अध्यक्ष कोई भी उत्तर नहीं दे सके। सभी आरोपियों को पंथक परंपराओं के अनुसार सजा देने के फैसले के बाद क्या सीए एसएस कोहली से कुल भुगतान का 75 फीसदी वसूला जाएगा, यह भी अभी स्पष्ट नहीं किया गया। एसजीपीसी ने कोहली को 10 करोड़ की राशि का भुगतान किया हुआ है।
आरोपियों को मिले फांसी की सजा : तिलोकेवाला
एसजीपीसी की पूर्व कार्यकारिणी के सदस्य बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला ने मांग की है कि लापता पावन स्वरूपों के मामले की जांच रिपोर्ट में आरोपी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसजीपीसी के छोटे कर्मचारियों को आरोपी ठहरा दिया गया। बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जब तक पावन स्वरूप मिल नहीं जाते तब तक संगत का विरोध जारी रहेगा।
विज्ञापन
लापता पावन स्वरूप कहां गए, पावन स्वरूप इस समय कहां है, पंथक संगठनों के इन सवालों में घिरे लौंगोवाल ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप कहीं नहीं गए न ही कोई बेअदबी हुई है। कुछ कर्मचारियों ने नियमों का पालन न करते हुए लालच में आ कर प्राप्त हुई भेंटा राशि को रिकॉर्ड में नहीं रखा। जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। इस कारण संगत में दुर्भाग्यपूर्ण चर्चा चल रही है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारण खालसा पंथ को पीड़ा से गुजरना पड़ रहा है। एसजीपीसी देश विदेश में बसे सिख विद्वानों व चिंतकों द्वारा इस संदर्भ में रखे विचारों पर अमल करेगी। कुछ सिख संगठन इस मामले पर निचले स्तर की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने एसजीपीसी के कर्मचारियों द्वारा पावन स्वरूपों के मामले में हुई अनियमितताओं के लिए संगत से माफी भी मांगी।
विज्ञापन
18 सितंबर को अकाल तख्त में करेंगे क्षमा याचना की अरदास
लौंगोवाल ने कहा कि शनिवार को हुई कार्यकारिणी की बैठक में इस बात का फैसला किया गया है कि एसजीपीसी के असभ्य पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्य 18 सितंबर को श्री अकाल तख्त साहिब में क्षमा याचना की अरदास करेंगे। जांच कमेटी के सामने जितने भी कर्मचारी और अधिकारी पेश हुए हैं, उन्हें भी इसी दिन श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होकर अपनी गलती की माफी मांगनी चाहिए। लौंगोवाल ने दावा किया कि जांच रिपोर्ट में प्रबंधकीय कमियों के बारे में जो लिखा गया है, उसे ठीक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
विज्ञापन
सीए कोहली से वसूली होगी या नहीं, अभी स्पष्ट नहीं
लौंगोवाल ने आरोपियों को कानूनी कटघरे में खड़ा करने के लिए एक तीन सदस्यीय वकीलों के पैनल की एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में एसजीपीसी सदस्य वकील भगवंत सिंह स्यालका, पूर्व जिला अटार्नी एडवोकेट बलतेज सिंह ढिल्लों और एडवोकेट महिंद्र सिंह गिल को शामिल किया गया था। कमेटी की अगुवाई एसजीपीसी के महासचिव हरजिंदर सिंह धामी ने करनी थी। क्या इस कमेटी का वजूद खत्म हो गया, इस बारे में अध्यक्ष कोई भी उत्तर नहीं दे सके। सभी आरोपियों को पंथक परंपराओं के अनुसार सजा देने के फैसले के बाद क्या सीए एसएस कोहली से कुल भुगतान का 75 फीसदी वसूला जाएगा, यह भी अभी स्पष्ट नहीं किया गया। एसजीपीसी ने कोहली को 10 करोड़ की राशि का भुगतान किया हुआ है।
आरोपियों को मिले फांसी की सजा : तिलोकेवाला
एसजीपीसी की पूर्व कार्यकारिणी के सदस्य बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला ने मांग की है कि लापता पावन स्वरूपों के मामले की जांच रिपोर्ट में आरोपी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसजीपीसी के छोटे कर्मचारियों को आरोपी ठहरा दिया गया। बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जब तक पावन स्वरूप मिल नहीं जाते तब तक संगत का विरोध जारी रहेगा।