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Amritsar News: शिअद इस बार नहीं लड़ेगा दिल्ली विधानसभा चुनाव
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पंकज शर्मा
अमृतसर। लोक सभा चुनावों में मिली बड़ी हार के बाद शिरोमणि अकाली दल इस बार दिल्ली का चुनाव नहीं लड़ेगा। वहीं, अकाली दल बादल नेतृत्व को अकाली तख्त साहिब की ओर से सुनाई गई धार्मिक सजा के कारण भी दिल्ली में अकाली दल बादल का राजनीतिक ग्राफ कम हुआ है। वहीं अकाली दल नेतृत्व को भी इस बार लगा कि दिल्ली में भाजपा के सहयोग के बिना अकाली दल कुछ भी हासिल नहीं कर सकता है। इसलिए अकाली दल ने इस बार दिल्ली विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा है।
दिल्ली कमेटी और लोक सभा चुनावों के दौरान भी अकाली दल के दिल्ली स्थित नेताओं ने तो स्पष्ट कहा कि अकाली दल बादल के मुख्य चेहरे दिल्ली में चुनाव प्रचार करने न आए। क्यों कि दिल्ली के सिखों के अंदर पंथक मुद्दों को लेकर अकाली दल नेतृत्व के खिलाफ काफी रोष है। यहां तक कि कई उम्मीदवारों ने नेतृत्व के कई नेताओं के होर्डिंग तक भी चुनाव प्रचार के दौरान नहीं लगाए थे।
अकाली दल बादल ने कुछ वर्ष पहले फैसला लेकर अकाल दल को राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बनाने का एलान किया था। जिस के तहत अकाली दल ने दिल्ली की राजनीति में प्रवेश करते हुए सिख बहुसंख्यक क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार भी खड़े किए थे और यूपी में भी पार्टी के यूनिट और पार्टी पदाधिकारी नियुक्त किए थे। परंतु इस बार अकाल तख्त की ओर से बादल दल के खिलाफ लाए गए फैसलों के कारण इस बार बादल दल ने दिल्ली विधान सभा चुनावों में हिस्सा लेने का रास्ता ही त्याग दिया है।
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दिल्ली अकाली दल बादल के वरिष्ठ नेता परमजीत सिंह सरना ने कहा कि इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में अकाली दल कोई भी उम्मीदवार खड़ा नहीं कर रहा है। इस बार पार्टी ने दिल्ली के चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है। दूसरी ओर शिरोमणि अकाली दल शेर ए पंजाब के नेता भाई बलदेव सिंह वडाला ने कहा कि अकाली दल बादल का राजनीतिक व पंथक डाउनफॉल शुरू हो गया है। अकाल तख्त की ओर से बादल दल के नेताओं को लगाई फटकार भी उनको दिल्ली जाने से रोक रही है। भाजपा भी बादल दल को आपने साथ जोड़ने लिए तैयार नही है। बादल दल के लिए भाजपा के सहयोग के बिना दिल्ली में एक भी सीट जीतना संभव नहीं है। यही कारण है कि बाद दल ने इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार खड़े नहीं किए हैं।
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अमृतसर। लोक सभा चुनावों में मिली बड़ी हार के बाद शिरोमणि अकाली दल इस बार दिल्ली का चुनाव नहीं लड़ेगा। वहीं, अकाली दल बादल नेतृत्व को अकाली तख्त साहिब की ओर से सुनाई गई धार्मिक सजा के कारण भी दिल्ली में अकाली दल बादल का राजनीतिक ग्राफ कम हुआ है। वहीं अकाली दल नेतृत्व को भी इस बार लगा कि दिल्ली में भाजपा के सहयोग के बिना अकाली दल कुछ भी हासिल नहीं कर सकता है। इसलिए अकाली दल ने इस बार दिल्ली विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा है।
दिल्ली कमेटी और लोक सभा चुनावों के दौरान भी अकाली दल के दिल्ली स्थित नेताओं ने तो स्पष्ट कहा कि अकाली दल बादल के मुख्य चेहरे दिल्ली में चुनाव प्रचार करने न आए। क्यों कि दिल्ली के सिखों के अंदर पंथक मुद्दों को लेकर अकाली दल नेतृत्व के खिलाफ काफी रोष है। यहां तक कि कई उम्मीदवारों ने नेतृत्व के कई नेताओं के होर्डिंग तक भी चुनाव प्रचार के दौरान नहीं लगाए थे।
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अकाली दल बादल ने कुछ वर्ष पहले फैसला लेकर अकाल दल को राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बनाने का एलान किया था। जिस के तहत अकाली दल ने दिल्ली की राजनीति में प्रवेश करते हुए सिख बहुसंख्यक क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार भी खड़े किए थे और यूपी में भी पार्टी के यूनिट और पार्टी पदाधिकारी नियुक्त किए थे। परंतु इस बार अकाल तख्त की ओर से बादल दल के खिलाफ लाए गए फैसलों के कारण इस बार बादल दल ने दिल्ली विधान सभा चुनावों में हिस्सा लेने का रास्ता ही त्याग दिया है।
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दिल्ली अकाली दल बादल के वरिष्ठ नेता परमजीत सिंह सरना ने कहा कि इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में अकाली दल कोई भी उम्मीदवार खड़ा नहीं कर रहा है। इस बार पार्टी ने दिल्ली के चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है। दूसरी ओर शिरोमणि अकाली दल शेर ए पंजाब के नेता भाई बलदेव सिंह वडाला ने कहा कि अकाली दल बादल का राजनीतिक व पंथक डाउनफॉल शुरू हो गया है। अकाल तख्त की ओर से बादल दल के नेताओं को लगाई फटकार भी उनको दिल्ली जाने से रोक रही है। भाजपा भी बादल दल को आपने साथ जोड़ने लिए तैयार नही है। बादल दल के लिए भाजपा के सहयोग के बिना दिल्ली में एक भी सीट जीतना संभव नहीं है। यही कारण है कि बाद दल ने इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार खड़े नहीं किए हैं।