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पंजाबी यूनिवर्सिटी की शोध में खुलासा: साधन-संपन्नता से कोसों दूर हैं आम पंजाबी और किसान
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-मालवा क्षेत्र के पांच गांवों का सर्वे, आधुनिक कृषि उपकरण, नौकरी, शिक्षा और घरेलू सुविधाओं में असमानता के आंकड़े सामने आए
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी की नई शोध में मालवा क्षेत्र के गांवों में आम पंजाबी और किसानों की वास्तविक जीवन शैली के आंकड़े सामने आए हैं। इस शोध का नेतृत्व प्रो. सुरजीत सिंह ने किया जबकि शोधकर्ता डॉ. रविंदर कौर ने मालवा इलाके का स्टैंडर्ड कल्चर: मैनेजमेंट और ट्रांसफॉर्मेशन विषय पर अध्ययन किया। सर्वे के अंतर्गत बरनाला, पटियाला, मानसा, लुधियाना और मुक्तसर जिलों के पांच गांव शामिल थे।
शोध में सामने आया कि केवल 24 फीसदी किसानों के पास सिर्फ ट्रैक्टर है जबकि 18 फीसदी किसानों के पास ट्रैक्टर और ट्रॉली दोनों हैं। केवल 5 फीसदी के पास कंबाइन हार्वेस्टर सहित आधुनिक उपकरण हैं। इसके विपरीत, 53 फीसदी किसानों के पास खेती के लिए कोई आधुनिक साधन नहीं हैं और वे आज भी किराए के औजारों या मजदूरी पर निर्भर हैं। 46.3 फीसदी लोगों के पास केवल एक मोटरसाइकिल है और 22.2 फीसदी के पास दो या अधिक मोटरसाइकिल/स्कूटर हैं। कारों की संख्या और भी कम है। 68.5 फीसदी लोग कार नहीं खरीद सकते जबकि 7.2 फीसदी के पास दो या अधिक कारें हैं जो टैक्सी व्यवसाय से जुटाई गई हैं। शोध में शिक्षा, रोजगार और जातिगत संरचना पर भी रोशनी डाली गई। सरकारी नौकरियों में जाट 37.2%, पिछड़े वर्ग 22.3% और अनुसूचित जाति 31.2% के हिस्से में हैं। प्राइवेट नौकरियों में जाट 33.6%, पिछड़े वर्ग 27.3% और अनुसूचित जाति 54.2% शामिल हैं।
घरेलू सुविधाओं और जीवन शैली
6.1% घरों में केवल टीवी है, 23.3% में टीवी और फ्रिज, जबकि 53.2% घरों में टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और इन्वर्टर जैसी सुविधाएं हैं। 19.4% घरों में वाटर प्यूरीफायर, एयर फ्रायर, एसी और माइक्रोवेव जैसी आधुनिक वस्तुएं मौजूद हैं।
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शादियों और शिक्षा में असमानता
महलों में शादी करने वाले केवल 38.4% हैं। जनरल कैटेगरी के 83.7% बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजा जाता है, जबकि अनुसूचित जातियों के 74.3% बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं।
रिश्वतखोरी का रुझान
सर्वे के अनुसार, 67.3% लोग जमीन, पासपोर्ट और जन्म प्रमाणपत्र जैसी प्रक्रियाओं में रिश्वत देने की बात मानते हैं। पीयू के वीसी डाॅ. जगदीप सिंह ने शोध टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह अध्ययन समाज में हो रही तबदीलियों, उनके कारणों और प्रभावों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आधुनिक उपकरणों की कमी
प्रो. सुरजीत सिंह के अनुसार आज भी अधिकतर किसान केवल मजदूरी और किराये के औजारों पर निर्भर हैं। जातिगत और व्यक्तिगत कार्यों में बदलाव से गांवों में भाईचारक संबंधों पर असर पड़ा है। शोध के आंकड़े दिखाते हैं कि आम पंजाबी और किसान आज भी साधन-संपन्नता से कोसों दूर हैं और उनकी जीवनशैली मीडिया में दिखाई जाने वाली छवि से भिन्न है।
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी की नई शोध में मालवा क्षेत्र के गांवों में आम पंजाबी और किसानों की वास्तविक जीवन शैली के आंकड़े सामने आए हैं। इस शोध का नेतृत्व प्रो. सुरजीत सिंह ने किया जबकि शोधकर्ता डॉ. रविंदर कौर ने मालवा इलाके का स्टैंडर्ड कल्चर: मैनेजमेंट और ट्रांसफॉर्मेशन विषय पर अध्ययन किया। सर्वे के अंतर्गत बरनाला, पटियाला, मानसा, लुधियाना और मुक्तसर जिलों के पांच गांव शामिल थे।
शोध में सामने आया कि केवल 24 फीसदी किसानों के पास सिर्फ ट्रैक्टर है जबकि 18 फीसदी किसानों के पास ट्रैक्टर और ट्रॉली दोनों हैं। केवल 5 फीसदी के पास कंबाइन हार्वेस्टर सहित आधुनिक उपकरण हैं। इसके विपरीत, 53 फीसदी किसानों के पास खेती के लिए कोई आधुनिक साधन नहीं हैं और वे आज भी किराए के औजारों या मजदूरी पर निर्भर हैं। 46.3 फीसदी लोगों के पास केवल एक मोटरसाइकिल है और 22.2 फीसदी के पास दो या अधिक मोटरसाइकिल/स्कूटर हैं। कारों की संख्या और भी कम है। 68.5 फीसदी लोग कार नहीं खरीद सकते जबकि 7.2 फीसदी के पास दो या अधिक कारें हैं जो टैक्सी व्यवसाय से जुटाई गई हैं। शोध में शिक्षा, रोजगार और जातिगत संरचना पर भी रोशनी डाली गई। सरकारी नौकरियों में जाट 37.2%, पिछड़े वर्ग 22.3% और अनुसूचित जाति 31.2% के हिस्से में हैं। प्राइवेट नौकरियों में जाट 33.6%, पिछड़े वर्ग 27.3% और अनुसूचित जाति 54.2% शामिल हैं।
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घरेलू सुविधाओं और जीवन शैली
6.1% घरों में केवल टीवी है, 23.3% में टीवी और फ्रिज, जबकि 53.2% घरों में टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और इन्वर्टर जैसी सुविधाएं हैं। 19.4% घरों में वाटर प्यूरीफायर, एयर फ्रायर, एसी और माइक्रोवेव जैसी आधुनिक वस्तुएं मौजूद हैं।
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शादियों और शिक्षा में असमानता
महलों में शादी करने वाले केवल 38.4% हैं। जनरल कैटेगरी के 83.7% बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजा जाता है, जबकि अनुसूचित जातियों के 74.3% बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं।
रिश्वतखोरी का रुझान
सर्वे के अनुसार, 67.3% लोग जमीन, पासपोर्ट और जन्म प्रमाणपत्र जैसी प्रक्रियाओं में रिश्वत देने की बात मानते हैं। पीयू के वीसी डाॅ. जगदीप सिंह ने शोध टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह अध्ययन समाज में हो रही तबदीलियों, उनके कारणों और प्रभावों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आधुनिक उपकरणों की कमी
प्रो. सुरजीत सिंह के अनुसार आज भी अधिकतर किसान केवल मजदूरी और किराये के औजारों पर निर्भर हैं। जातिगत और व्यक्तिगत कार्यों में बदलाव से गांवों में भाईचारक संबंधों पर असर पड़ा है। शोध के आंकड़े दिखाते हैं कि आम पंजाबी और किसान आज भी साधन-संपन्नता से कोसों दूर हैं और उनकी जीवनशैली मीडिया में दिखाई जाने वाली छवि से भिन्न है।