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भ्रष्टाचार के दोषी बैंक के पूर्व एमडी को पांच वर्ष की कैद
अमर उजाला, अमृतसर
Updated Thu, 23 Jan 2014 09:55 PM IST
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अमृतसर सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक के एमडी रहे सुरिंदरपाल सिंह छीना को न्यायाधीश नवजोत सोहल की अदालत में विभिन्न धाराओं के तहत अधिकतम पांच साल की सजा व 80 हजार रुपये जुर्माना किया गया।
छीना को 20 जनवरी को दोषी करार दिया गया था। छीना 1996 से 2002 तक बैंक एमडी रहे और उसी दौरान उसने पद पर रहते हुए कई गोलमाल किए और कई लोगों को नौकरी दिलवाने के लिए लाखों रुपये की रिश्वत ली थी। छीना के खिलाफ शिकायतें मिलने पर विजिलेंस ब्यूरो ने जांच शुरू की थी और थाना कोतवाली में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
2002 से चले इस केस में 45 से अधिक गवाहियां हुई हैं। 15 लोगों ने शपथपत्र देकर कहा था कि उन्होंने बैंक में नौकरी लेने के लिए छीना को रिश्वत के तौर पर लाखों रुपये दिए थे। छीना की ओर से 13.25 लाख रुपये रिश्वत लेना साबित हुआ है।
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छीना को भ्रष्टाचार के दोषों तहत अंडर सेक्शन 7 में चार साल की कैद व 10 हजार रुपये जुर्माना, अंडर सेक्शन 13 (2) पीसी एक्ट के तहत पांच साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना, केस नंबर 25 में भ्रष्टाचार के दोष में 10 हजार रुपये जुर्माना और चार साल की कैद, धोखाधड़ी के आरोप में चार साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त कैद काटनी पडे़गी।
अदालत में चली कार्रवाई के अनुसार सुरिंदरपाल सिंह छीना ने एमडी पद पर रहते हुए बैंक में भर्ती के लिए आठ अकाउंटेंट, 14 डाटा एंट्री क्लर्क और 50 चौकीदार व चपरासी के पदों के लिए नौकरियां निकाली थी। इन पदों पर उसने पैसे लेकर भर्तियां की थी। भर्ती के लिए उसने बाकायदा रेट तय कर रखे थे।
क्लर्क की भर्ती करने के लिए 1 लाख और चपरासी के लिए 30 हजार रुपये रिश्वत के तौर पर लिए जाते थे। छीना ने अपने कार्यकाल दौरान 15 जेनरेटर खरीदे गए। जनरेटर का मार्केट रेट 12 हजार रुपये था जबकि छीना ने सरकारी बिल में 30 हजार रुपये दर्शाए और एक जनरेटर पर 18 हजार रुपये अपनी जेब में डाल लिए।
आरोप यह भी है कि छीना ने 1996 से 2002 के कार्यकाल के दौरान बैंक की चार शाखाओं को बदल को अन्य इमारतों में शिफ्ट करवा दिया। जहां पहले केवल 2000 रुपये महीना रेंट पर बैंक की इमारत ली गई थी उसकी जगह पर 15 से 20 हजार रुपये महीना रेंट पर इमारत ली गई। छीना इसमें भी भारी कमीशन लेता था।
1996 से 2002 तक छीना की कुल आमदन 38 लाख रुपये थी। उनके पास 1.65 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी थी। जो उसने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार करके कमाई थी।
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छीना को 20 जनवरी को दोषी करार दिया गया था। छीना 1996 से 2002 तक बैंक एमडी रहे और उसी दौरान उसने पद पर रहते हुए कई गोलमाल किए और कई लोगों को नौकरी दिलवाने के लिए लाखों रुपये की रिश्वत ली थी। छीना के खिलाफ शिकायतें मिलने पर विजिलेंस ब्यूरो ने जांच शुरू की थी और थाना कोतवाली में उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
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2002 से चले इस केस में 45 से अधिक गवाहियां हुई हैं। 15 लोगों ने शपथपत्र देकर कहा था कि उन्होंने बैंक में नौकरी लेने के लिए छीना को रिश्वत के तौर पर लाखों रुपये दिए थे। छीना की ओर से 13.25 लाख रुपये रिश्वत लेना साबित हुआ है।
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छीना को भ्रष्टाचार के दोषों तहत अंडर सेक्शन 7 में चार साल की कैद व 10 हजार रुपये जुर्माना, अंडर सेक्शन 13 (2) पीसी एक्ट के तहत पांच साल की सजा और 50 हजार रुपये जुर्माना, केस नंबर 25 में भ्रष्टाचार के दोष में 10 हजार रुपये जुर्माना और चार साल की कैद, धोखाधड़ी के आरोप में चार साल की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त कैद काटनी पडे़गी।
अदालत में चली कार्रवाई के अनुसार सुरिंदरपाल सिंह छीना ने एमडी पद पर रहते हुए बैंक में भर्ती के लिए आठ अकाउंटेंट, 14 डाटा एंट्री क्लर्क और 50 चौकीदार व चपरासी के पदों के लिए नौकरियां निकाली थी। इन पदों पर उसने पैसे लेकर भर्तियां की थी। भर्ती के लिए उसने बाकायदा रेट तय कर रखे थे।
क्लर्क की भर्ती करने के लिए 1 लाख और चपरासी के लिए 30 हजार रुपये रिश्वत के तौर पर लिए जाते थे। छीना ने अपने कार्यकाल दौरान 15 जेनरेटर खरीदे गए। जनरेटर का मार्केट रेट 12 हजार रुपये था जबकि छीना ने सरकारी बिल में 30 हजार रुपये दर्शाए और एक जनरेटर पर 18 हजार रुपये अपनी जेब में डाल लिए।
आरोप यह भी है कि छीना ने 1996 से 2002 के कार्यकाल के दौरान बैंक की चार शाखाओं को बदल को अन्य इमारतों में शिफ्ट करवा दिया। जहां पहले केवल 2000 रुपये महीना रेंट पर बैंक की इमारत ली गई थी उसकी जगह पर 15 से 20 हजार रुपये महीना रेंट पर इमारत ली गई। छीना इसमें भी भारी कमीशन लेता था।
1996 से 2002 तक छीना की कुल आमदन 38 लाख रुपये थी। उनके पास 1.65 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी थी। जो उसने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार करके कमाई थी।