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दिल्ली बवाल : अलगाववादियों ने किसान आंदोलन को हाईजैक कर नई चुनौतियां पैदा कीं

Thu, 28 Jan 2021 02:49 AM IST
ajay kumar अशोक नीर, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
अशोक नीर, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Thu, 28 Jan 2021 02:49 AM IST
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Kisan Andolan News: extremist elements hijacked Kisan Andolan
लाल किला। - फोटो : ANI

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को पर्दे के पीछे पूरा समर्थन देकर कांग्रेस ने एक प्लेटफार्म तैयार किया। शिअद व आम आदमी पार्टी ने आंदोलन में अपने समर्थकों को भेजकर इसे केंद्र से किसी भी समझौते से रोके रखा। पंजाब के अलगाववादी समर्थकों ने विभिन्न पार्टियों द्वारा किसान आंदोलन के नाम बिछाई गई राजनीति की शतरंज में सभी प्यादों को पछाड़ कर आंदोलन पर कब्जा जमा लिया। इन्हीं समर्थकों ने गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर झंडा फहरा दिया। इस मकसद को पूरा करने के लिए अलगाववादी संगठन बीते कई दशकों से इंतजार में थे। 

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इन संगठनों के उग्रपंथियों ने किसानों के आंदोलन का खुलकर इस्तेमाल किया। सब जानते हुए भी किसान संगठनों के नेता आंखें मूंदे रहे। आंदोलन के दौरान कुछ पंजाबी गीतों के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्र सरकार के विरुद्ध जिस प्रकार की कटु भाषा का इस्तेमाल किया गया, किसान नेताओं ने कभी इसका विरोध नहीं किया। यही कारण था कि अलगाववादियों ने प्रदेश के गांवों में स्थापित अपने आधार का जमकर उपयोग किया।
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नौजवानों को हथियारों के साथ दिल्ली पहुंचाने के लिए हर साधन उपलब्ध करवाए गए। जब लाल किले पर कब्जा जमाया, तब इन नेताओं को होश आया कि आंदोलन की आड़ में उनकी साख को नुकसान पहुंचाया गया। किसानों के नाम पर मचाए उत्पात से एक बार फिर पंजाब की साख को धक्का लगा है। 

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तीनों बड़ी पार्टियां चुनाव जीतने के जुगाड़ में

आंदोलन से देश-विदेश में बैठे अलगाववादी समर्थकों का उद्देश्य पूरा हुआ है। इसकी आड़ में ऐसे संगठन पंजाब के नौजवानों को भड़का कर सूबे को फिर आतंकवाद की आग में धकेलना चाहते हैं। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी भी अलगाववादियों के हमदर्दों को उकसाकर पंजाब को नया दर्द दे सकती है।

सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद सिंह केजरीवाल की भूमिका आंदोलन को खत्म करवाने में नहीं थी। तीनों बड़ी पार्टियां आंदोलन के माध्यम से 2022 का विधानसभा चुनाव जीतने की जुगाड़ में हैं। आंदोलन का प्रभाव पंजाब की राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। 

पंधेर ने दिल्ली पुलिस के रूट पर जताई थी आपत्ति
किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रदेश महासचिव एक संदेश में यह कहते हुए सुने गए कि किसानों की ट्रैक्टर रैली पूरी हो चुकी है। नौजवान अब लाल किले से बाहर निकल आएं। आंदोलन हिंसक हुआ तो किसानों की बदनामी होगी। पंधेर ने ही दिल्ली पुलिस द्वारा जारी ट्रैक्टर रैली के रूट पर आपत्ति जताई थी। लेकिन जब तक पंधेर को यह बात समझ आई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

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