जलियांवाला बाग: इतिहासकार बोले- यह विरासत को मिटाने जैसा, शहीदी निशानियों से छेड़छाड़ ठीक नहीं
बाग के सुंदरीकरण की देखरेख के लिए केंद्र सरकार ने एक सलाहकार समिति बनाई थी। समिति में संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, पुरातत्व विभाग और निर्माण क्षेत्र की सरकारी कंपनी एनबीसीसी के अधिकारी शामिल थे। परियोजना के लिए 20 करोड़ का टेंडर निकाला गया और गुजरात की कंपनी वामा कम्युनिकेशन्स को यह काम सौंपा गया। जलियांवाला बाग के ट्रस्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक पहली बार इसका नवीनीकरण 1957 में हुआ था और 1960 में जब काम पूरा हुआ तो यह तंग गली पहले वाले स्वरूप में काफी अलग हो गई थी। इस बार ‘ज्वाला स्मारक’ का पुनर्निर्माण कराया गया है तो आधुनिक मेमोरियल कांप्लेक्स में म्यूजियम गैलरियां बना दी गई हैं।
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आजादी के अमृत महोत्सव पर कराया गया जलियांवाला बाग का सुंदरीकरण केंद्र सरकार के लिए गले की फांस बन गया है। केंद्र सरकार शीर्ष नेताओं को यात्रा के बहाने अमृतसर भेजकर नवीनीकरण को क्लीनचिट दिलाने में लगी है तो विरोध में उतरे शहीदों के वंशज व इतिहासकार इस बदलाव से बिल्कुल सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि शहीदी निशानियों से छेड़छाड़ ठीक नहीं है। ऐसे में अमर उजाला टीम ने मौके पर जाकर जाना कि क्या है हकीकत और क्यों किया जा रहा है सुंदरीकरण का विरोध?
दरअसल, बाग में चार नई गैलरियां बनाई गई हैं। शहीदी कुएं के चारों तरफ भी गैलरी बना दी है और इसकी सुरक्षा के लिए कांच लगाया है। कुएं से कुछ आगे शहीदी स्मारक को भी नया रूप दिया गया है। अंग्रेजों की क्रूरता की गवाह रहीं गोलियों के निशानों को भी संरक्षित किया गया है। इसके अलावा जलियांवाला बाग नरसंहार पर विशेष डिजिटल डॉक्यूमेंट्री तैयार की गई है, जो 13 अप्रैल 1919 को अंग्रेजी सेना की गोलियों से शहीद लोगों पर केंद्रित है। इसके लिए बनाए गए थिएटर में एक बार में 80 सैलानियों के बैठने की व्यवस्था है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जलियांवाला बाग के नए स्वरूप का लोकार्पण किया था। इसके तत्काल बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर जलियांवाला बाग में किए गए बदलाव पर सवाल खड़े किए तो उन्हीं की पार्टी के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इसे क्लीनचिट देते हुए कहा कि मेरे हिसाब से रेनोवेशन कार्य बहुत बढ़िया हुआ है। इसे देखकर पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने भी माना कि विरासती जगह में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
जलियांवाला बाग नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट के सदस्य राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक भी इस नवीनीकरण को सही मानते हैं। उनका दावा है कि विकास कार्य को करते समय बाग की विरासत के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है और पर्यटकों को इसे देखने के लिए कोई टिकट नहीं लेनी होगी। बता दें कि जलियांवाला बाग नेशनल मेमोरियल ट्रस्ट के ट्रस्टियों में चेयरमैन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जबकि पंजाब के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय संस्कृति मंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और तीन नामित सदस्य (पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व सांसद तरलोचन सिंह, सांसद श्वेत मलिक) इसके ट्रस्टी हैं।
हटानी पड़ी थीं अर्धनग्न तस्वीरें
इंटरनेशनल सर्व कम्बोज समाज के अध्यक्ष शिंदरपाल सिंह कम्बोज ने बताया कि बाग में बनाई गैलरी में महाराजा रणजीत सिंह की लड़ाइयों की तस्वीरों के ठीक नीचे दो महिलाओं की अर्धनग्न तस्वीरें लगा दी गई थीं। बगल की ही दीवार पर श्री गुरुनानक देवजी की तस्वीर भी लगी हुई थी। ऐसे में जब बवाल खड़ा हुआ तो खजुराहो शैली की इन अर्धनग्न तस्वीरों को तुरंत हटाना पड़ा। कम्बोज भी मानते हैं कि नवीनीकरण की आड़ में बाग की मूल स्थिति से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए थी। मोक्ष स्थल, अमर ज्योति और ध्वज मस्तूल को समाहित करने के लिए जो कार्य किया गया है, वह भी समझ से परे है।