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ज्ञानी हरप्रीत सिंह का दावा: हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने में बादलों के निकटवर्ती का हाथ
Tue, 18 Feb 2025 09:43 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 18 Feb 2025 09:43 PM IST
सार
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि दो दिसंबर को अकाल तख्त से जो हुकमनामा जारी हुआ था, वह पांच सिंह साहिबान की आपसी सलाह थी और सिख कौम की भावनाओं के अनुसार था। उसमें किसी एक जत्थेदार की कोई राय नहीं थी।
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मीडिया से बात करते ज्ञानी हरप्रीत सिंह
- फोटो : संवाद
विस्तार
तख्त श्री दमदमा साहब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने दावा किया है कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाए जाने में बादलों के खास आदमी रघुजीत सिंह विर्क का विशेष हाथ है। इस सच को कोई भी झुठला नहीं सकता।
अमृतसर के स्थानीय चीफ खालसा दीवान के कार्यालय में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की ओर से त्यागपत्र दिया जाना मंदभागा है। उन्होंने कहा कि धामी ने अकाल तख्त की तरफ से गठित सात सदस्यीय कमेटी के प्रधान पद से भी त्यागपत्र की पेशकश की है जो उन्हें नहीं देना चाहिए। जो जिम्मेदारी श्री अकाल तख्त की ओर से उन्हें साैंपी गई है, उस जिम्मेदारी को धामी को अवश्य निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धामी के ऊपर बहुत ज्यादा दबाव था जिस कारण वे एसजीपीसी के प्रधान के पद से त्यागपत्र देने को मजबूर हुए हैं। यह दबाव उनके चेहरे पर प्रेस कांफ्रेंस के दौरान झलक रहा था।
ज्ञानी हरप्रीत सिंह चीफ खालसा दीवान की एक बैठक में हिस्सा लेने के लिए आए थे। उन्होंने कहा कि एक परिवार की राजनीति को बचाने के लिए सभी तरह की राजनीति की जा रही है। उनको भी तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार पद से एक योजनाबद्ध राजनीति के तहत हटाया गया है। पहले पूरी स्क्रिप्ट तैयार की गई थी, फिर उनको हटाया गया है।
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उन्होंने कहा कि दो दिसंबर को अकाल तख्त से जो हुकमनामा जारी हुआ था, वह पांच सिंह साहिबान की आपसी सलाह थी और सिख कौम की भावनाओं के अनुसार था। उसमें किसी एक जत्थेदार की कोई राय नहीं थी। उन्होंने कहा कि सिख कौम की राय के अनुसार ही बादल परिवार से फख्र ए काैम वापस लिया गया है। उन्होंने कहा कि अब वह गांव-गांव जाएंगे और संगत को सिख संस्थाओं को बचाने के लिए अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि सिंह साहब की नियुक्ति और रिटायरमेंट के लिए निजाम बनने चाहिए।
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अमृतसर के स्थानीय चीफ खालसा दीवान के कार्यालय में पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की ओर से त्यागपत्र दिया जाना मंदभागा है। उन्होंने कहा कि धामी ने अकाल तख्त की तरफ से गठित सात सदस्यीय कमेटी के प्रधान पद से भी त्यागपत्र की पेशकश की है जो उन्हें नहीं देना चाहिए। जो जिम्मेदारी श्री अकाल तख्त की ओर से उन्हें साैंपी गई है, उस जिम्मेदारी को धामी को अवश्य निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धामी के ऊपर बहुत ज्यादा दबाव था जिस कारण वे एसजीपीसी के प्रधान के पद से त्यागपत्र देने को मजबूर हुए हैं। यह दबाव उनके चेहरे पर प्रेस कांफ्रेंस के दौरान झलक रहा था।
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ज्ञानी हरप्रीत सिंह चीफ खालसा दीवान की एक बैठक में हिस्सा लेने के लिए आए थे। उन्होंने कहा कि एक परिवार की राजनीति को बचाने के लिए सभी तरह की राजनीति की जा रही है। उनको भी तख्त दमदमा साहिब के जत्थेदार पद से एक योजनाबद्ध राजनीति के तहत हटाया गया है। पहले पूरी स्क्रिप्ट तैयार की गई थी, फिर उनको हटाया गया है।
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उन्होंने कहा कि दो दिसंबर को अकाल तख्त से जो हुकमनामा जारी हुआ था, वह पांच सिंह साहिबान की आपसी सलाह थी और सिख कौम की भावनाओं के अनुसार था। उसमें किसी एक जत्थेदार की कोई राय नहीं थी। उन्होंने कहा कि सिख कौम की राय के अनुसार ही बादल परिवार से फख्र ए काैम वापस लिया गया है। उन्होंने कहा कि अब वह गांव-गांव जाएंगे और संगत को सिख संस्थाओं को बचाने के लिए अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि सिंह साहब की नियुक्ति और रिटायरमेंट के लिए निजाम बनने चाहिए।