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सभी प्रदर्शनकारियों की बिना शर्त रिहाई पर अड़े किसान
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
Updated Sat, 22 Feb 2014 09:59 PM IST
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पावरकॉम के चीफ इंजीनियर बार्डर जोन कार्यालय के बाहर शुक्रवार रात को किसानों पर किए पुलिस लाठीचार्ज के दौरान मारे गए किसान बहादुर सिंह की मौत का मामला गर्माता जा रहा है।
किसानों ने ऐलान कर दिया है कि जब तक सभी किसान नेता और गिरफ्तार किसान रिहा नहीं किए जाते, तब तक वह बहादुर सिंह के शव को पोस्टमार्टम केंद्र से नहीं उठाएंगे। शनिवार को पुलिस ने भारी सुरक्षा इंतजाम के तहत बहादुर सिंह के शव का पोस्टमार्टम करवा दिया।
शुक्रवार देर रात पुलिस की ओर से किए गए लाठीजार्च के दौरान गांव बुंडाला निवासी बहादुर सिंह बुरी तरह घायल हो गया था। रात करीब साढ़े 11 बजे उसकी मौत हो गई थी।
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किसानों ने भी अपना धरना पावरकॉम के चीफ इंजीनियर कार्यालय के बाहर से उठा कर पोस्ट मार्टम केंद्र के बाहर शुरू कर दिया है। पोस्टमार्टम हाउस के आसपास बड़ी संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स और आर्म्ड रिजर्व पुलिस के सिपाही तैनात किए हुए थे।
सारे शहर में किसानों के आंदोलन को लेकर तनाव वाला माहौल था। पुलिस ने विवाद को उस समय और गहरा दिया जब पुलिस कमिश्नर ने एलान किया कि बहादुर सिंह की मौत कुदरती है। जम्हूरी किसान सभा पंजाब के अध्यक्ष डॉ. सतनाम सिंह, भाकपा नेता अमरजीत सिंह आसल, माकपा नेता विजय मिश्रा, नेशनल स्टूडेंट्स फेडरेशन के नेता राजविंदर कुमार राजा और रेवेल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के राज्य सचिव करनैलन सिंह इकोलाहा, जिला कांग्रेस शहरी के अध्यक्ष राजीव भगत, ग्रामीण शाखा के अध्यक्ष गुरजीत सिंह औजला, लोक मोर्चा के नेता अमोलक सिंह ने अमृतसर में किसानों पर किए गए लाठीचार्ज की सख्त शब्दों में निंदा करते हुए कमिश्नर को निलंबित करने की मांग की है।
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किसानों ने ऐलान कर दिया है कि जब तक सभी किसान नेता और गिरफ्तार किसान रिहा नहीं किए जाते, तब तक वह बहादुर सिंह के शव को पोस्टमार्टम केंद्र से नहीं उठाएंगे। शनिवार को पुलिस ने भारी सुरक्षा इंतजाम के तहत बहादुर सिंह के शव का पोस्टमार्टम करवा दिया।
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शुक्रवार देर रात पुलिस की ओर से किए गए लाठीजार्च के दौरान गांव बुंडाला निवासी बहादुर सिंह बुरी तरह घायल हो गया था। रात करीब साढ़े 11 बजे उसकी मौत हो गई थी।
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किसानों ने भी अपना धरना पावरकॉम के चीफ इंजीनियर कार्यालय के बाहर से उठा कर पोस्ट मार्टम केंद्र के बाहर शुरू कर दिया है। पोस्टमार्टम हाउस के आसपास बड़ी संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स और आर्म्ड रिजर्व पुलिस के सिपाही तैनात किए हुए थे।
सारे शहर में किसानों के आंदोलन को लेकर तनाव वाला माहौल था। पुलिस ने विवाद को उस समय और गहरा दिया जब पुलिस कमिश्नर ने एलान किया कि बहादुर सिंह की मौत कुदरती है। जम्हूरी किसान सभा पंजाब के अध्यक्ष डॉ. सतनाम सिंह, भाकपा नेता अमरजीत सिंह आसल, माकपा नेता विजय मिश्रा, नेशनल स्टूडेंट्स फेडरेशन के नेता राजविंदर कुमार राजा और रेवेल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के राज्य सचिव करनैलन सिंह इकोलाहा, जिला कांग्रेस शहरी के अध्यक्ष राजीव भगत, ग्रामीण शाखा के अध्यक्ष गुरजीत सिंह औजला, लोक मोर्चा के नेता अमोलक सिंह ने अमृतसर में किसानों पर किए गए लाठीचार्ज की सख्त शब्दों में निंदा करते हुए कमिश्नर को निलंबित करने की मांग की है।