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आक्सीजन की किल्लत से 6 मरीजों की मौत
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ऑक्सीजन की कमी से अमृतसर के एक निजी अस्पताल में छह लोगों की मौत हो गई। फतेहगढ़ चूड़ियां बाईपास रोड स्थित नीलकंठ अस्पताल में कोरोना मरीजों सहित छह लोगों ने ऑक्सीजन की कमी के कारण दम तोड़ दिया। नीलकंठ अस्पताल के एमडी का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी से पांच मरीजों की मौत हुई है। वे पिछले 48 घंटे से ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे थे। प्रशासन का कहना है कि सरकारी अस्पतालों से पहले प्राइवेट अस्पतालों को ऑक्सीजन नहीं दी जा सकती।
ऑक्सीजन की कमी से छह लोगों की मौत की यह घटना शनिवार सुबह करीब 3 बजे की है। सुबह 10 बजे अस्पताल पहुंचे सिविल सर्जन डा. चरणजीत सिंह और डीसी गुरप्रीत सिंह खेहरा के प्रतिनिधि स्थानीय निकाय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर रजत ओबराय ने समस्त छह मृतकों की मेडिकल रिपोर्ट्स जब्त कर घटना की जांच के आदेश दिए। इस घटना के दौरान मृतकों के परिजनों ने कुछ देर के लिए अस्पताल के समक्ष हंगामा भी किया। इनमें से दो मृतक मरीज कादियां, दो बटाला तथा दो अमृतसर के निवासी थे। इसी बीच, सिविल सर्जन के ड्राइवर के साथ भी कवरेज को लेकर मीडिया पर्सन की बहस हुई। ड्राइवर ने सिविल सर्जन की गाड़ी बीच सड़क पर खड़ी कर दी इस कारण ट्रैफिक भी जाम हो गया था, इसे लेकर भी मीडिया के साथ ड्राइवर की नोकझोंक हुई थी। गुस्साएं परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के साथ बहसबाजी की, लेकिन सूत्रों के अनुसार अस्पताल के एमडी सुनील कुमार ने आक्सीजन की कमी की आशंका जताते हुए मरीजों के परिजनों को न सिर्फ आगाह कर दिया था बल्कि इस संबंधी लिखित तौर से भी ले लिया था। आखिरकार परिजन सुबह 9 बजे शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हो गए और शव लेकर लौट गए।
नीलकंठ अस्पताल के एमडी सुनील देवगन ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि जिला प्रशासन सरकारी अस्पतालों में आक्सीजन की निर्विघ्न सप्लाई दे रहा है लेकिन प्राइवेट अस्पतालों को इससे वंचित रखा गया है। प्राइवेट अस्पतालों के पास ऑक्सीजन की कमी के कारण उन्होंने इन मरीजों को भी दाखिल करने से मना कर दिया था। मरीजों के परिजनों के इलाज करने को लेकर अड़ियल रवैया अपनाने के चलते उन्होंने अपना फर्ज निभाते हुए इनका उपचार किया था। परिजनों से दाखिल करने के दौरान लिखित में ले लिया गया था कि अगर ऑक्सीजन की कमी से कोई हादसा हुआ तो अस्पताल प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा।
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छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित
इसी बीच, पंजाब के चिकित्सा शिक्षा मंत्री ओपी सोनी ने कहा कि मामले की जांच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। अगले 48 घंटों में कमेटी को जांच रिपोर्ट सौंपने की हिदायत दी गई है। उन्होंने माना कि पंजाब ही नहीं बल्कि पूरे देश में ऑक्सीजन की किल्लत चल रही है, ऐसे में किसी भी अस्पताल में मरीज की इस वजह से मौत होना दुखदायी है। केवल सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई होने के आरोप निराधार हैं, प्राइवेट अस्पतालों को भी निरंतर सप्लाई की जा रही है। गुरु नानक देव अस्पताल की बात करते हुए उन्होंने कहा कि वहां पर अतिरिक्त 450 बेड कोरोना मरीजों के लिए लगा दिए गए हैं। उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों को हिदायत दी कि वे ऑक्सीजन की सप्लाई का हर समय ध्यान रखें। कमी के चलते प्रशासन को तुरंत सूचित करें।
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ऑक्सीजन की कमी से छह लोगों की मौत की यह घटना शनिवार सुबह करीब 3 बजे की है। सुबह 10 बजे अस्पताल पहुंचे सिविल सर्जन डा. चरणजीत सिंह और डीसी गुरप्रीत सिंह खेहरा के प्रतिनिधि स्थानीय निकाय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर रजत ओबराय ने समस्त छह मृतकों की मेडिकल रिपोर्ट्स जब्त कर घटना की जांच के आदेश दिए। इस घटना के दौरान मृतकों के परिजनों ने कुछ देर के लिए अस्पताल के समक्ष हंगामा भी किया। इनमें से दो मृतक मरीज कादियां, दो बटाला तथा दो अमृतसर के निवासी थे। इसी बीच, सिविल सर्जन के ड्राइवर के साथ भी कवरेज को लेकर मीडिया पर्सन की बहस हुई। ड्राइवर ने सिविल सर्जन की गाड़ी बीच सड़क पर खड़ी कर दी इस कारण ट्रैफिक भी जाम हो गया था, इसे लेकर भी मीडिया के साथ ड्राइवर की नोकझोंक हुई थी। गुस्साएं परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के साथ बहसबाजी की, लेकिन सूत्रों के अनुसार अस्पताल के एमडी सुनील कुमार ने आक्सीजन की कमी की आशंका जताते हुए मरीजों के परिजनों को न सिर्फ आगाह कर दिया था बल्कि इस संबंधी लिखित तौर से भी ले लिया था। आखिरकार परिजन सुबह 9 बजे शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हो गए और शव लेकर लौट गए।
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नीलकंठ अस्पताल के एमडी सुनील देवगन ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि जिला प्रशासन सरकारी अस्पतालों में आक्सीजन की निर्विघ्न सप्लाई दे रहा है लेकिन प्राइवेट अस्पतालों को इससे वंचित रखा गया है। प्राइवेट अस्पतालों के पास ऑक्सीजन की कमी के कारण उन्होंने इन मरीजों को भी दाखिल करने से मना कर दिया था। मरीजों के परिजनों के इलाज करने को लेकर अड़ियल रवैया अपनाने के चलते उन्होंने अपना फर्ज निभाते हुए इनका उपचार किया था। परिजनों से दाखिल करने के दौरान लिखित में ले लिया गया था कि अगर ऑक्सीजन की कमी से कोई हादसा हुआ तो अस्पताल प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा।
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छह सदस्यीय जांच कमेटी गठित
इसी बीच, पंजाब के चिकित्सा शिक्षा मंत्री ओपी सोनी ने कहा कि मामले की जांच के लिए 6 सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। अगले 48 घंटों में कमेटी को जांच रिपोर्ट सौंपने की हिदायत दी गई है। उन्होंने माना कि पंजाब ही नहीं बल्कि पूरे देश में ऑक्सीजन की किल्लत चल रही है, ऐसे में किसी भी अस्पताल में मरीज की इस वजह से मौत होना दुखदायी है। केवल सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई होने के आरोप निराधार हैं, प्राइवेट अस्पतालों को भी निरंतर सप्लाई की जा रही है। गुरु नानक देव अस्पताल की बात करते हुए उन्होंने कहा कि वहां पर अतिरिक्त 450 बेड कोरोना मरीजों के लिए लगा दिए गए हैं। उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों को हिदायत दी कि वे ऑक्सीजन की सप्लाई का हर समय ध्यान रखें। कमी के चलते प्रशासन को तुरंत सूचित करें।