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जब तक जिऊंगा, तुम्हारी आस टूटने नहीं दूगां - सिद्धू
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अमृतसर। अमृतसर की हॉट सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार और पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि राजनीति में दो शब्द महत्वपूर्ण हैं। आस (उम्मीद) और विश्वास जब तक मेरे अंदर सांस है, तब तक मैं आपकी आस नहीं टूटने दूंगा। सिद्धू ने रविवार को यह बात रंजीत एवेन्यू स्थित एक होटल में आयोजित एनआरआई के साथ बैठक में कही।
उन्होंने कहा कि मैं पंजाबियों से कहना चाहता हूं कि जब तक मेरे अंदर सांस है, तब तक आपकी आस और विश्वास टूटने नहीं दूंगा। उन्होंने कहा कि इंसान के अहसास में सबसे बड़ी होती है इश्क। लोग वफा वाला इश्क देखते हैं और मैं सूबे वाला देखता हूं। मैं शहीद-ए-आजम भगत सिंह वाला देखता हूं। इसके बदले कुछ मांगता नहीं। उन्होंने एनआरआई से कहा कि आप लोगों के साथ मेरी सांझ पंजाब को बदलने की है। बदहाली वाले पंजाब को खुशहाली की तरफ लेकर जाना है। सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि वह मुझे हराता रहा पर कभी शिकायत नहीं की और जब मौका मिला तो शिकस्त दी। करतारपुर साहिब वाला लांघा जिसे असंभव बताया जाता रहा, खुला कि नहीं। उन्होंने कहा कि एनआरआई पंजाब की आत्मा है, क्योंकि वे वहां एक अच्छे सिस्टम में जी रहे हैं और यहां पंजाब में अच्छा सिस्टम लागू किए जाने में सहयोगी हो सकते हैं। उन्होंने एनआरआई की जमीनों को दबाए जाने और अन्य मामलों को लेकर विश्वास टूटने की बात कही क्योंकि यहां के लोगों ने राजनीति को धंधा बनाकर पैसे कमाने का साधन बना लिया। मेरे लिए यह मिशन है, जिसमें मैं एनआरआआई भाइयों को अपना सहयोगी बनाऊंगा।
सिद्धू ने कहा कि यह लड़ाई एक सिस्टम की है। जिसने 27-28 साल में पंजाब के उपर 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ाया। इसका मतलब है कि पंजाब की म्युनिसिपलिटी और स्टेट की इमारतें गिरवीं हैं। पंजाब की हर चीज गिरवी पड़ी है और यहां ऐसा कोई राजनीतिज्ञ नहीं जिसका घर गिरवी पड़ा हो। उन्होंने एनआरआई से कहा कि उन्हें (सिद्धू) उनसे (एनआरआई) डॉलर या पाउंड की जरूरत नहीं बल्कि वे एक-एक एनआरआई अपने 100-100 रिश्तेदारों को फोन कर पंजाब को बदलने वालों के लिए मत देने की अपील करें। उन्हें कहे कि इस बार किसी नेता को नहीं बल्कि सच्चाई और इमानदारी जिताना है।
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उन्होंने कहा कि मैं पंजाबियों से कहना चाहता हूं कि जब तक मेरे अंदर सांस है, तब तक आपकी आस और विश्वास टूटने नहीं दूंगा। उन्होंने कहा कि इंसान के अहसास में सबसे बड़ी होती है इश्क। लोग वफा वाला इश्क देखते हैं और मैं सूबे वाला देखता हूं। मैं शहीद-ए-आजम भगत सिंह वाला देखता हूं। इसके बदले कुछ मांगता नहीं। उन्होंने एनआरआई से कहा कि आप लोगों के साथ मेरी सांझ पंजाब को बदलने की है। बदहाली वाले पंजाब को खुशहाली की तरफ लेकर जाना है। सिद्धू ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर निशाना साधते हुए कहा कि वह मुझे हराता रहा पर कभी शिकायत नहीं की और जब मौका मिला तो शिकस्त दी। करतारपुर साहिब वाला लांघा जिसे असंभव बताया जाता रहा, खुला कि नहीं। उन्होंने कहा कि एनआरआई पंजाब की आत्मा है, क्योंकि वे वहां एक अच्छे सिस्टम में जी रहे हैं और यहां पंजाब में अच्छा सिस्टम लागू किए जाने में सहयोगी हो सकते हैं। उन्होंने एनआरआई की जमीनों को दबाए जाने और अन्य मामलों को लेकर विश्वास टूटने की बात कही क्योंकि यहां के लोगों ने राजनीति को धंधा बनाकर पैसे कमाने का साधन बना लिया। मेरे लिए यह मिशन है, जिसमें मैं एनआरआआई भाइयों को अपना सहयोगी बनाऊंगा।
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सिद्धू ने कहा कि यह लड़ाई एक सिस्टम की है। जिसने 27-28 साल में पंजाब के उपर 3 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ाया। इसका मतलब है कि पंजाब की म्युनिसिपलिटी और स्टेट की इमारतें गिरवीं हैं। पंजाब की हर चीज गिरवी पड़ी है और यहां ऐसा कोई राजनीतिज्ञ नहीं जिसका घर गिरवी पड़ा हो। उन्होंने एनआरआई से कहा कि उन्हें (सिद्धू) उनसे (एनआरआई) डॉलर या पाउंड की जरूरत नहीं बल्कि वे एक-एक एनआरआई अपने 100-100 रिश्तेदारों को फोन कर पंजाब को बदलने वालों के लिए मत देने की अपील करें। उन्हें कहे कि इस बार किसी नेता को नहीं बल्कि सच्चाई और इमानदारी जिताना है।
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