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सुच्चा सिंह लंगाह ने फिर लगाई पंथ में शामिल करने की गुहार
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श्री अकाल तख्त पर पेश होकर माफीनामा देते अकाली नेता सुच्चा सिंह लगाह।
- फोटो : AMRITSAR
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पूर्व विधायक और एसजीपीसी सदस्य सुच्चा सिंह लंगाह ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को एक क्षमा याचना का पत्र लिखकर प्रार्थना की है कि उन्हें सिख पंथ में दोबारा शामिल किया जाए। लंगाह शुक्रवार सुबह अपने कुछ समर्थकों के साथ श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से मिलने उनके सचिवालय पहुंचे। उन्होंने जत्थेदार के निजी सचिव सुखदेव सिंह को एक क्षमा याचना पत्र सौंपा।
इसके बाद मीडिया से बातचीत में लंगाह ने कहा कि वह एक विनम्र सिख की भांति श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में पहुंचे हैं। उन्होंने जत्थेदार के निजी सचिव को एक पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने सिख पंथ में दोबारा शामिल करने की अपील की है।
सांसद विनोद खन्ना की मौत के बाद अक्तूबर 2017 में गुरदासपुर उपचुनाव के प्रचार दौरान कांग्रेस ने लंगाह की एक अश्लील वीडियो वायरल की थी। वह वीडियो इस उपचुनाव का मुद्दा बन गई थी। मामला श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचा तो तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने लंगाह को सिख पंथ से निष्काषित कर दिया था। इसके बाद शिअद (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने लंगाह की अकाली दल की प्राथमिक सदस्यता भी रद्द कर दी थी। बाद में गुरदासपुर की एक अदालत ने लंगाह को बरी कर दिया था। 2018 में भी लंगाह ने जत्थेदार श्री अकाल तख्त को सिख पंथ में दोबारा शामिल करने की अपील की थी। इसका संगत ने भारी विरोध किया था।
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इसके बाद मीडिया से बातचीत में लंगाह ने कहा कि वह एक विनम्र सिख की भांति श्री अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में पहुंचे हैं। उन्होंने जत्थेदार के निजी सचिव को एक पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने सिख पंथ में दोबारा शामिल करने की अपील की है।
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सांसद विनोद खन्ना की मौत के बाद अक्तूबर 2017 में गुरदासपुर उपचुनाव के प्रचार दौरान कांग्रेस ने लंगाह की एक अश्लील वीडियो वायरल की थी। वह वीडियो इस उपचुनाव का मुद्दा बन गई थी। मामला श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचा तो तत्कालीन जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने लंगाह को सिख पंथ से निष्काषित कर दिया था। इसके बाद शिअद (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने लंगाह की अकाली दल की प्राथमिक सदस्यता भी रद्द कर दी थी। बाद में गुरदासपुर की एक अदालत ने लंगाह को बरी कर दिया था। 2018 में भी लंगाह ने जत्थेदार श्री अकाल तख्त को सिख पंथ में दोबारा शामिल करने की अपील की थी। इसका संगत ने भारी विरोध किया था।
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