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तनाव में है भारत की 7.5 फीसदी आबादी : डॉ. हरजोत मक्कड़
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतसर। मानसिक तनाव एक ऐसा रोग है जो इंसान को अंदर से खोखला कर देता है। इस रोग का शिकार लोग चिंता में डूबे रहते हैं। कई बार आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत की 7.5 फीसदी आबादी, जो पूरे विश्व का 15 फीसदी है, मानसिक समस्या से जूझ रही है। यह बात प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. हरजोत मक्कड़ ने रंजीत एवेन्यू में आयोजित एक सेमिनार में कही।
उन्होंने कहा कि पटियाला में एक डॉक्टर द्वारा की गई आत्महत्या जैसे कई मामले हैं जब इंसान दुनिया से ऊबकर यह कदम उठाता है। जिंदगी खूबसूरत है, इसे जीने की कला आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 7.5 फीसदी आबादी किसी-न-किसी मानसिक समस्या से जूझ रही है, जो पूरे विश्व का 15 प्रतिशत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मानसिक तनाव का शिकार लोग इसे समझ ही नहीं पाते। इसके दुष्परिणाम सामने आने पर भी चिकित्सक के पास जाने से कतराते हैं।
डॉ. मक्कड़ ने कहा कि छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आना, चिंतित हो जाना, किसी वस्तु को पाने के लिए छटपटाना भी मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। वर्तमान में युवा पीढ़ी भी मानसिक तनाव का शिकार हो रही है। इसका कारण अत्याधिक इच्छाएं रखना है। हम खुद को स्थापित करने के लिए प्रयास करते रहें, लेकिन सफल न होने पर पुन: प्रयास करना नहीं छोड़ें। असफल रहने पर प्रयास छोड़ कर शराब या अन्य नशे की तरफ आकर्षित होना इंसान को तनाव की ओर ले जाता है और फिर धीरे-धीरे इंसान आत्महत्या की ओर बढ़ जाता है। इसके लिए जरूरी है कि अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखें। अच्छी बातों को याद रखें, बुरी यादों को कभी मस्तिष्क में न आने दें।
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अमृतसर। मानसिक तनाव एक ऐसा रोग है जो इंसान को अंदर से खोखला कर देता है। इस रोग का शिकार लोग चिंता में डूबे रहते हैं। कई बार आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत की 7.5 फीसदी आबादी, जो पूरे विश्व का 15 फीसदी है, मानसिक समस्या से जूझ रही है। यह बात प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. हरजोत मक्कड़ ने रंजीत एवेन्यू में आयोजित एक सेमिनार में कही।
उन्होंने कहा कि पटियाला में एक डॉक्टर द्वारा की गई आत्महत्या जैसे कई मामले हैं जब इंसान दुनिया से ऊबकर यह कदम उठाता है। जिंदगी खूबसूरत है, इसे जीने की कला आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत की 7.5 फीसदी आबादी किसी-न-किसी मानसिक समस्या से जूझ रही है, जो पूरे विश्व का 15 प्रतिशत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मानसिक तनाव का शिकार लोग इसे समझ ही नहीं पाते। इसके दुष्परिणाम सामने आने पर भी चिकित्सक के पास जाने से कतराते हैं।
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डॉ. मक्कड़ ने कहा कि छोटी-छोटी बात पर गुस्सा आना, चिंतित हो जाना, किसी वस्तु को पाने के लिए छटपटाना भी मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। वर्तमान में युवा पीढ़ी भी मानसिक तनाव का शिकार हो रही है। इसका कारण अत्याधिक इच्छाएं रखना है। हम खुद को स्थापित करने के लिए प्रयास करते रहें, लेकिन सफल न होने पर पुन: प्रयास करना नहीं छोड़ें। असफल रहने पर प्रयास छोड़ कर शराब या अन्य नशे की तरफ आकर्षित होना इंसान को तनाव की ओर ले जाता है और फिर धीरे-धीरे इंसान आत्महत्या की ओर बढ़ जाता है। इसके लिए जरूरी है कि अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखें। अच्छी बातों को याद रखें, बुरी यादों को कभी मस्तिष्क में न आने दें।
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