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नाटशाला में नाटक उफ ये बेवियां का हुआ मंचन
Updated Sat, 28 Apr 2018 11:04 PM IST
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नाटशाला में उफ्फ ये बीवियां का हुआ मंचन
नाटक के अंत में पाकिस्तानी अदाकारा व थिएटर डायरेक्टर मदिहा गौहर के निधन पर शोक जताया
अमृतसर
पंजाब नाटशाला में शनिवार की शाम अमनदीप सिंह लिखित एवं निदेर्शित नाटक उफ ये बीवियां का मंचन हुआ। कहानी एक फोटोग्राफर के इर्दगिर्द घूमती है। कि कैसे फोटोग्राफर दो शादियों के चक्कर में फंसता चला जाता है और दोहरी जिदंगी के चलते अपने परिवार से दूर हो जाता है। कहानी में एक वक्त आता है कि जब फोटोग्राफर दुर्घटना का शिकार होकर अस्पताल पहुंचता है, पुलिस केस के बाद जब पहचान होती है तो दोनों बीवियों औैर पुलिस अधिकारियों को सफाई देने में नाकामयाब रहता है। वह खुद ही अपने बुने जाल में फंस जाता है। नाटक को हास्य और मनोरंजन के साथ समाज में शादी के अलावा कई रिश्ते रखने वाले पुरुषों के लिए एक मजबूत संदेश छोड़ जाता है कि शादी के अलावा रिश्ता सभी के लिए नुकसानदेह साबित होता है।
गौहर ने महिलाओं से संबंधित मुद्दे उठाए
नाटक में कलाकार खुशबू वर्मा, नेहा दयाल, सोनिया जोहल, हरनेक सिंह, निशान सिंह, भारत बरयाल, राहुल वर्मा, विशाल रामपाल, अजीत कुमार, सेंडी, मेघा, सोनिया जोहल ने बखूबी भूमिका निभाई। नाटक के अंत में पाकिस्तान की नामवर अदाकारा व सोशल थिएटर डायरेक्टर मदिहा गौहर के निधन पर पंजाब नाटशाला संस्था ने शोक व्यक्त किया है। नाटक के अंत में गौहर की आत्मिक शांति के लिए रखे गए 2 मिनट के मौन के बाद नाटशाला संस्थापक जतिंदर बराड़ ने कहा कि 1956 में कराची में जन्मी गौहर ने अपने नाटकों में खास तौर पर महिलाओं से संबंधित मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने सामाजिक, सामंती, सियासी बुराइयों तथा आतंकवाद के खिलाफ नाटकों के जरिये लड़ाई जारी रखी। टोबा टेक सिंह, बुल्ला, दारा, मेरा रंग दे बसंती चोला, कौन है ये गुस्ताख इत्यादि उनके प्रमुख नाटकों में हैं। उनके नाटक आज भी भारत के रंगमंच प्रेमियों के दिलों में विशेष स्थान रखते हैं। रंगमंच के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान था।
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नाटक के अंत में पाकिस्तानी अदाकारा व थिएटर डायरेक्टर मदिहा गौहर के निधन पर शोक जताया
अमृतसर
पंजाब नाटशाला में शनिवार की शाम अमनदीप सिंह लिखित एवं निदेर्शित नाटक उफ ये बीवियां का मंचन हुआ। कहानी एक फोटोग्राफर के इर्दगिर्द घूमती है। कि कैसे फोटोग्राफर दो शादियों के चक्कर में फंसता चला जाता है और दोहरी जिदंगी के चलते अपने परिवार से दूर हो जाता है। कहानी में एक वक्त आता है कि जब फोटोग्राफर दुर्घटना का शिकार होकर अस्पताल पहुंचता है, पुलिस केस के बाद जब पहचान होती है तो दोनों बीवियों औैर पुलिस अधिकारियों को सफाई देने में नाकामयाब रहता है। वह खुद ही अपने बुने जाल में फंस जाता है। नाटक को हास्य और मनोरंजन के साथ समाज में शादी के अलावा कई रिश्ते रखने वाले पुरुषों के लिए एक मजबूत संदेश छोड़ जाता है कि शादी के अलावा रिश्ता सभी के लिए नुकसानदेह साबित होता है।
गौहर ने महिलाओं से संबंधित मुद्दे उठाए
नाटक में कलाकार खुशबू वर्मा, नेहा दयाल, सोनिया जोहल, हरनेक सिंह, निशान सिंह, भारत बरयाल, राहुल वर्मा, विशाल रामपाल, अजीत कुमार, सेंडी, मेघा, सोनिया जोहल ने बखूबी भूमिका निभाई। नाटक के अंत में पाकिस्तान की नामवर अदाकारा व सोशल थिएटर डायरेक्टर मदिहा गौहर के निधन पर पंजाब नाटशाला संस्था ने शोक व्यक्त किया है। नाटक के अंत में गौहर की आत्मिक शांति के लिए रखे गए 2 मिनट के मौन के बाद नाटशाला संस्थापक जतिंदर बराड़ ने कहा कि 1956 में कराची में जन्मी गौहर ने अपने नाटकों में खास तौर पर महिलाओं से संबंधित मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने सामाजिक, सामंती, सियासी बुराइयों तथा आतंकवाद के खिलाफ नाटकों के जरिये लड़ाई जारी रखी। टोबा टेक सिंह, बुल्ला, दारा, मेरा रंग दे बसंती चोला, कौन है ये गुस्ताख इत्यादि उनके प्रमुख नाटकों में हैं। उनके नाटक आज भी भारत के रंगमंच प्रेमियों के दिलों में विशेष स्थान रखते हैं। रंगमंच के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान था।
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