{"_id":"5ab680de4f1c1b00768b76d0","slug":"161521909982-amritsar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाबी फिल्मों में भी अपनी खतरनाक खलनायिकी का झंडा गाड़ेंगे टीनू वर्मा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाबी फिल्मों में भी अपनी खतरनाक खलनायिकी का झंडा गाड़ेंगे टीनू वर्मा
Updated Sat, 24 Mar 2018 10:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलकार बाली ‘आसरा’ की शूटिंग के लिए पहुंचे गुरु नगरी
पंजाबी फिल्मों में भी अपनी खलनायिकी का लोहा मनवाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर।
साल 2000 में आई आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘मेला’ गुर्जर का किरदार निभाने वाले टीनू वर्मा अब पंजाबी फिल्मों में भी किस्मत आजमाएंगे। प्रोड्यूसर राज कुमार की बलकार बाली निर्देशित फिल्म ‘आसरा’ की शूटिंग के लिए वे अमृतसर पहुंचे हैं। पहली बात अमृतसर पहुंचने पर मेहमानवाजी देख अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह यहां के लोगों के मुरीद होकर रह गए हैं। हालांकि पर्दे पर वह जितने खतरनाक लगते हैं, आम जिंदगी में उतने ही सरल और मिलनसार हैं। उनका कहना है कि स्वर्ण मंदिर आकर लगा कि जैसे उन्होंने एक अद्वितीय दुनिया के दर्शन कर लिए हों। उन्होंने बताया कि फिल्मी करियर की शुरुआत उन्होंने 1993 से की थी। उनकी पहली फिल्म ‘आंखें’ थी। इसके बाद आंखें, मेला, सौतन, हिम्मत और मां तुझे सलाम जैसी कई फिल्मों में काम किया।
पिछले कुछ समय से फिल्मों से दूरी बनाए रखने के बारे में टीनू ने बताया कि डायरेक्टर बाली ने उनको पंजाबी सिने जगत में उतरने की बात कही तो वे मना नहीं कर सके। वह कहते हैं कि फिल्में हीरो के चाकलेटी चेहरों से ही नहीं चलतीं। खलनायक भी उतनी ही अहमियत रखता है। उनके अनुसार आज का दर्शक एक्शन, स्टंट को तवज्जो देता है।
विज्ञापन
पंजाबी फिल्मों में भी अपनी खलनायिकी का लोहा मनवाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
अमृतसर।
साल 2000 में आई आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘मेला’ गुर्जर का किरदार निभाने वाले टीनू वर्मा अब पंजाबी फिल्मों में भी किस्मत आजमाएंगे। प्रोड्यूसर राज कुमार की बलकार बाली निर्देशित फिल्म ‘आसरा’ की शूटिंग के लिए वे अमृतसर पहुंचे हैं। पहली बात अमृतसर पहुंचने पर मेहमानवाजी देख अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह यहां के लोगों के मुरीद होकर रह गए हैं। हालांकि पर्दे पर वह जितने खतरनाक लगते हैं, आम जिंदगी में उतने ही सरल और मिलनसार हैं। उनका कहना है कि स्वर्ण मंदिर आकर लगा कि जैसे उन्होंने एक अद्वितीय दुनिया के दर्शन कर लिए हों। उन्होंने बताया कि फिल्मी करियर की शुरुआत उन्होंने 1993 से की थी। उनकी पहली फिल्म ‘आंखें’ थी। इसके बाद आंखें, मेला, सौतन, हिम्मत और मां तुझे सलाम जैसी कई फिल्मों में काम किया।
पिछले कुछ समय से फिल्मों से दूरी बनाए रखने के बारे में टीनू ने बताया कि डायरेक्टर बाली ने उनको पंजाबी सिने जगत में उतरने की बात कही तो वे मना नहीं कर सके। वह कहते हैं कि फिल्में हीरो के चाकलेटी चेहरों से ही नहीं चलतीं। खलनायक भी उतनी ही अहमियत रखता है। उनके अनुसार आज का दर्शक एक्शन, स्टंट को तवज्जो देता है।
विज्ञापन