{"_id":"5b76fa2c42c79246547c3ec6","slug":"131534523948-amritsar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं रहे अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन में अढ़ाई साल सजा काट चुके स्वतंत्रता सेनानी बचित्र सिंह, 103 साल की आयु में निधन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं रहे अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन में अढ़ाई साल सजा काट चुके स्वतंत्रता सेनानी बचित्र सिंह, 103 साल की आयु में निधन
Updated Fri, 17 Aug 2018 10:20 PM IST
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सभी केंद्र, वीरवार को निधन और शुक्रवार को संस्कार हुआ है।
स्वतंत्रता सेनानी बचित्र सिंह का 103 की उम्र में निधन
अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में ढाई साल तक रहे जेल में
जिला प्रशासनिक अधिकारियों और विधायक ने दी श्रद्धांजलि
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिला था ताम्रपत्र
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट। अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में ढाई साल तक जेल में रहे पठानकोट के ओल्ड शाहपुर रोड निवासी स्वतंत्रता सेनानी बचित्र सिंह का वीरवार को रात निधन हो गया। 103 साल की आयु में उन्होंने अपने निवास स्थान पर आखिरी सांस ली। महात्मा गांधी के चलाए गए भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने कई सभाओं और अधिवेशनों में आजादी की लड़ाई का जज्बा पैदा किया। पकड़े जाने पर ढाई साल लाहौर सेंटर जेल में रहे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में बचित्र सिंह को ताम्रपत्र से सम्मानित किया था। बचित्र सिंह स्वतंत्रता सेनानी के साथ सरकारी अध्यापक, समाज सेवक व लेखक भी थे। शुक्रवार को दोपहर सरकारी सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार सिविल अस्पताल के पास स्थित श्मशानघाट में किया गया। इस दौरान विधायक अमित विज, एसडीएम अमित महाजन और अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं एसपी हेडक्वाटर्र रणजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस पार्टी ने स्वतंत्रता सेनानी को सलामी दी। मुखाग्नि उनके बड़े बेटे महावीर सिंह ने दी। इस अवसर पर कई सामाजिक, धार्मिक व राजनीतिक संगठनों के नेताओं व सदस्यों ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंग्रेजों ही नहीं देश की कार्यप्रणाली के खिलाफ भी लड़ी लड़ाई
वयोवृद्ध फ्रीडम फाइटर डॉ. बचित्र सिंह को शहर का हर शख्स जानता था। 100 साल की आयु तक वह कहीं भी सरकारी अव्यवस्था के खिलाफ खड़े हो जाते थे। आजाद भारत में उन्होंने करीब 235 धरने दिए, जो पठानकोट के अलावा दिल्ली सहित कई राज्यों में आयोजित हुए। कार्यपालिका में सुधार के लिए उन्होंने 2008 में आल इंडिया फ्रीडम फाइटर शिकायत कमेटी का गठन किया। कमेटी में 5000 से अधिक शिकायतें आईं, जिनमें से 4200 के करीब शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है। डॉ. बचित्र सिंह का कहना था कि वह अपनी निजी लड़ाई नहीं बल्कि आम पब्लिक को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ते हैं। कहते थे, जंग का अंजाम चाहे भी जो हो, वह अव्यवस्था सहन नहीं करेंगे।
फोटो:-5- बचित्र सिंह को श्रद्धांजलि देते एसडीएम अमित महाजन और विधायक अमित विज।
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सभी केंद्र, वीरवार को निधन और शुक्रवार को संस्कार हुआ है।
स्वतंत्रता सेनानी बचित्र सिंह का 103 की उम्र में निधन
अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में ढाई साल तक रहे जेल में
जिला प्रशासनिक अधिकारियों और विधायक ने दी श्रद्धांजलि
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मिला था ताम्रपत्र
अमर उजाला ब्यूरो
पठानकोट। अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में ढाई साल तक जेल में रहे पठानकोट के ओल्ड शाहपुर रोड निवासी स्वतंत्रता सेनानी बचित्र सिंह का वीरवार को रात निधन हो गया। 103 साल की आयु में उन्होंने अपने निवास स्थान पर आखिरी सांस ली। महात्मा गांधी के चलाए गए भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने कई सभाओं और अधिवेशनों में आजादी की लड़ाई का जज्बा पैदा किया। पकड़े जाने पर ढाई साल लाहौर सेंटर जेल में रहे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल में बचित्र सिंह को ताम्रपत्र से सम्मानित किया था। बचित्र सिंह स्वतंत्रता सेनानी के साथ सरकारी अध्यापक, समाज सेवक व लेखक भी थे। शुक्रवार को दोपहर सरकारी सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार सिविल अस्पताल के पास स्थित श्मशानघाट में किया गया। इस दौरान विधायक अमित विज, एसडीएम अमित महाजन और अन्य प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं एसपी हेडक्वाटर्र रणजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस पार्टी ने स्वतंत्रता सेनानी को सलामी दी। मुखाग्नि उनके बड़े बेटे महावीर सिंह ने दी। इस अवसर पर कई सामाजिक, धार्मिक व राजनीतिक संगठनों के नेताओं व सदस्यों ने उनको श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंग्रेजों ही नहीं देश की कार्यप्रणाली के खिलाफ भी लड़ी लड़ाई
वयोवृद्ध फ्रीडम फाइटर डॉ. बचित्र सिंह को शहर का हर शख्स जानता था। 100 साल की आयु तक वह कहीं भी सरकारी अव्यवस्था के खिलाफ खड़े हो जाते थे। आजाद भारत में उन्होंने करीब 235 धरने दिए, जो पठानकोट के अलावा दिल्ली सहित कई राज्यों में आयोजित हुए। कार्यपालिका में सुधार के लिए उन्होंने 2008 में आल इंडिया फ्रीडम फाइटर शिकायत कमेटी का गठन किया। कमेटी में 5000 से अधिक शिकायतें आईं, जिनमें से 4200 के करीब शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है। डॉ. बचित्र सिंह का कहना था कि वह अपनी निजी लड़ाई नहीं बल्कि आम पब्लिक को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ते हैं। कहते थे, जंग का अंजाम चाहे भी जो हो, वह अव्यवस्था सहन नहीं करेंगे।
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फोटो:-5- बचित्र सिंह को श्रद्धांजलि देते एसडीएम अमित महाजन और विधायक अमित विज।