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नौकरी करने की बजाय नौकरी देने वाले बनें- सतीश
Updated Sun, 08 Apr 2018 10:20 PM IST
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‘नौकरी करने की बजाय देने वाले बनें’
बटाला में रोजगार का स्वदेशी मॉडल विषय पर वर्कशाप का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
बटाला।
स्वदेेशी जागरण मंच ने रोजगार का स्वदेशी मॉडल विषय पर वर्कशाप का आयोजन रविवार को कम्यूनिटी हाल में किया। वर्कशाप में अमृतसर, तरनतारन, कादियां, बटाला, पठानकोट, होशियारपुर, बहिरामपुर और गुरदासपुर से डेलिगेटों ने हिस्सा लिया। मुख्य वक्ता के रूप में स्वदेशी जागरण मंच के उत्तर-मध्य भारत के संघटक सतीश ने शिरकत की।
भारत माता की प्रतिमा के आगे ज्योति प्रज्ज्वलित करके वर्कशाप की शुरूआत की गई। मुख्य वक्ता सतीश ने कहा कि देश की बदकिस्मती रही है कि 1950 से 1990 तक हम सब रूस के आर्थिक मॉडल की नकल करते रहे। 1950 से 1990 से 2008 तक अमरीका की नकल करते रहे। अब आलम यह है कि 2008 से लेकर आज तक हम चीन के आर्थिक मॉडल की मदद कर रहें हैं, जबकि अपने ही देश के प्राचीन गांवों पर आधारित आर्थिक मॉडल को नजरअंदाज किया है औैर अपनी प्राचीन परंपराओं को हम खत्म कर बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि 1500 ई. तक भारत में पूर्ण रोजगार की स्थिति थी। अंग्रेजों के आगमन के बाद भारत में बेरोजगारी पैदा हुई। घरेलू उद्योग तो पूरी तरह खत्म हो गये। बेरोजगारी की ऐसी स्थिति में काम करने की बजाय नौजवान वर्ग नौकरी करने के पीछे भागने लगा। उन्होंने युवकों से अपील की है कि वह नौकरी करने की बजाय देने वाले बनें। प्रांत संयोजक चंद्र शेखर ने कहा कि आज भारत के उद्योग के लिए सबसे बड़ा खतरा चीन है और भारत के लोगों को चाहिए कि वह चीन की बनी चीजों का उपयोग न करें। संदीप सलहोत्रा ने कहा कि स्वदशी विचारधारा लोगों में अपनी पहचान बना रही है और जल्द ही पूरे भारत प्रांत में वार्ड और गांव स्तर पर स्वदेशी इकाईयों का गठन हो जाएगा। मंच का संचालन प्रो. सुनील दत्त ने किया। इस मौके पर जगमोहन सिंह,राकेश वर्मा,भूपिंदर सिंह,सुमित सोढ़ी, अजय गुप्ता, नरिंदर शर्मा उपस्थित थे।
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बटाला में रोजगार का स्वदेशी मॉडल विषय पर वर्कशाप का आयोजन
अमर उजाला ब्यूरो
बटाला।
स्वदेेशी जागरण मंच ने रोजगार का स्वदेशी मॉडल विषय पर वर्कशाप का आयोजन रविवार को कम्यूनिटी हाल में किया। वर्कशाप में अमृतसर, तरनतारन, कादियां, बटाला, पठानकोट, होशियारपुर, बहिरामपुर और गुरदासपुर से डेलिगेटों ने हिस्सा लिया। मुख्य वक्ता के रूप में स्वदेशी जागरण मंच के उत्तर-मध्य भारत के संघटक सतीश ने शिरकत की।
भारत माता की प्रतिमा के आगे ज्योति प्रज्ज्वलित करके वर्कशाप की शुरूआत की गई। मुख्य वक्ता सतीश ने कहा कि देश की बदकिस्मती रही है कि 1950 से 1990 तक हम सब रूस के आर्थिक मॉडल की नकल करते रहे। 1950 से 1990 से 2008 तक अमरीका की नकल करते रहे। अब आलम यह है कि 2008 से लेकर आज तक हम चीन के आर्थिक मॉडल की मदद कर रहें हैं, जबकि अपने ही देश के प्राचीन गांवों पर आधारित आर्थिक मॉडल को नजरअंदाज किया है औैर अपनी प्राचीन परंपराओं को हम खत्म कर बैठे हैं।
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उन्होंने कहा कि 1500 ई. तक भारत में पूर्ण रोजगार की स्थिति थी। अंग्रेजों के आगमन के बाद भारत में बेरोजगारी पैदा हुई। घरेलू उद्योग तो पूरी तरह खत्म हो गये। बेरोजगारी की ऐसी स्थिति में काम करने की बजाय नौजवान वर्ग नौकरी करने के पीछे भागने लगा। उन्होंने युवकों से अपील की है कि वह नौकरी करने की बजाय देने वाले बनें। प्रांत संयोजक चंद्र शेखर ने कहा कि आज भारत के उद्योग के लिए सबसे बड़ा खतरा चीन है और भारत के लोगों को चाहिए कि वह चीन की बनी चीजों का उपयोग न करें। संदीप सलहोत्रा ने कहा कि स्वदशी विचारधारा लोगों में अपनी पहचान बना रही है और जल्द ही पूरे भारत प्रांत में वार्ड और गांव स्तर पर स्वदेशी इकाईयों का गठन हो जाएगा। मंच का संचालन प्रो. सुनील दत्त ने किया। इस मौके पर जगमोहन सिंह,राकेश वर्मा,भूपिंदर सिंह,सुमित सोढ़ी, अजय गुप्ता, नरिंदर शर्मा उपस्थित थे।
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