{"_id":"59b803074f1c1b30698b4b8a","slug":"101505231623-amritsar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पराली न जलाने वाली पंचायत को मिलेगा सम्मान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पराली न जलाने वाली पंचायत को मिलेगा सम्मान
Updated Tue, 12 Sep 2017 09:23 PM IST
विज्ञापन
‘पराली न जलाने वाली पंचायत होगी पुरस्कृत’
पठानकोट।
इस सीजन में धान की पराली न जलाने वाले गांव की पंचायत को जिला प्रशासन सम्मानित करेगा। यह जानकारी डीसी नीलिमा ने दी। उन्होनें कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की पाबंदी के मद्देनजर किसानों को धान की पराली को जलाने से होने वाले नुकसान बारे जागरूक करने के लिए जिले में कृषि विभाग ने विशेष मुहिम चलाई है। मुहिम अक्तूबर तक जारी रहेगी।
डीसी ने कहा कि जिले में तकरीबन 27000 हेक्टेयर रकबे में धान एवं बासमती की काश्त की जाती है। इससे तकरीबन एक लाख 75 हजार 500 टन पराली पैदा होती है। उन्होंने बताया कि पिछले सीजन में जिला प्रशासन, कृषि विभाग एवं पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के संयुक्त प्रयासों के चलते जिले में कोई भी धान की पराली को आग लगाकर जलाने का मामला सामने नहीं आया था। उन्होंने बताया कि सारी की सारी पराली पशु पालकों को औसतन 4200 रुपये प्रति हेक्टेयर बेचकर किसानों को तकरीबन 11 करोड़ 34 लाख का फायदा हुआ।
उन्होंने कहा कि जो भी पंचायत धान की पराली को न जलाकर हवा के प्रदूषण को रोकने बारे प्रस्ताव पास करके बेहतर कार्य करेगी, उस पंचायत को विशेष तौर पर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने किसानों को अपील करते हुए कहा कि वह अपनी जमीन की सेहत बरकरार रखने एवं हवा को प्रदूषण होने से बचाने के लिए धान की कटाई के बाद खेतों में पराली को आग न लगाएं। उन्होंने बताया कि गांव डेयरीवाल में बनी गोशाल में किसान पराली दान करने के अलावा एवं बेच भी सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पठानकोट।
इस सीजन में धान की पराली न जलाने वाले गांव की पंचायत को जिला प्रशासन सम्मानित करेगा। यह जानकारी डीसी नीलिमा ने दी। उन्होनें कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की पाबंदी के मद्देनजर किसानों को धान की पराली को जलाने से होने वाले नुकसान बारे जागरूक करने के लिए जिले में कृषि विभाग ने विशेष मुहिम चलाई है। मुहिम अक्तूबर तक जारी रहेगी।
डीसी ने कहा कि जिले में तकरीबन 27000 हेक्टेयर रकबे में धान एवं बासमती की काश्त की जाती है। इससे तकरीबन एक लाख 75 हजार 500 टन पराली पैदा होती है। उन्होंने बताया कि पिछले सीजन में जिला प्रशासन, कृषि विभाग एवं पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के संयुक्त प्रयासों के चलते जिले में कोई भी धान की पराली को आग लगाकर जलाने का मामला सामने नहीं आया था। उन्होंने बताया कि सारी की सारी पराली पशु पालकों को औसतन 4200 रुपये प्रति हेक्टेयर बेचकर किसानों को तकरीबन 11 करोड़ 34 लाख का फायदा हुआ।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जो भी पंचायत धान की पराली को न जलाकर हवा के प्रदूषण को रोकने बारे प्रस्ताव पास करके बेहतर कार्य करेगी, उस पंचायत को विशेष तौर पर सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने किसानों को अपील करते हुए कहा कि वह अपनी जमीन की सेहत बरकरार रखने एवं हवा को प्रदूषण होने से बचाने के लिए धान की कटाई के बाद खेतों में पराली को आग न लगाएं। उन्होंने बताया कि गांव डेयरीवाल में बनी गोशाल में किसान पराली दान करने के अलावा एवं बेच भी सकते हैं।
विज्ञापन