{"_id":"6562f2138d3dcb4afe09b1fb","slug":"sachindra-from-nainital-started-painting-for-livelihood-after-lost-both-his-hands-2023-11-26","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"नैनीताल के सचिंद्र का जज्बा: दोनों हाथ कट गए तो आजीविका के लिए शुरू की पेंटिंग, जिसने भी देखा हैरान रह गया!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नैनीताल के सचिंद्र का जज्बा: दोनों हाथ कट गए तो आजीविका के लिए शुरू की पेंटिंग, जिसने भी देखा हैरान रह गया!
Sun, 26 Nov 2023 12:52 PM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
Published by: हीरा मेहरा
Updated Sun, 26 Nov 2023 12:52 PM IST
सार
नैनीताल के सचिंद्र बिष्ट बहुत अच्छी पेंटिंग्स बनाते हैं। लेकिन खास और दुखद बात यह है कि सचिंद्र के दोनों हाथ कोहनी के ऊपर से काटने पड़े थे। साथ ही उनके पैरों की सारी उंगलियां भी काटी जा चुकी हैं।
विज्ञापन
सचिंद्र बिष्ट
- फोटो : अमर उजाला
सचिंद्र बिष्ट बहुत बेहतरीन पेंटिंग्स बनाते हैं। उनकी बनाई पेंटिंग देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है और पेंटिंग के खरीददार भी आते रहते हैं। लेकिन खास और दुखद बात यह है कि सचिंद्र के दोनों हाथ कोहनी के ऊपर से काटने पड़े थे। साथ ही उनके पैरों की सारी उंगलियां भी काटी जा चुकी हैं। सबसे अचंभित करने वाली बात यह है कि वे पहले ऐसे पेंटिंग नहीं करते थे बल्कि लगभग पचास वर्ष की उम्र में दोनों हाथ कट जाने के बाद उन्होंने आजीविका के लिए पेंटिंग शुरु की। अब उनका अगला प्रयास पहले की तरह पर्वतारोहण को फिर से शुरु करने का है।
सचिंद्र
- फोटो : अमर उजाला
सचिंद्र की कहानी जितनी दर्दनाक है उतनी ही प्रेरक भी। एक बार को इसे सुन कर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं लेकिन साथ ही उनके हौसले और जज्बे के आगे नत मस्तक हुए बगैर भी नहीं रहा जा सकता। नैनीताल से बी कॉम करने के बाद सचिंद्र ने मुंबई और दिल्ली में करियर तलाशा और वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, फिल्म मेकिंग में हाथ आजमाया और बहुत सफल रहे। पहाड़ और पर्वतारोहण के प्रति अपने अगाध प्रेम के चलते कुछ वर्ष पूर्व वे सब छोड़कर नैनीताल आ गए और मुक्तेश्वर के पास शीतला में लोगों को पर्वतारोहण के गुर सिखाने की अकादमी खोल ली।
सचिंद्र बिष्ट
- फोटो : अमर उजाला
यहां आर्टिफिशियल वॉल सहित प्राकृतिक शिलाओं में वे इसकी ट्रेनिंग देने लगे और एडवेंचर के शौकीन होने के चलते खुद भी माउंटेनियरिंग सहित बाइक से लंबी यात्राएं करने लगे। अपनी पसंद का खुशहाल जीवन चल रहा था। लेकिन 2023 में मार्च में उन्हें एक दिन बुखार आया। दो तीन दिन तक ठीक न होने पर उन्होंने हल्द्वानी जाकर दिखाया। उसी शाम उनके तमाम अंग ढीले पड़ गए और मेमोरी लॉस भी हो गया। परिजन तत्काल उन्हें दिल्ली ले गए। उन्हें बैक्टिरियल इन्फेक्शन से सेप्टीसीमिया और मल्टी ऑर्गन फेल्योर पाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
जख्मों को छिपाकर बना मरहम
- फोटो : अमर उजाला
लंबे समय तक अस्पताल में रहने के बावजूद गैंग्रीन उनके शरीर में फैल गया और चिकित्सकों ने कहा कि जीवन बचाने के लिए उनके दोनों हाथ और पैरों की सारी उंगलियां काटनी पड़ेंगी। यह सुनकर वे और परिजन दहशत में आ गए। सचिंद्र ने इससे साफ इंकार कर दिया और वापस हल्द्वानी आ गए। लेकिन अब विकल्प केवल यही बचा कि या जान गंवानी पड़े या फिर हाथ और उंगलियां। मजबूरी में दूसरा विकल्प चुनना पड़ा।
विज्ञापन
नैनीताल के सचिंद्र बिष्ट का अद्भुत जज्बा
- फोटो : अमर उजाला
जाहिर है इसके बाद उनका जीवन दुश्वार हो गया इलाज में लगभग 25 लाख के खर्चे से सारी जमा पूंजी निकल गई ऊपर से कर्ज भी हो गया। आगे रोजगार तो दूर सीधा खड़ा होना तक दुष्कर हो गया।
सचिंद्र बताते हैं कि पैरों की उंगलियां और हाथ न होने का सदमा अलग था साथ ही इनके बगैर संतुलन न बन पाने से वे खड़े भी नहीं हो पाते थे जबकि आजीविका का संकट पूरा मुस्तैद खड़ा था। अभी भी चलने में डगमगाते हैं। परिवार में पत्नी और दो बेटियां भी हैं जो अभी विद्यालय में ही हैं। ऐसे में उनके पर्वतारोही मित्रों, परिजनों ने बहुत हौसला बढ़ाया।
शालिनी सरस्वती से मिली प्रेरणा
हर तरफ से निराशा भरे दिनों में सचिंद्र बेंगलुरु की पैरालंपिक शालिनी सरस्वती से बहुत प्रेरित हुए। जिन्होंने ऐसे ही हालात में चारों हाथ पैर गंवाने के बाद भारत को रेसिंग में तमाम पदक दिलाए। इसके बाद सचिंद्र ने आजीविका के लिए पेंटिंग की शुरुआत की और अब तक दर्जनों पेंटिंग बना चुके हैं जिन्हें लोग बहुत पसंद कर रहे हैं और खरीद भी रहे हैं।
सचिंद्र बताते हैं कि पैरों की उंगलियां और हाथ न होने का सदमा अलग था साथ ही इनके बगैर संतुलन न बन पाने से वे खड़े भी नहीं हो पाते थे जबकि आजीविका का संकट पूरा मुस्तैद खड़ा था। अभी भी चलने में डगमगाते हैं। परिवार में पत्नी और दो बेटियां भी हैं जो अभी विद्यालय में ही हैं। ऐसे में उनके पर्वतारोही मित्रों, परिजनों ने बहुत हौसला बढ़ाया।
शालिनी सरस्वती से मिली प्रेरणा
हर तरफ से निराशा भरे दिनों में सचिंद्र बेंगलुरु की पैरालंपिक शालिनी सरस्वती से बहुत प्रेरित हुए। जिन्होंने ऐसे ही हालात में चारों हाथ पैर गंवाने के बाद भारत को रेसिंग में तमाम पदक दिलाए। इसके बाद सचिंद्र ने आजीविका के लिए पेंटिंग की शुरुआत की और अब तक दर्जनों पेंटिंग बना चुके हैं जिन्हें लोग बहुत पसंद कर रहे हैं और खरीद भी रहे हैं।