जौनपुर में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते स्कूलों में ताले लग गए तो शिक्षकों ने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए दूसरी राह भी तलाश ली। केराकत विकास खंड का बांसबारी गांव उन गांवों के लिए नजीर बन गया है, जहां स्कूल बंद होने के कारण बच्चों की पढ़ाई नहीं पो पा रही है।
प्राथमिक विद्यालय बांसबारी के प्रधानाध्यापक वीरेंद्र यादव ने अन्य शिक्षकों के साथ मिलकर गांव में बीस वालेंटियर तैयार किया है। यह वालेंटियर अलग अलग बस्तियों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बच्चों को पढ़ा रहे हैं। गांव के दो सौ बच्चों की यहा नियमित पाठशाला अलग अलग बस्तियों में चलती है। अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय बांसबारी के प्रधानाध्यापक वीरेंद्र प्रताप यादव एवं विद्यालय के अन्य शिक्षकों ने बांसबारी और बम्मावन गांव के 20 पढ़े लिखे नौजवानों की टोली तैयार की है।
विद्या दान कार्यक्रम के तहत कोरोना काल में विपरीत परिस्थिति से निबटने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करते हुए बच्चों को शिक्षा देने के लिए अलग अलग पाठशाला चला रहे हैं। इन वालेंटियरों के कुल आठ ग्रुप बनाए गए हैं, जिसमें करीब 200 छात्र हैं। कक्षाओं के संचालन के लिए आवश्यक संसाधन ग्रीन बोर्ड, चॉक-डस्टर, मार्कर, हैण्ड सैनिटाइजर, मास्क आदि सामग्री प्राथमिक विद्यालय बांसबारी की ओर से उपलब्ध कराया गया है।
प्रियंका सिंह, अमन सिंह, विराट सिंह, प्रियांशी सिंह को बांसबारी खास, अंकित कुमार निषाद, शिवांगी यादव को बम्मावन निषाद बस्ती, प्रिंस चौहान, कृष्णा चौहान को बम्मावन चौहान बस्ती, अंजली, अमित कुमार यादव, प्रियंका को टड़िया पुरवा, आदर्श कुमार, राहुल को झोरिया बस्ती, विशाल निषाद, शिल्पा निषाद को बांसबारी निषाद बस्ती और रंजीत, धीरज प्रजापति, नेहा को टड़िया नंबर दो, प्रियंका, साक्षी को कोइरान बस्ती बांसबारी में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
यह सभी वालेंटियर यहां नियमित रूप से अपनी-अपनी बस्तियों के बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सभी विषय पढ़ा रहे हैं। प्रधानाध्यापक वीरेंद्र यादव कहते हैं कि सभी बस्तियों में नियमित रूप से पाठशाला चलती है। समय समय पर उन्हें शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।